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Alert: कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से सिर्फ हृदय रोग ही नहीं इन गंभीर समस्याओं का भी बढ़ जाता है खतरा, बरतें सावधानी

Tue, 04 Mar 2025 07:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए आवश्यक वसा (लिपिड) है, जो कोशिकाओं की संरचना, हार्मोन और पाचन के लिए जरूरी होता है। लेकिन जब इसका स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : freepik.com
High Cholesterol: कोलेस्ट्रॉल शब्द से हम सभी भली-भांति परिचित हैं। कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही हृदय रोगों का ख्याल आ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं सभी लोगों को ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर के साथ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कंट्रोल में रखना चाहिए। 

वैसे तो कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए आवश्यक वसा (लिपिड) है, जो कोशिकाओं की संरचना, हार्मोन और पाचन के लिए जरूरी होता है, लेकिन जब इसका स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में हर साल लगभग 40% हृदय रोगों के मामले हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से होते हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल की स्थिति सिर्फ हृदय रोग ही नहीं शरीर को कई अन्य प्रकार से भी प्रभावित करने वाली मानी जाती है, इसलिए इसे कंट्रोल में रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है।
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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Adobe Stock
क्यों बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल का लेवल?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी कई गड़बड़ आदतें कोलेस्ट्रॉल सहित संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली हो सकती है।

असंतुलित आहार (फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें), शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, धूम्रपान-शराब का सेवन, तनाव की समस्या के साथ कुछ अनुवांशिक कारण कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इस बारे में जानना और इससे बचाव करते रहना बहुत जरूरी है।

अब आइए जानते हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल यानी कोलेस्ट्रॉल का अक्सर बढ़ा रहना हमारी सेहत को किस प्रकार से प्रभावित करने वाला हो सकता है?
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
हृदय रोगों का जोखिम

हाई कोलेस्ट्रॉल की स्थिति का सबसे ज्यादा नुकसान हृदय स्वास्थ्य पर देखा जाता रहा है। विशेषतौर पर अगर शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर लगातार बढ़ा हुआ रहता है तो ये रक्त धमनियों में जमकर ब्लॉकेज बनाता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार 70% हार्ट अटैक के मामलों में कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन देखा जाता रहा है। कोलेस्ट्रॉल के साथ-साथ अगर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखा जाए तो हृदय रोगों के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।

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मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
ब्रेन स्ट्रोक का खतरा

हाई कोलेस्ट्रॉल के दुष्प्रभाव सिर्फ हृदय रोगों तक ही सीमित नहीं हैं, इसके कारण स्ट्रोक का भी जोखिम हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल मस्तिष्क तक जाने वाली कुछ धमनियों को भी संकीर्ण कर देता है। अगर मस्तिष्क तक रक्त ले जाने वाली कोई वाहिका पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाती है तो इसके कारण मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे स्ट्रोक हो सकता है।
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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के क्या दुष्प्रभाव हैं? - फोटो : freepik.com
हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली इन समस्याओं को भी जानिए

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण शरीर पर और भी कई तरह के दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
  • हाई कोलेस्ट्रॉल से रक्त वाहिकाएं कठोर हो जाती हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ सकती है।
  • इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में 60% को हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होती है, जिससे डायबिटीज की जटिलताएं काफी बढ़ जाती हैं।
  • कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ना फैटी लिवर की वजह बनता है।
  • हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण नपुंसकता बढ़ने का भी जोखिम देखा जाता रहा है।
  • लंबे समय में, कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक रहने के कारण जननांग की छोटी रक्त वाहिकाओं के संकुचित होने का भी खतरा हो सकता है इससे इरेक्शन प्राप्त करने में भी कठिनाई होती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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