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अलर्ट: मलेरिया का समय पर इलाज न हो तो बढ़ सकता है खतरा, इन अंगों पर होता है सबसे ज्यादा असर

Sat, 24 Oct 2026 07:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मलेरिया का समय पर इलाज न होने पर दिमाग, किडनी, लिवर, फेफड़ों और खून पर गंभीर असर पड़ सकता है। तेज बुखार, कंपकंपी, भ्रम, सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। सही जांच, समय पर दवा और पूरे इलाज से गंभीर जटिलताओं का खतरा टाला जा सकता है।
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मलेरिया की समस्या को जानिए - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आप जानते हैं कि हर साल दुनियाभर में 70 करोड़ (700 मिलियन) से अधिक लोग मच्छरों से काटने से होने वाली बीमारियों का शिकार होते हैं, साथ ही इससे सालाना 10 लाख (1 मिलियन) से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में अगस्त से लेकर अक्तूबर के महीनों में हर साल डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मच्छरों से होने वाली बीमारियों की चर्चा होते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में डेंगू का ख्याल आता है, पर मलेरिया भी डेंगू की तरह ही खतरनाक हो सकती है। मलेरिया को अक्सर लोग सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसमें तेज बुखार के साथ ठंड लगने, तेज बुखार, पसीना, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी दिक्कतें होती हैं।

क्या आप जानते हैं कि समय पर इलाज न मिलने पर मलेरिया गंभीर रूप ले सकता है। खासकर प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम  से होने वाला संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है। प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम एक परजीवी है जो मनुष्यों में सबसे गंभीर और घातक प्रकार के मलेरिया का कारण बनता है। 
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डेंगू-मलेरिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मलेरिया के खतरों को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। समय रहते अगर मलेरिया का इलाज न हो पाए तो इसका असर दिमाग, किडनी, लिवर, फेफड़ों और खून पर भी पड़ सकता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में जटिलताओं का खतरा अधिक रहता है। इसलिए मलेरिया के लक्षण दिखने पर जांच और इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। आइए जानते हैं कि ये बीमारी किस तरह से पूरे शरीर के लिए खतरनाक हो सकती है?

किन अंगों पर मलेरिया का होता है असर?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मलेरिया के ज्यादातर मामले वैसे तो सामान्य उपचार से ठीक हो जाते हैं, हालांकि अगर समय पर बीमारी की पहचान और इलाज न हो पाए तो मलेरिया कई बार गंभीर रूप ले सकता है।
 
  • गंभीर मलेरिया में संक्रमित लाल रक्त कोशिकाएं दिमाग की छोटी रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। इससे सेरेब्रल मलेरिया हो सकता है। इसके कारण मरीजों को भ्रम, दौरे पड़ने या बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है।
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किडनी की समस्याएं - फोटो : Adobe stock
किडनी-लिवर भी हो सकता है प्रभावित

मलेरिया का गंभीर संक्रमण किडनी की कार्यक्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। इसके कारण पेशाब कम होने, शरीर में तरल पदार्थों का असंतुलन और गहरे रंग के पेशाब जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
 
  • किडनी की तरह ही ये लिवर की सेहत पर भी असर डाल सकता है। मलेरिया के गंभीर मामलों में लिवर प्रभावित हो सकता है और बिलीरुबिन बढ़ने से पीलिया के लक्षण दिखाई दे सकता है। आंखों और त्वचा का पीला पड़ने पर समय रहते इसकी जांच जरूरी है।
  • गंभीर मलेरिया में फेफड़ों में तरल जमा होने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। वहीं, लाल रक्त कोशिकाएं टूटने के कारण एनीमिया यानी खून की कमी हो सकती है। इससे ब्लड प्रेशर लो होने और कई अंगों के काम करना बंद करने का खतरा भी रहता है।
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मलेरिया बुखार और इसके खतरे - फोटो : Adobe Stock
कैसे पहचानें कि बीमारी गंभीर तो नहीं हो गई?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मलेरिया के लक्षणों पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इससे कई तरह की जटिलताएं हो सकती हैं। 

मलेरिया की समस्या बढ़ने के साथ  सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, दौरे पड़ने, पेशाब कम होन के साथ अत्यधिक कमजोरी और पीलिया जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाएं। मलेरिया की पुष्टि के लिए ब्लड स्मीयर या रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किया जाता है। इसके अलावा मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरदानी लगाना, मच्छर भगाने वाली क्रीम इस्तेमाल करना और आसपास पानी जमा न होने देना जरूरी है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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