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World Cancer Day 2022: भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम अधिक, जानिए इसके लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

Fri, 04 Feb 2022 01:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्तन कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
कैंसर की बढ़ती रफ्तार, पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां की स्थिति और भी परेशान करने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2010-2019 के बीच भारत में कैंसर के मामलों में औसत वार्षिक दर में करीब दो फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। 30 दिसंबर, 2021 को जामा जर्नल में प्रकाशित वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन के यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) के विश्लेषण के अनुसार, भारत में कैंसर की बढ़ती यह रफ्तार काफी तेज और चिंताजनक है। रिकॉर्ड्स पर नजर डालें तो साल 2020 में देश में कैंसर रोगियों की कुल संख्या करीब 14 लाख बताई जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया इसमें भी स्तन, फेफड़े, मुंह, गर्भाशय ग्रीवा और जीभ के कैंसर के मामले सबसे अधिक हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक ब्रेस्ट कैंसर सबसे तेजी से बढ़ने वाले कैंसर में से एक है, खास बात यह है कि भारतीय महिलाओं में इस कैंसर का जोखिम भी कई वजहों से अधिक पाया गया है। महिलाओं में होने कैंसर के मामलों में 14 फीसदी केस स्तन कैंसर के होते हैं। देश के ग्रामीण हिस्सों की तुलना में शहरी महिलाओं में इसका खतरा अधिक पाया गया है। आइए आगे की स्लाइडों में ब्रेस्ट कैंसर के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।
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स्तन कैंसर का बढ़ता जोखिम - फोटो : iStock
ब्रेस्ट कैंसर क्यों होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक स्तन में कुछ कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण ब्रेस्ट कैंसर होता है। ये कैंसर कोशिकाएं, स्वस्थ कोशिकाओं की तुलना में अधिक तेजी से विभाजित होती हैं और जमा होने लगती हैं, जिसके कारण गांठ बन जाती है। यह कोशिकाएं स्तन के माध्यम से लिम्फ नोड्स या शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक स्तन में गांठ को आसानी से महसूस किया जा सकता है। इस बारे में सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
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स्तन में असमान्यता को न करें नजरअंदाज - फोटो : pixabay
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण क्या होते हैं?
मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक स्तन में बदलाव के आधार पर ब्रेस्ट कैंसर का अंदाजा लगाया जा सकता है। यदि आपको स्तन में कुछ इस तरह के बदलाव नजर आते हैं तो इस बारे में तुरंत सावधान हो जाएं।
  • स्तन में गांठ महसूस होना जो आसपास के ऊतक से अलग होता है।
  • स्तन के आकार और बनावट में असामान्य परिवर्तन नजर आना।
  • स्तन के ऊपर की त्वचा में परिवर्तन जैसे डिंपलिंग।
  • निप्पल (एरिओला) या स्तन की त्वचा के आसपास की त्वचा में बदलाव या खून आने जैसी समस्या।
  • स्तन के ऊपर की त्वचा का लाल होना।
  • निप्पल से असामान्य रूप से डिस्चार्ज होना।

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धूम्रपान बढ़ा सकता है खतरा - फोटो : istock
किन्हें स्तन कैंसर का खतरा अधिक होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कई कारक हैं जो आपमें स्तन कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसमें उम्र, कैंसर का पारिवारिक इतिहास, शराब का सेवन, रेडिएशन के अधिक संपर्क में रहना, हार्मोनल ट्रीटमेंट जैसे कारक शामिल हैं। इसके अलावा जीवनशैली की कुछ खराब आदतों के कारण भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापा बढ़ने के कारण भी आपमें स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
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डॉक्टर से लें सलाह - फोटो : Pixabay
स्तन कैंसर का क्या इलाज है?
कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक अगर समय रहते स्थिति का निदान हो जाए तो कैंसर के जोखिमों को कम करना आसान हो जाता है, इसलिए सभी लोगों को लक्षणों के प्रति विशेष सावधान रहना चाहिए। स्तन कैंसर का पता चलने के बाद आपकी स्थिति और रोग के स्टेज के आधार पर इलाज किया जाता है। कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी या रेडिएशन थेरपी के माध्यम से इसका इलाज किया जाता है, वहीं गंभीर स्थितियों में सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है। बहुत गंभीर स्थितियों में पूरे स्तन को भी निकालना पड़ सकता है।
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ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के करें उपाय - फोटो : Pixabay
स्तन कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ बातों को ध्यान में रखकर स्तर कैंसर से बचाव किया जा सकता है। यदि आपके परिवार में किसी को पहले इस तरह की दिक्कत रह चुकी है तो आपको विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह पर स्क्रीनिंग कराते रहें। कैंसर से बचाव के लिए आहार और जीवनशैली को स्वस्थ बनाए रखना आवश्यक माना जाता है। यदि आप शराब या धूम्रपान का सेवन करते हैं तो इससे दूरी बना लें, ऐसी आदतें कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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