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सेहत: व्हाइट ब्रेड का ज्यादा सेवन है नुकसानदायक, ऐसे रोगियों को करना चाहिए बिल्कुल परहेज

Tue, 06 Jul 2021 05:13 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सफेद ब्रेड क्यों नहीं खाना चाहिए (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
Medically reviewed by-
अर्चना सेठी
(आहार और पोषण विशेषज्ञ)
लखनऊ


दुनियाभर में सुबह के नाश्ते के लिए ब्रेड को सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। स्वादिष्ट और आसानी से तैयार हो जाने वाले ब्रेड के नाश्ते के कारण लोग इसे बहुत ज्यादा पसंद करते हैं। आजकल बाजारों में कई तरह के ब्रेड उपलब्ध हैं, जिन्हें विभिन्न प्रकार के अनाजों का उपयोग करके तैयार किया जाता है। पर क्या पोषण के नजरिए से भी ब्रेड का सेवन शरीर के लिए उतना ही अच्छा विकल्प माना जा सकता है? इस बारे में आहार और पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि सभी तरह के ब्रेड पोषण के मामले में खरे नहीं उतरते हैं।
दुनियाभर में सबसे ज्यादा प्रयोग सफेद ब्रेड का किया जाता है। सैंडविच हो या पेस्ट्री, ब्रेड मक्खन हो या ऑमलेट, सफेद ब्रेड का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है। हालांकि स्वास्थ्य के लिहाजे से बात करें तो सफेद ब्रेड का नियमित रूप से सेवन करना शरीर के लिए कई गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। पोषण विशेषज्ञ रोजाना इस ब्रेड के सेवन के लिए मना करते हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि आखिर हर घर में इस्तेमाल में लाए जाने वाले इस व्हाइट ब्रेड के क्या नुकसान हो सकते हैं? किन लोगों को इसके सेवन से ज्यादा परहेज करना चाहिए?
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ब्रेड सेहत के लिए हो सकता है नुकसानदायक - फोटो : social media
क्यों नुकसानदायक माना जाता है व्हाइट ब्रेड?
आहार विशेषज्ञों के मुताबिक व्हाइट ब्रेड को तैयार करने के लिए जिन विधियों और रसायनों का प्रयोग किया जाता है, वह हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। व्हाइट ब्रेड को तैयार करने के लिए गेहूं के आटे या मैदा को विभिन्न रसायनों का उपयोग करके ब्लीच किया जाता है, जिससे आटा सफेद दिखाई देता है। इसके अलावा मैदा में बेंज़ॉयल पेरोक्साइड, क्लोरीन डाइऑक्साइड और पोटेशियम ब्रोमेट जैसे रसायन मिलाए जाते हैं, जिससे ब्रेड ज्यादा स्पंजी बने और लंबे समय तक खराब न होने पाए। यह रसायन पेट के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। 
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व्हाइट ब्रेड में कैलोरी होती है ज्यादा - फोटो : social media
ब्रेड में कैलोरी अधिक होती है
लगभग सभी प्रकार के ब्रेड में कैलोरी की मात्रा समान होती है, मुख्य रूप से अंतर इसके पोषक तत्व की सामग्री में होता है। सफेद ब्रेड के एक स्लाइस में करीब 77 कैलोरी होती है, इसके अलावा यह ग्लाइसेमिक इंडेक्स में भी काफी अधिक माना जाता है, चूंकि सफेद ब्रेड को अत्यधिक प्रोसेस्ड किया जाता है, इसके कारण इसकी पोषक मात्रा काफी कम हो जाती है। इसके साथ ही ग्लाइसेमिक इंडेक्स और कैलोरी की मात्रा में अधिक होने के कारण ब्रेड का रोजाना सेवन करना शरीर के लिए कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है।

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ब्रेड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है। - फोटो : getty images
बढ़ सकता है डायबिटीज का खतरा
व्हाइट ब्रेड का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है, जिसका अर्थ है कि यह ग्लूकोज को जल्दी रिलीज करता है और ब्लड शुगर के स्तर को तेजी से बढ़ा सकता है। इन्हीं कारणों को देखते हुए पोषण विशेषज्ञ डायबिटीज के शिकार लोगों को व्हाइट ब्रेड का सेवन बहुत कम करने की सलाह देते है। मधुमेह की स्थिति में रोजाना व्हाइट ब्रेड का सेवन करते रहने से रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ता सकता है, जिससे शरीर के हाइपरग्लाइसेमिक स्थिति में जाने का खतरा रहता है। यह स्थिति हृदय रोग, तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचाने और किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं को जन्म दे सकती है।
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व्हाइट ब्रेड का नहीं करना चाहिए रोजाना सेवन - फोटो : Social media
तेजी से बढ़ने लगता है वजन
यदि आप फिटनेस को पसंद करते हैं और शरीर के वजन को नियंत्रित बनाए रखना चाहते हैं, तो आपको व्हाइट ब्रेड का सेवन नहीं करना चाहिए। सफेद ब्रेड में चूंकि कैलोरी का मात्रा अधिक होती है ऐसे में यह तेजी से वजन बढ़ा सकता है। इस तरह के ब्रेड को बनाने के लिए रिफाइंड कार्ब्स का उपयोग किया जाता है जो रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ा सकती है, जिसका अधिकतर उपयोग नहीं हो पाता है। आखिर में शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होने लगता है, जिससे तेजी से वजन बढ़ने का खतरा रहता है।
आहार और पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक सफेद ब्रेड को विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। नाश्ते के  लिए ब्राउन ब्रेड या आटे से बने ब्रेड का सेवन करना अच्छा और फायदेमंद हो सकता है।

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नोट: यह लेख आहार और पोषण विशेषज्ञ अर्चना सेठी के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। अर्चना, लखनऊ की जानी-मानी पोषण विशेषज्ञ हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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