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चिंता: महिलाओं में खून की कमी का खतरा क्यों रहता है ज्यादा? सिर्फ डाइट नहीं ये वजह भी जिम्मेदार

Tue, 22 Sep 2026 04:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महिलाओं में खून की कमी यानी एनीमिया के पीछे आयरन की कमी, ज्यादा मासिक रक्तस्राव, खराब डाइट, विटामिन बी12 या फोलेट की कमी जैसी स्थितियां  जिम्मेदार हो सकती हैं। लगातार थकान, चक्कर या सांस फूलना हो तो कारण की जांच जरूरी है।
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महिलाओं में खून की कमी - फोटो : Amarujala.com/AI
खून की कमी यानी एनीमिया, महिलाओं में होने वाली सबसे आम लेकिन गंभीर समस्याओं में से एक है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में करीब 57% महिलाएं इस समस्या का शिकार हैं। चूंकि खून के माध्य्म से शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्राप्त होते रहते हैं, इसलिए एनीमिया की समस्या में थोड़ा चलने पर सांस फूलने, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना या काम करते-करते गंभीर थकान की दिक्कत हो सकती है।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि शरीर में आयरन वाली चीजों की कमी से हीमोग्लोबिन की मात्रा भी कम हो जाती है, जो एनीमिया का कारण बनती है। हीमोग्लोबिन एक प्रकार की प्रोटीन है जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।

अब सवाल ये है कि महिलाओं में खून की कमी का खतरा ज्यादा क्यों होता है? इसके लिए कौन से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं?
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खून की कमी और जांच - फोटो : Freepik.com
एनीमिया की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं में एनीमिया की समस्या के लिए भोजन में आयरन वाली चीजों की कमी को सबसे बड़ा कारण माना जाता है, हालांकि सिर्फ खाना में गड़बड़ी ही इसकी वजह नहीं है। हर महीने होने वाला मासिक धर्म यानी पीरियड्स भी शरीर में आयरन की कमी बढ़ा सकता है। खासकर जिन महिलाओं को पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, उनमें आयरन की कमी का खतरा बढ़ जाता है।
 
  • दूसरी तरफ, वजन कम करने के चक्कर में भोजन की मात्रा बहुत कम कर देना, आयरन और प्रोटीन से भरपूर चीजें न खाना या भोजन में पर्याप्त विविधता न होना भी समस्या बढ़ा सकता है। 
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पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग - फोटो : Freepik.com
पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग से खतरा

मासिक धर्म के दौरान शरीर से अगर ज्यादा खून निकलता है और इसके कारण भी आयरन की कमी का खतरा हो सकता है।
 
  • पीरियड्स में सामान्य ब्लीडिंग से होने वाली खून की कमी की भरपाई, शरीर भोजन से मिले आयरन के जरिए पूरा कर लेता है, लेकिन बहुत ज्यादा या लंबे समय तक ब्लीडिंग होने पर आयरन की कमी बढ़ सकती है। यही कारण है कि अधिक रक्तस्राव वाली महिलाओं में आयरन की कमी का खतरा ज्यादा रहता है।
  • अगर पीरियड्स लंबे समय तक चलते हैं या बार-बार असामान्य ब्लीडिंग होती है, तो इसके पीछे गर्भाशय से जुड़ी समस्या या कोई अन्य स्त्री रोग भी जिम्मेदार हो हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से मिलकर जांच जरूरी है।

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आहार पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
डाइट में आयरन कम होना भी बड़ी वजह

शरीर को हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन की जरूरत होती है। 19 से 50 वर्ष की वयस्क महिलाओं के लिए प्रतिदिन 18 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है। 

दालें, चने, राजमा, पालक जैसी हरी सब्जियां, मांस-मछली, अंडे आयरन के अच्छे स्रोत हैं। पौधों से मिलने वाले आयरन का शरीर में अवशोषण अपेक्षाकृत कम होता है। विटामिन सी वाले खाद्य पदार्थ इसके अवशोषण में मदद कर सकते हैं। आयरन की कमी और एनीमिया के खतरे को जानने के लिए यहां क्लिक करें।
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एनीमिया का खतरा - फोटो : Freepil.com
इन बातों पर भी करें गौर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खून की कमी का मतलब हमेशा आयरन की कमी नहीं होता। विटामिन बी12 और फोलेट की कमी, संक्रमण, सूजन, क्रॉनिक बीमारियां और कुछ आनुवंशिक समस्याएं भी एनीमिया का कारण बन सकती हैं। इसलिए बिना जांच के लंबे समय तक आयरन की दवा लेना सही तरीका नहीं है। 

अगर आपको लगातार कमजोरी, चक्कर आने, सांस फूलने, दिल की धड़कन तेज महसूस होने या पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्लीडिंग की दिक्कत रहती है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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