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Stomach Problem: पेट फूलना हर बार गैस ही नहीं, एक्सपर्ट की नजर से जानिए आखिर क्यों होती है ये दिक्कत?

Mon, 10 Aug 2026 06:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पेट फूलने की सबसे आम वजह पाचन तंत्र में गैस का बढ़ना है। कुछ खाद्य पदार्थ आंतों में ज्यादा गैस बना सकते हैं। इसके अलावा खाना खाते समय ज्यादा हवा निगलना भी पेट में गैस और फुलाव बढ़ा सकता है।
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पेट की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या खाना खाने के बाद आपका भी पेट गुब्बारे की तरह फूल जाता है और अक्सर पेट में दर्द बना रहता है? अगर ऐसा कभी-कभार होता है तो इसकी वजह ज्यादा खाना, गैस या कब्ज जैसी सामान्य समस्या हो सकती है। लेकिन अगर पेट बार-बार फूलता है और ये दिक्कत कई दिनों तक बनी रहती है या इसके साथ दर्द, कब्ज, दस्त, वजन कम होने जैसी समस्याएं भी हो रही हैं तो इसे केवल गैस समझकर टालना ठीक नहीं है।

पेट फूलना अपने आप में कोई बीमारी नहीं बल्कि शरीर में चल रही किसी प्रक्रिया का संकेत हो सकता है। कई बार आंतों में जरूरत से ज्यादा गैस बनने या भोजन के पाचन के दौरान गैस बनने से ऐसा होता है। इसके अलावा कुछ लोगों को दूध जैसी चीजों को पचाने में परेशानी होती है, इसके कारण भी पेट फूलने की समस्या बढ़ जाती है।

यदि आपको भी बार-बार ये समस्या रहती है तो सामान्य उपायों से भी आराम नहीं मिल रहा है तो समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें, कहीं ये किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत तो नहीं है?
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क्या आपका भी पेट फूला रहता है? - फोटो : Freepik.com
बार-बार पेट फूलने की समस्या

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ पवन निरूपम कहते हैं, पेट फूलने के कई कारण हो सकते हैं, हालांकि हर बार केवल गैस की वजह से ऐसा हो रहा हो ये जरूरी नहीं है। 

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) जैसी समस्याओं में ये दिक्कत देखी जाती है इसमें पेट दर्द के साथ कब्ज, दस्त की समस्या हो सकती है। इसके अलावा कई मामलों में लिवर की बीमारियों में पेट के भीतर तरल पदार्थ जमा हो जाता। इससे पेट का आकार लगातार बढ़ा रहता है और पैरों में सूजन या आंखों-त्वचा में पीलापन जैसे संकेत भी दिखाई दे सकते हैं।

यही कारण है कि पेट फूलने की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर बीमारी की जांच और इलाज से आप गंभीर समस्याओं के खतरे को कम कर सकते हैं। 
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पेट फूलने की समस्या क्यों होती है? - फोटो : Freepik.com
आईबीएस की बढ़ती समस्या

डॉ पवन बताते हैं,  इरिटेबल बाउल सिंड्रोम आंतों से जुड़ी एक सामान्य समस्या है। इसमें पेट फूलने, पेट में दर्द और शौच की आदतों में बदलाव हो सकते हैं।

कुछ लोगों को लगातार कब्ज रहती है, कुछ को बार-बार दस्त होते हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि तनाव, खान-पान में गड़बड़ी के अलावा पेट की दिक्कतों के कारण ये समस्या हो सकती है। अगर पेट फूलने के साथ लंबे समय से पेट दर्द और शौच के तरीके में बदलाव हो रहा है, तो समय रहते डॉक्टर से मिलकर सही कारण पता करना जरूरी है।

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पेट की समस्या - फोटो : Adobe stock
सीलिएक डिजीज भी हो सकता है कारण

सीलिएक डिजीज एक आनुवंशिक ऑटोइम्यून विकार है। इसमें ग्लूटेन (गेहूं, जौ और राई में पाया जाने वाला प्रोटीन) खाने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली छोटी आंत को क्षति पहुंचाने लगती है, इससे पोषक तत्वों का अवशोषण रुक जाता है। ऐसे लोगों को ग्लूटेन-फ्री डाइट लेने की सलाह दी जाती है।

पेट फूलना इसके संभावित लक्षणों में से एक है। इसके साथ कुछ लोगों को दस्त, पेट की परेशानी और वजन में कमी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
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लिवर की बीमारी - फोटो : Adobe Stock
लिवर की बीमारी तो नहीं?

लिवर की बीमारी में भी अक्सर लोगों को लंबे समय तक पेट फूलने जैसी समस्या होती रहती है। कई मामलों में पेट के भीतर तरल पदार्थ जमा हो जाता है जिसे जलोदर कहा जाता है। इसमें पेट का आकार धीरे-धीरे बढ़ जाता है और पेट भारी या तना हुआ महसूस हो सकता है।

लिवर की बीमारियों के कारण कुछ लोगों को पैरों में सूजन, पीलिया, कमजोरी और भूख में कमी जैसे अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अगर पेट फूलने के साथ ऐसे दिक्कत भी हो रहे हैं तो समय रहते इसकी जांच करा लें।

डॉक्टर पवन कहते हैं, अगर पेट फूलने के साथ वजन भी कम हो रहा है, मल में खून आ रहा है या बार-बार उल्टी हो रही है तो समय रहते डॉक्टर से सलाह ले लें। बार-बार पेट फूलने की समस्या होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। सही इलाज के लिए पहले कारण का पता लगाना जरूरी है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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