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सेहत की बात: सुबह की धूप में 10 मिनट बिताना क्यों जरूरी? जानिए धूप न मिलने से क्या दिक्कतें होती हैं

Sun, 27 Sep 2026 10:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुबह की प्राकृतिक रोशनी शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को सही संकेत देने में मदद करती है। लंबे समय तक धूप न मिलने से विटामिन-डी की कमी का जोखिम बढ़ सकता है। 
 
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धूप क्यों जरूरी - फोटो : Amarujala.com/AI
हमारा शरीर दिनभर कितना एक्टिव रहेगा, ये बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी दिन की शुरुआत कैसे हुई है? सुबह उठकर हम क्या करते है, क्या खाते हैं? इसका भी सेहत पर सीधा असर होता है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से लोगों के लिए सुबह का नाश्ता छोड़ना सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों के लिए रोज सुबह सूरज की रोशनी में कुछ समय बिताना भी बहुत जरूरी है। 

सुबह उठकर कमरे में ही रहना, खिड़की बंद रखना या बाहर निकलने के बजाय सीधे काम में लग जाना आजकल लोगों की आम आदत बन गई है। लेकिन शरीर की घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को ठीक रखने के लिए समय पर सूरज की रोशनी भी जरूरी है। खासकर सुबह की प्राकृतिक रोशनी दिमाग को यह समझने में मदद करती है कि दिन शुरू हो चुका है। इसका असर नींद-जागने के समय और दिन की सतर्कता पर पड़ सकता है।

सुबह की धूप न लेने से ये लय बिगड़ सकती है, इतना ही नहीं इसका शरीर के कार्यों पर और भी कई तरह से नकारात्मक असर हो सकता है।
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सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी - फोटो : Freepik.com
शरीर में विटामिन-डी के लिए भी धूप बहुत जरूरी माना जाता है। त्वचा पर पड़ने वाली यूवीबी किरणों की मदद से शरीर विटामिन डी बनाता है। इसलिए सुबह बाहर निकलना और कुछ समय सूरज की रोशनी में बिताना जरूरी है। आइए जानते हैं कि अगर आप सुबह सूरज की रोशनी नहीं लेते हैं तो शरीर पर इसका क्या असर हो सकता है?

सर्केडियन रिदम बिगड़ने का खतरा

प्राकृतिक रोशनी शरीर की सर्केडियन रिदम को समय का संकेत देती है। रिसर्च में पाया गया है कि सुबह की रोशनी सर्केडियन रिदम को बैलेंस रखने और दिन में सतर्कता बढ़ाए रखने में मदद करती है।
 
  • जिन लोगों को रोज सुबह सूरज की रोशनी नही मिलती है, दिन का अधिकांश समय घर या कृत्रिम रोशनी में बीतता है उनका सोने-जागने का समय बिगड़ सकता है। पहले से ही  नींद की समस्याओं के शिकार लोगों के लिए ये और भी समस्याएं बढ़ाने वाला हो सकता है।
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विटामिन-डी की कमी - फोटो : Adobe Stock
विटामिन-डी की कमी का जोखिम 
 
  • शरीर सूर्य की किरणों की मदद से विटामिन-डी बनाता है। लंबे समय तक बहुत कम धूप मिलने से विटामिन-डी की कमी का खतरा हो सकता है। इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स और वयस्कों में हड्डियों की कमजोरी और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

मूड पर असर पड़ सकता है असर
 
  • प्राकृतिक रोशनी और शरीर के सर्केडियन रिदम का संबंध मूड से भी है। दिन में पर्याप्त रोशनी न मिलने और नींद का चक्र बिगड़ने से कुछ लोगों में उदासी, चिड़चिड़ापन और लो एनर्जी जैसी समस्याओं का खतरा हो सकता है।  जो लोग दिन का ज्यादातर समय बंद कमरे में बिताते हैं, उनके लिए दिन में ये और भी दिक्कतें बढ़ा सकता है।
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काम पर फोकस न बनना - फोटो : Freepik.com
ध्यान और काम करने की क्षमता पर असर

नींद का समय बिगड़ने का असर अगले दिन दिमागी क्षमता पर भी पड़ सकता है। नींद कम या खराब होने पर ध्यान केंद्रित करने, चीजों को याद रखने और लगातार किसी काम पर फोकस करने में परेशानी हो सकती है। अगर सुबह की रोशनी कम मिलने के साथ रात में देर तक मोबाइल चलाने और देर से सोने की आदत भी है, तो इससे ब्रेन फॉग जैसा महसूस होने का जोखिम रहता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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