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आई हेल्थ: क्या कम पानी पीने की वजह से होती है ड्राई आइज की दिक्कत? आंखों में लालिमा-जलन रहती है तो सावधान

Fri, 09 Oct 2026 04:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Eye Problems: आंखों में सूखापन सिर्फ शरीर में पानी की कमी से नहीं होता। लंबे समय तक मोबाइल-कंप्यूटर देखना, पलकें कम झपकाना, एसी-पंखे की सीधी हवा में रहना, धुआं-धूल और कॉन्टैक्ट लेंस का गलत तरीके से इस्तेमाल ड्राई आइज की दिक्कत को बढ़ा सकता है।
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ड्राई आइज की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आपको भी अक्सर आंखों में जलन-चुभन और लालिमा की दिक्कत बनी रहती है? बाहर धूल-धुंआ में नहीं जाते हैं फिर भी ये दिक्कत परेशान कर रही है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आंखों में जलन-चुभन, किरकिरापन या आंख में कुछ पड़ गया हो जैसा महसूस होना मौजूदा समय की आम परेशानी हो गई है। बच्चों से लेकर वयस्कों और बुजुर्गों तक सभी को इस समस्या से परेशान देखा जा रहा है। कई बार ये लक्षण आंखों में सूखापन यानी ड्राई आइज की समस्या की ओर संकेत हो सकते हैं।

डॉक्टर बताते हैं, जिस तरह से लोगों में मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है, इसने आंखों से संबंधित दिक्कतों को भी काफी बढ़ा दिया है। चूंकि इस परेशानी के नाम में सूखापन है, इसलिए अक्सर लोग इसे शरीर में पानी की कमी के कारण होने वाली दिक्कत मान लेते हैं। पर आंखों में सूखापन के लिए सिर्फ पानी की कमी को भी कारण नहीं माना जा सकता।

आइए जानते हैं कि ड्राई आइज की दिक्कत क्यों बढ़ती जा रही है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है?
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आंखों की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें आंखों की प्राकृतिक नमी को कम कर सकती हैं, पर ज्यादातर लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं होती है।

आंखों में नमी बनाए रखने के लिए आंसुओं की एक पतली परत जरूरी होती है। जब यह परत जल्दी सूखने लगे या आंसू पर्याप्त न बनें, तो ड्राई आई की समस्या हो सकती है। डॉक्टर्स का कहना है कि स्क्रीन टाइम बढ़ना, पलकों को कम झपकाना, एसी या पंखे की सीधी हवा, धुआं-धूल और कॉन्टैक्ट लेंस का गलत इस्तेमाल भी ड्राई आइज का कारण बन सकते हैं। 

मोबाइल-कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल हो सकता है कारण

लंबे समय तक स्क्रीन देखते रहने को ड्राई आई की समस्या का बड़ा कारण माना जाता रहा है। डॉक्टर बताते हैं, मोबाइल या कंप्यूटर देखते समय हमारा ध्यान स्क्रीन पर ज्यादा रहता है इसके कारण पलकों का झपकना कम हो जाता है। पलके झपकाने से आंसुओं की पतली परत आंखों की सतह पर फैलती है और आंख नम रहती है।
 
  • जब पलक कम झपकती है तो यह नमी जल्दी टूट सकती है। इसके बाद आंखों में जलन, किरकिरापन, थकान, चुभन और कुछ समय के लिए धुंधला दिखने जैसी परेशानी हो सकती है।
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आंखों में भी होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
एसी-पंखे की हवा और धुआं से हो सकती है दिक्कत

आंखों का सूखापन सिर्फ स्क्रीन टाइम बढ़ने की वजह से नहीं होता। एयर कंडीशनर या पंखे की हवा सीधे आंखों पर पड़ना भी परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसी हवा आंखों की सतह से नमी को जल्दी सुखा सकती है। बहुत कम नमी वाले कमरे में लंबे समय तक रहने पर भी ड्राई आई के लक्षण बढ़ सकते हैं।
 
  • इसी तरह धुआं, धूल और वायु प्रदूषण आंखों में जलन पैदा कर सकते हैं। ऐसे वातावरण में रहने वाले लोगों को आंखों में लालिमा, जलन, चुभन या पानी आने की शिकायत हो सकती है।
  • इसलिए पंखे या एसी की हवा सीधे चेहरे पर न रखें। धूल और धुएं के संपर्क को कम करना भी आंखों की सेहत के लिए जरूरी है। 


कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं तो सावधान

जो लोग कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं, उनमें भी ड्राई आई की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक लेंस पहनने से आंखों की सतह पर आंसुओं और ऑक्सीजन की सामान्य पहुंच प्रभावित हो सकती है।
 
  • लेंस को जरूरत से ज्यादा देर तक पहनना, सही तरीके से साफ न करना आंखों के लिए नुकसानदायक पहुंचा सकता है।
  • उम्र बढ़ने के साथ भी ड्राई आई की संभावना बढ़ सकती है।
  • इसके अलावा कुछ दवाएं, हार्मोनल बदलाव और आंखों से जुड़ी कुछ समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
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आंखों में होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
कब हो जाएं सावधान?

डॉक्टर कहते हैं, कभी-कभार आंखों में सूखापन होना आम है, लेकिन अगर यह बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बना रहता है, तो इसकी वजह जानना जरूरी है। आंखों में तेज दर्द-लालिमा, रोशनी देखने में परेशानी होने या धुंधला दिखने  जैसे लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

कुछ लोगों को सिर्फ आदतों में बदलाव से ड्राई आइज से राहत मिल सकती है, जबकि कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह से दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।  कभी भी खुद से कोई भी आई ड्रॉप नहीं डालनी चाहिए।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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