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High Blood Pressure: ब्लड प्रेशर हाई रहना खतरे की घंटी, हार्ट से लेकर किडनी और लिवर तक हो सकता है नुकसान

Fri, 28 Nov 2025 06:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • ब्लड प्रेशर बढ़ने के काण रक्त धमनियों पर दबाव बढ़ता रहता है। लंबे समय तक यह दबाव बना रहे तो रक्त वाहिकाएं कमजोर होने लगती हैं और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त प्रवाह प्रभावित होने लगता है। 
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हाई ब्लड प्रेशर के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
हाई ब्लड प्रेशर की समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है, कम उम्र वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उनमें समय के साथ कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करते रहने और इसके कंट्रोल रखने वाले उपाय करने की सलाह देते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, खराब दिनचर्या जैसे शारीरिक गतिविधियों में कमी, तनाव, नींद की कमी और लंबे समय तक बैठे-बैठे काम करना हो या फिर खानपान की समस्या जैसे जंक फूड, नमक वाली चीजें ब्लड प्रेशर को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। 

आमतौर पर ब्लड प्रेशर बढ़ने को हृदय रोगों और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाने वाला माना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि अगर ब्लड प्रेशर कंट्रोल में न रहे तो इसके कारण समय के साथ किडनी और लिवर की बीमारी होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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ब्लड प्रेशर बढ़ने से होने वाले जोखिम - फोटो : Freepik.com
हाई ब्लड प्रेशर का शरीर पर होता है गंभीर असर

ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण रक्त की धमनियों पर भी दबाव बढ़ता जाता है। लंबे समय तक यह दबाव बना रहे तो रक्त वाहिकाएं कमजोर होने लगती हैं और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त प्रवाह प्रभावित होने लगता है। हाई बीपी दिल पर अतिरिक्त जोर डालता है, जिसके कारण हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। आंखों की नसों पर असर पड़ने से दृष्टि कमजोर हो सकती है। दिमाग में खून के दबाव के कारण ब्रेन हेमरेज का जोखिम भी बढ़ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति किडनी-लिवर को भी क्षति पहुंचाने लगती है।
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किडनी की बीमारियां - फोटो : Freepik.com
हाई ब्लड प्रेशर का किडनी पर असर

किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। ये शरीर से विषाक्त तत्वों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती है। किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं लगातार फिल्ट्रेशन करती रहती हैं। हालांकि जब ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है तो रक्त वाहिकाओं पर भी अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे वे धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।

ब्लड प्रेशर बढ़े रहने के कारण किडनी तक पहुंचने वाला रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे किडनी ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती। इसके कारण विषाक्त तत्व और तरल पदार्थ शरीर में जमा होने लगते हैं। इससे किडनी में संक्रमण और गंभीर स्थितियों में किडनी फेलियर तक का खतरा हो सकता है।

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लिवर में होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
लिवर भी हो सकता है प्रभावित

किडनी की ही तरह हाई ब्लड प्रेशर का असर लिवर की सेहत पर भी पड़ता है। हाई ब्लड प्रेशर सीधे तौर पर लिवर की नसों और रक्त संचार को प्रभावित कर सकता है। ब्लड प्रेशर बढ़े रहने के कारण समय के साथ लिवर में रक्त का संचार कम होने लगता है, जिससे लिवर की कोशिकाएं प्रभावित हो सकती हैं।

अध्ययनों से पता चलता है कि हाई बीपी लिवर की रक्त धमनियों में सूजन और फाइब्रोसिस पैदा कर सकता है, जिससे आगे चलकर लिवर सिरोसिस का भी खतरा हो सकता है।
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ब्लड प्रेशर को करें कंट्रोल - फोटो : Freepik.com
ब्लड प्रेशर कैसे कंट्रोल करें?

डॉक्टर कहते हैं, इन सभी समस्याओं से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है कि आप ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने वाले उपाय करें। नमक कम खाना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, वजन कंट्रोल रखना और नियमित रूप से बीपी की जांच कराते रहना सभी लोगों के लिए जरूरी है।

अगर आपका ब्लड प्रेशर अक्सर 130/80 की रीडिंग से अधिक बना रहता है तो इस बारे में समय रहते किसी डॉक्टर की सलाह लें। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने वाले उपायों की मदद से आप शरीर को बेहतर और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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