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Heart Health: क्या होता है कोलेस्ट्रॉल-ट्राइग्लिसराइड? इसके बढ़े स्तर का मतलब हो सकते हैं हार्ट अटैक के शिकार

Tue, 05 Mar 2024 10:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : istock
हृदय रोग, दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। कुछ दशकों पहले तक इसे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी के रूप में जाना जाता था, हालांकि समय के साथ अब युवा-वयस्क भी इसके शिकार होते जा रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना महामारी के बाद से गंभीर हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले काफी तेजी से बढ़ गए हैं। जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण रहा है उनमें जोखिम और भी अधिक हो सकता है।

इसके अलावा अगर आपकी लाइफस्टाइल और आहार गड़बड़ है तो इससे खतरा और भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी उम्र के लोगों को हार्ट की सेहत का ध्यान रखने की सलाह देते हैं।

हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, नियमित रूप से कुछ जांच कराते रहना हृदय की सेहत पर ध्यान रखने में सहायक हो सकता है। विशेषतौर पर यदि आपके ब्लड में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर सामान्य से अधिक बना रहता है तो ये अलार्मिंग माना जाता है, ऐसे लोगों में दिल का दौरा पड़ने के साथ कई अन्य जानलेवा समस्याओं का खतरा रहता है। क्या आप कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के बारे में जानते हैं?
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ट्राइग्लिसराइड्स की बढ़ी हुई मात्रा - फोटो : Istock
कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड भी जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड दोनों शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। ट्राइग्लिसराइड्स का उपयोग हमारी कोशिकाएं ऊर्जा के लिए करती है, जबकि कोलेस्ट्रॉल कोशिका झिल्लियों की संरचना के निर्माण करने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि इनकी बढ़ी हुई मात्रा शरीर के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक हो सकती है। जिन लोगों के रक्त में इन दोनों की अधिकता होती है, उनमें हृदय रोगों के विकसित होने और गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा बढ़ जाता है।

आइए इसके बारे में समझते हैं।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : istock
पहले जानिए कोलेस्ट्रॉल क्या है?

कोलेस्ट्रॉल मोम जैसा पदार्थ होता है जिसकी उचित मात्रा शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यकता होती है। हालांकि कोलेस्ट्रॉल का अस्वास्थ्यकर स्तर हार्ट अटैक के खतरों को बढ़ाने वाली हो सकती है। 200 mg/dL से कम कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य है। 240 mg/dL या इससे अधिक का स्तर उच्च माना जाता है, जो समस्याकारक स्थिति है।

आमतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल के कोई लक्षण नहीं होते हैं। लेकिन अगर इसका इलाज नहीं किया गया और ये बढ़ा हुआ रहता है तो ऐसे लोगों में दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा अधिक हो सकता है। आहार में गड़बड़ी के कारण बैड कोलेस्ट्रॉल का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

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ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा और इसके नुकसान - फोटो : istock
ट्राइग्लिसराइड से होने वाली समस्या

ट्राइग्लिसराइड्स एक प्रकार का फैट है। मक्खन, तेल जैसे वसा वाले खाद्य पदार्थों के कारण ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा बढ़ सकती है। 150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर या इससे कम की मात्रा को  सामान्य माना जाता है। इसके बढ़ने के कारण स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ने लगते हैं। 

ट्राइग्लिसराइड्स की अधिकता धमनियों को सख्त और इसकी दीवारों को मोटा कर देती है जिससे स्ट्रोक, दिल का दौरा और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसकी बढ़ी हुई मात्रा को अग्नाशय और पाचन स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक माना जाता है।
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कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने की समस्या - फोटो : istock
कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड को कैसे करें कंट्रोल?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और दिनचर्या को ठीक रखकर कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है। कम उम्र से ही आपको आहार में विशेष सुधार करना चाहिए।

नियमित रूप से व्यायाम करने के साथ आहार में चीनी और प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों की मात्रा की कम रखना आपके लिए आवश्यक है। वजन कम रखना भी सेहत को ठीक रखने के लिए आवश्यक है। कुछ अध्ययनों में बताया गया है कि आहार में ऑलिव ऑयल को शामिल करना कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को ठीक रखने और हृदय रोगों से बचाव में फायदेमंद हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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