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विशेषज्ञों ने बताया: आखिर क्यों इतना घातक है कोरोना का नया स्ट्रेन? पुराने स्ट्रेन से कैसे है अलग?

Thu, 22 Apr 2021 03:24 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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corona virus - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
डॉ सिद्धार्थ गुप्ता
एंटी कोरोना टास्क फोर्स, नोएडा


कोरोना वायरस के देशभर में तेजी से बढ़ते जा रहे मामले लगातार सुर्खियों में हैं। इन सब के बीच आपने भी कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के बारे में सुना होगा। नया स्ट्रेन, मतलब कोरोना वायरस का एक नया रूप। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर कोरोना का यह नया स्ट्रेन क्या है, साथ ही यह पुराने स्ट्रेन से कितना अलग और कितना प्रभावी है। इस आर्टिकल में आपको इस बारे में सारी जानकारियां दी जाएंगी। भारत में पाया गया कोविड-19 का नए डबल म्यूटेंट वायरस को काफी प्रभावी माना जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह कोविड-19 संक्रमण से चल रहे भारत की लड़ाई को भी प्रभावित कर सकता है। इस वायरस को 70 गुना अधिक संक्रामक माना गया है। आइए जानते हैं कि पुराने वायरस के मुकाबले यह कितना अलग और प्रभावी है साथ ही इससे मुकाबले के लिए किस तरह के एहतियात बरतने की जरूरत हो सकती है। 
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कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन - फोटो : ANI
नया स्ट्रेन कितना अलग है?
एक बातचीत के दौरान डॉ सिद्धार्थ बताते हैं कि सर्दी-खांसी और बुखार को कोविड-19 वायरस का प्रमुख लक्षण माना जाता रहा है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि वायरस का नया स्ट्रेन अधिक प्रभावशाली तरीकों से शरीर पर हमला बोलता है। नए स्ट्रेन से संक्रमित लोगों में बुखार अधिक गंभीर रूप से देखा गया है। इसके अलावा नए स्ट्रेन सुनने में समस्या, मांसपेशियों में दर्द, त्वचा में संक्रमण और दृष्टि संबंधी विकार जैसे कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा रहे हैं।
 
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कैसे बदलता जा रहा है कोरोना का रूप - फोटो : pixabay
क्या होता है म्यूटेशन और स्ट्रेन
वायरस और अन्य रोगजनकों में म्यूटेशन होना स्वाभाविक है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार वायरस अपनी प्रतिकृति बनाता रहता है, इन परिवर्तनों को "म्यूटेशन" कहा जाता है। जब वायरस एक या उससे अधिक म्यूटेशन कर लेता है, तो इन बदलावों को मूल वायरस के वैरियंट्स के रूप में जाना जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन परिवर्तनों के दौरान वायरस के जीन में भी अंतर हो सकता है, जो उन्हें स्वस्थ कोशिकाओं को पार करने लोगों को अधिक प्रभाविता से संक्रमित करने के योग्य बनाता है।

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क्या आप जानते हैं म्यूटेशन के बारे में - फोटो : social media
डबल म्यूटेशन क्या है?
अब तक मिले कोरोना के तीन नए वेरिएंट को सबसे अधिक जोखिम वाला माना जा रहा है। ये यूके (बी.1.1.7 वेरिएंट), दक्षिण अफ्रीका (बी.1.351 वेरिएंट) और ब्राजील (B.1.1.28.1) के वेरियंट्स। अब बात करते हैं डबल म्यूटेशन की। जब वायरस के दो परिवर्तन किसी एक तीसरे सुपर संक्रामक स्ट्रेन बनाने के लिए एक साथ आते हैं तो इसे डबल म्यूटेशन माना जाता है। 
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वैक्सीन है बचाव का सबसे प्रभावी तरीका - फोटो : सोशल मीडिया
कैसे करें बचाव
नए स्ट्रेनों की प्रकृति को समझने के लिए अभी और अध्ययनों की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक जिन लोगों को कोरोना के टीके के दोनों शॉट अब तक नहीं मिले है उन्हें इसका जोखिम अधिक है। ऐसे लोगों को संक्रमण से बचने के लिए बताए गए सभी उपायों का सख्ती से पालन करना चाहिए। फिलहाल बचाव का सबसे प्रभावी तरीका यही हो सकता है।

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नोट:
यह लेख डॉ सिद्धार्थ गुप्ता, एंटी कोरोना टास्क फोर्स, नोएडा और कैंसर रोग विशेषज्ञ, डॉ मनीष सिंघल से एक बातचीत के साथ कुछ अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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