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सेहत की बात: लिम्फ नोड्स आखिर क्या होते हैं, क्यों हो जाती है इनमें सूजन? क्या आपको है जानकारी

Fri, 09 Oct 2026 04:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Swollen Lymph Nodes: लिम्फ नोड्स शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। सर्दी-जुकाम, गले या दांतों के संक्रमण से इनमें सूजन हो सकती है। हालांकि, लगातार बढ़ती, सख्त या लंबे समय तक बनी रहने वाली गांठ की जांच जरूरी है।
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लिम्फ नोड्स की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
कई बार बीमारियों के बारे में चर्चा होते समय आपने भी लिम्फ नोड्स में सूजन के बारे में सुना होगा। पर क्या आप जानते हैं कि लिम्फ नोड्स आखिर क्या होते हैं और इसमें सूजन होने का क्या मतलब हो सकता है?

लिम्फ नोड्स को 'लसीका ग्रंथियां' भी कहा जाता है। ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का एक बहुत जरूरी हिस्सा हैं। ये शरीर में पाए जाने वाले छोटे, सेम के आकार के अंग होते हैं। एक वयस्क के शरीर में लगभग 400 से 800 लिम्फ नोड्स हो सकते हैं। ये मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को छोड़कर पूरे शरीर में फैले होते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, गर्दन में छोटी-सी गांठ महसूस होना, बगल में सूजन दिखाई देना या जबड़े के नीचे दर्द होना बहुत आम समस्याएं हैं। अक्सर ऐसी गांठें लिम्फ नोड्स के बढ़ने की वजह से होती हैं। लिम्फ नोड्स का काम लिम्फ नाम के तरल से, कीटाणुओं, असामान्य कोशिकाओं और दूसरे अवांछित पदार्थों को छानने में मदद करना है। जब शरीर किसी संक्रमण से लड़ रहा होता है, तो लिम्फ नोड्स में मौजूद प्रतिरक्षा कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं और इनके आकार में बढ़ोतरी हो सकती है।

लिम्फ नोड्स का सूजना कई बार सामान्य संक्रमण का संकेत होता है।
 
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लिम्फ नोड्स की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
पहले लिम्फ नोड्स के बारे में जानना जरूरी

लिम्फ नोड्स छोटी, सेम के आकार की संरचनाएं हैं, जो लिम्फेटिक सिस्टम का हिस्सा हैं। इस व्यवस्था में लिम्फ वाहिकाएं, लिम्फ नोड्स और कुछ अन्य अंग शामिल होते हैं। 
 
  • लिम्फ एक साफ तरल है, जो ऊतकों से अतिरिक्त तरल और प्रतिरक्षा से जुड़े पदार्थों को अपने साथ लेकर चलता है। 
  • लिम्फ नोड्स इस तरल को छानने में मदद करते हैं। इनमें लिम्फोसाइट्स नाम की प्रतिरक्षा कोशिकाएं होती हैं, जो संक्रमण पैदा करने वाले तत्वों को पहचानने और उनसे लड़ने में भूमिका निभाती हैं।
  • शरीर में लिम्फ नोड्स कई समूहों में होते हैं। गर्दन, जबड़े के नीचे, कानों के आसपास, बगल और जांघ के जोड़ में भी लिम्फ नोड्स हो सकते हैं। 
  • शरीर के अंदर छाती और पेट में भी लिम्फ नोड्स होते हैं।
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गर्दन में समस्याएं - फोटो : Freepil.com
लिम्फ नोड्स में सूजन  क्यों आ जाती है?

शरीर में संक्रमण होने को लिम्फ नोड्स में सूजन का सबसे आम कारण माना जाता है  जब शरीर किसी वायरस या बैक्टीरिया से लड़ता है, तो लिम्फ नोड्स में प्रतिरक्षा कोशिकाएं एक्टिव हो जाती हैं और उनकी संख्या बढ़ सकती है। इससे नोड्स का आकार बढ़ जाता है।
 
  • सर्दी-जुकाम, गले में संक्रमण, टॉन्सिल की समस्या या दांतों-मसूड़ों के संक्रमण के दौरान गर्दन के लिम्फ नोड्स सूज सकते हैं।
  • त्वचा के किसी संक्रमण के कारण बगल या जांघ के जोड़ में भी सूजन हो सकती है।
  • कई बार संक्रमण ठीक होने के बाद भी लिम्फ नोड्स को सामान्य आकार में लौटने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं।
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डॉक्टर से लें जरूरी सलाह - फोटो : Freepik.com
लिम्फ नोड्स की सूजन हो सकती है गंभीर

कुछ मामलों में लिम्फ नोड्स का बढ़ना लिम्फोमा या दूसरे कैंसर से जुड़ा हो सकता है। कुछ कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों से लिम्फ नोड्स तक भी फैल सकते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि सूजे हुए लिम्फ नोड्स के ज्यादातर मामले संक्रमण जैसे गैर-कैंसर कारणों से होते हैं।
 
  • अगर शरीर में कोई गांठ लगातार बढ़ रही या सख्त महसूस हो,आसानी से हिलती न हो तो डॉक्टर से मिलकर जांच कराना जरूरी। 
  • बिना किसी स्पष्ट संक्रमण के गांठ बने रहने पर भी सावधान हो जाना जरूरी है।
  • इसके साथ बिना कोशिश के वजन कम हो, रात में बहुत पसीना आए या लंबे समय तक बुखार रहता है तो इन समस्याओं में भी समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

लिम्फ नोड्स में सूजन होने पर क्या करें

अगर सर्दी-जुकाम या गले के संक्रमण के साथ लिम्फ नोड्स सूज गए हैं, तो संक्रमण ठीक होने पर वे अपने आप धीरे-धीरे छोटे हो जाते हैं।  अगर गांठ तेजी से बढ़ रही हो, सांस लेने या निगलने में परेशानी हो, या तेज बुखार के साथ हालत बिगड़ रही हो, तो तुरंत डॉक्टरी सहायता लें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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