पीरियड्स में दर्द की दवाई
दूसरी ख़बर भी इतनी ही चिंताजनक है और ये ख़बर तमिलनाडु से आई है. यहां अरबों के कारोबार वाले गारमेंट उद्योग में पीरियड के दौरान दर्द की शिकायत करने वाली महिलाओं को छुट्टी की बजाय बिना लेबल वाली दवाएं दी जाती हैं। थॉम्सन रॉयटर्स फ़ाउंडेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये दवाएं बिना किसी अनुभवी स्वास्थ्यकर्मी के ही दी जाती हैं. फ़ाउंडेशन ने ये रिपोर्ट 100 महिलाओं के साक्षात्कार के आधार पर तैयार की। अधिकांश महिलाएं ग़रीब परिवारों से आती हैं और उनका कहना है कि माहवारी की दर्द के कारण एक दिन की दिहाड़ी भी छोड़ना उनके लिए मुश्किल है।
इन सभी महिलाओं ने कहा कि उन्हें ये दवाएं मिली थीं, जबकि इनमें से आधी महिलाओं ने कहा कि इन दवाओं के कारण उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ा है। इनमें से अधिकांश ने स्वीकार किया कि दवा देते समय उन्हें इसका नाम नहीं बताया गया या इनके साइड इफ़ेक्ट के बारे में कोई चेतावनी भी नहीं दी गई। अधिकांश महिलाओं की शिकायत थी कि दवाओं की वजह से उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, डिप्रेशन और बेचैनी से लेकर पेशाब में दिक्कतें और गर्भपात तक। इन रिपोर्टों की वजह से प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव पड़ा. राष्ट्रीय महिला आयोग ने महाराष्ट्र में महिलाओं की स्थिति को 'बहुत दर्दनाक और दयनीय' क़रार दिया और राज्य सरकार से भविष्य में ऐसे उत्पीड़न को रोकने के लिए कहा।