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क्या आपको भी ठंडी चीज खाने से होती है दांतों में झनझनाहट? विशेषज्ञों से जानें क्या है इसका कारण

Fri, 02 Apr 2021 01:02 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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दांत में दर्द - फोटो : freepick
आपको भी कुछ ठंडी चीज जैसे आइसक्रीम खाने या ठंडा पानी पीने से दांतों में तेज झनझनाहट महसूस होती होगी। आमतौर पर इसे दांतों की संवेदनशील से जोड़कर देखा जाता है। दांतों के विशेषज्ञ यह भी मानते रहे हैं कि इस तरह का अनुभव होना इस बात का संकेत होता है कि आपके दांतों की बाहरी परत को क्षति पहुंच रही है। लेकिन क्या आपको पता है कि ठंडी चीजों को खाने के दौरान ऐसा महसूस क्यों होता है? हाल ही में हुए एक शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि दांतों को महसूस होने वाली इस प्रकार की दर्द और झनझनाहट वाली संवेदनाओं का मुख्य कारण एक विशेष तरह का प्रोटीन होता है। इस अध्ययन के आधार पर विशेषज्ञों ने जल्द ही इस तरह के दर्द से छुटकारा दिलाने वाले उपचार पद्धति की खोज करने की उम्मीद जताई है।
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सारा खेल प्रोटीन का है
जर्नल साइंस एडवांस में छपे एक शोध के मुताबिक दांतों के अंदर कोशिकाओं की सतह में मौजूद एक प्रोटीन, ठंडी चीजों के कारण महसूस होने वाले दर्द का प्रमुख कारण है। इस प्रोटीन को टीआरपीसी-5 के नाम से जाना जाता है। जर्मनी की फ्रेड्रिक एलेक्जेंडर यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. कैथरीना जिमरमैन ने बताया था कि टीआरपीसी-5 प्रोटीन का निर्माण कोशिकाओं के द्वारा ही किया जाता है। यह प्रोटीन ठंड के प्रति संवेदनशील होता है।
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दांत - फोटो : getty images
ठंड का अनुभव क्यों होता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब इस प्रोटीन का संपर्क किसी ठंडी चीज से होता है तब एक चैनल बनाकर प्रोटीन (टीआरपीसी-5) कण झिल्ली के पार बहने लगते हैं। दांतों में झनझनाहट और तेज दर्द इसी वजह से होता है। शरीर के अन्य हिस्सों में भी टीआरपीसी-5 जैसे ठंडे रिसेप्टर मौजूद हो सकते हैं, जो संवेदनशीलता का अनुभव कराते हैं। 
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दांतों में कैसे होता है ठंड का असर 
विशेषज्ञों के इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है। हालांकि अब तक माना जाता रहा है कि  तापमान में बदलाव के कारण दांतों के अंदर मौजूद तरल पदार्थ पर दबाव पड़ता है जिससे नसों में प्रतिक्रिया सक्रिय होती जाती है। चूहों पर भी किए गए अध्ययन में विशेषज्ञों को टीआरपीसी-5  प्रोटीन का असर देखने को मिला है, लेकिन इंसानों में इसका प्रभव कैसे होता है, इस बारे में और अधिक शोध की आवश्यकता है। 
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