World Contraception Day: विश्व गर्भनिरोधक दिवस पर जानें गर्भनिरोधक गोलियां कैसे काम करती हैं, इनके फायदे, संभावित साइड इफेक्ट और सेवन से जुड़ी जरूरी सावधानियां।
World Contraception Day: विश्व गर्भनिरोधक दिवस हर साल 26 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य गर्भनिरोधक के अलग-अलग तरीकों और सुरक्षित परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। गर्भनिरोधक गोलियां अनचाही प्रेग्नेंसी से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रभावी तरीकों में शामिल हैं। लेकिन इन्हें लेकर कई तरह की गलतफहमियां भी हैं।
WHO के अनुसार, अधिकांश महिलाएं ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव का सुरक्षित रूप से इस्तेमाल कर सकती हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर गर्भनिरोधक का चुनाव अलग हो सकता है। इसलिए गोली शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। यहां आज के इस लेख में हम आपको इसके बारे में डिटेल में जानकारी देंगे।
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गर्भनिरोधक गोलियां कैसे काम करती हैं?
- फोटो : Adobe Stock
गर्भनिरोधक गोलियां कैसे काम करती हैं?
गर्भनिरोधक गोलियों के दो प्रमुख प्रकार होते हैं। कंबाइंड ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन दोनों हार्मोन होते हैं, जबकि प्रोजेस्टिन-ओनली पिल में केवल प्रोजेस्टिन होता है। ये मुख्य रूप से ओव्यूलेशन को रोकने या उसमें बदलाव करने और सर्विक्स के म्यूकस को गाढ़ा करने जैसे तरीकों से गर्भधारण की संभावना कम करती हैं।
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गर्भनिरोधक गोलियां कैसे काम करती हैं?
- फोटो : AI
गर्भनिरोधक गोलियों के फायदे
अनचाही प्रेग्नेंसी से बचाव में मदद करती हैं।
पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन और ज्यादा ब्लीडिंग को कम करने में मदद मिल सकती है।
कुछ महिलाओं में मुंहासे और पीसीओएस से जुड़े कुछ लक्षणों में सुधार देखा जा सकता है।
कुछ गर्भनिरोधक गोलियों के लंबे समय तक इस्तेमाल से ओवेरियन और एंडोमेट्रियल कैंसर का जोखिम कम हो सकता है।
गोली बंद करने के बाद सामान्य तौर पर प्रजनन क्षमता जल्दी वापस आ जाती है।
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- फोटो : AI
क्या इसके नुकसान या साइड इफेक्ट भी हैं?
कुछ महिलाओं को गोली लेने के बाद मतली, सिरदर्द, चक्कर, मूड में बदलाव, स्तनों में संवेदनशीलता या पीरियड्स के पैटर्न में बदलाव महसूस हो सकता है। कई मामलों में ये समस्याएं समय के साथ कम हो जाती हैं।
एस्ट्रोजन वाली कुछ गोलियों से बहुत दुर्लभ मामलों में खून के थक्के, स्ट्रोक या हार्ट अटैक जैसे गंभीर जोखिम जुड़े हो सकते हैं। इसलिए हर महिला के लिए एक ही गर्भनिरोधक गोली उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर डॉक्टर उचित विकल्प चुनने में मदद कर सकते हैं।
गर्भनिरोधक गोली को डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना जरूरी है। गोली गर्भावस्था से बचाव में मदद करती है, लेकिन एसटीआई और एचआईवी से सुरक्षा नहीं देती। हमेशा इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल को रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली गर्भनिरोधक गोली से अलग समझना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।