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Study: सभी महिलाएं गंभीरता से दें ध्यान, इस समस्या के कारण 45 की आयु में ही हो सकता है मेनोपॉज

Fri, 22 Sep 2023 05:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की समस्या - फोटो : istock
महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। पीसीओएस जैसी समस्याओं को अनदेखा करना भविष्य में आपके लिए कई प्रकार की समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। अध्ययन से पता चलता है कि प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की समस्या की शिकार महिलाओं में  45 वर्ष की आयु से पहले रजोनिवृत्ति होने की आशंका अधिक हो सकती है।

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के विभिन्न प्रकार के संकेत और लक्षण होते हैं, जिनमें मूड में बदलाव, फूड क्रेविंग होना, थकान, चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसी समस्याएं शामिल हैं। डॉक्टर्स का अनुमान है कि मासिक धर्म के दौरान हर चार में से तीन महिलाओं को प्रीमेंस्ट्रुअल डिसऑर्डर (पीएमडी) का अनुभव हो सकता है।

शोधकर्ताओं कहते हैं, सभी महिलाओं को इस तरह के जोखिमों को लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता होती है, इन समस्याओं को अनदेखा करना भविष्य में आपके लिए गंभीर जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। समय से पहले  मनोपॉज होना भी समस्याकारक स्थिति है। 
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समय से पहले मेनोपॉज - फोटो : istock
प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम और समय से पहले मेनोपॉज

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर भारतीय महिलाओं को 50-55 की आयु के बीच मनोपॉज होती है, कुछ स्थितियां इसके समय में बदलाव का कारण हो सकती हैं।

जामा नेटवर्क जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की समस्या की शिकार महिलाओं में कई प्रकार के जोखिम अधिक हो सकते हैं। अध्ययनकर्ताओं ने 3,600 से अधिक प्रतिभागियों के डेटा का अध्ययन किया जिसके निष्कर्षों को लेकर अलर्ट किया गया है। पीएमडी वाली महिलाओं में जल्दी रजोनिवृत्ति होने की आशंका दोगुनी से अधिक थी।
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प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम - फोटो : istock
प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं में कई प्रकार की प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की दिक्कतें हो सकती हैं। प्रीमेन्स्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (पीएमडीडी) एक कम आम समस्या है जो महिलाओं को मनोवैज्ञानिक, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, त्वचा और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के तौर पर प्रभावित करने वाली मानी जाती है। 

पिहले के शोध में पता चलता है कि प्रजनन के वर्षों के दौरान पीएमडी की स्थिति उच्च रक्तचाप, हृदय की बीमारियों और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। 
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महिलाओं की स्वास्थ्य समस्या - फोटो : istock
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?

नॉर्थ अमेरिकन मेनोपॉज़ सोसाइटी की मेडिकल डायरेक्टर स्टेफ़नी फ़ॉबियन कहती हैं, समय से पहले मेनोपॉज की समस्या के जोखिम वाली महिलाओं की पहचान बहुत जरूरी है क्योंकि इसका संबंध हृदय स्वास्थ्य में गड़बड़ी, मस्तिष्क और हड्डियों की समस्याओं के जोखिम से भी होता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अध्ययन अवलोकनात्मक है, जिसका अर्थ है कि शोधकर्ता यह नहीं कह रहे हैं कि पीएमडी के कारण जल्दी रजोनिवृत्ति होगी ही बल्कि, अध्ययन से पता चलता है कि दोनों के बीच एक संबंध हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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