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WHO Report: भारत की बड़ी आबादी हाइपरटेंशन का शिकार, इलाज में बाधा बन रही है ये बड़ी समस्या

Thu, 21 Sep 2023 03:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाई ब्लड प्रेशर के रोगी - फोटो : iStock
हाइपरटेंशन जिसे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या के रूप में भी जाना जाता है, ये वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति हार्ट अटैक, स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याओं को भी बढ़ाने वाली मानी जाती है। भारत में हाइपरटेंशन रोगियों की संख्या समय के साथ बढ़ती जा रही है। इसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की हालिया रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। इसके मुताबिक जून 2023 तक 27 राज्यों में लगभग 5.8 मिलियन (58 लाख) से अधिक हाई ब्लड प्रेशर वाले रोगियों का इलाज इंडियन हाइपरटेंशन कंट्रोल इनेसिएटिव (आईएचसीआई) के तहत किया जा रहा था। रोगियों की संख्या समय के साथ बढ़ती जा रही है, जो बड़ा जोखिम कारक है।

डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट में दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है। गौरतलब है कि आईएचसीआई, नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के कारण समय से पहले मृत्यु दर को 25 प्रतिशत तक कम करने के सरकार के लक्ष्य पर काम कर रही है। यह पहल 2017 में शुरू की गई थी और इसमें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद, राज्य सरकारें और डब्ल्यूएचओ-भारत शामिल हैं।
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हाई ब्लड प्रेशर के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
दवाओं की उपलब्धता बड़ी चिंता

'ग्लोबल रिपोर्ट ऑन हाइपरटेंशन' में कहा गया है कि आईएचसीआई के तहत देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हाई ब्लड प्रेशर की रोकथाम के लिए एक मानक उपचार प्रोटोकॉल विकसित किया है। हालांकि अभियान के लॉन्च होने के बाद सामने आने वाली चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि दवाओं की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, रोगियों की संख्या बढ़ी है।

इतना ही नहीं बड़े संख्या में ऐसे भी लोग हैं जो हाई ब्लड प्रेशर के शिकार तो हैं पर उनमें इस समस्या का निदान ही नहीं हो पाया है।
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वयस्कों मे हाइपरटेंशन की समस्या - फोटो : istock
एक तिहाई वयस्कों को उच्च रक्तचाप की समस्या

हाइपरटेंशन को लेकर डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि दुनिया भर में 30-79 वर्ष की आयु के लगभग एक तिहाई वयस्कों को उच्च रक्तचाप की समस्या है। इनमें से, केवल 54 प्रतिशत में ही इस स्थिति का निदान किया गया है, 42 प्रतिशत का इलाज किया जा रहा है और 21 प्रतिशत ने अपने उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया है। यदि उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोग इसको नियंत्रित करने के लिए उपाय कर लें तो 2040 तक भारत में कम से कम 4.6 मिलियन मौतों को रोका जा सकता है।

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ब्लड प्रेशर के जोखिम कारक - फोटो : istock
ब्लड प्रेशर साइलेंट किलर डिजीज

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 188.3 मिलियन (18.83 करोड़) लोग हाई ब्लड प्रेशर के साथ जी रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 37% को ही अपनी स्थिति के बारे में पता है। वैश्विक आबादी का अनुमानित 33% हिस्सा हापरटेंशन का शिकार है पर जिनमें से केवल 50-55 फीसदी लोगों को ही निदान प्राप्त हुआ है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस कहते हैं,  हाई ब्लड प्रेशर की समस्या जानलेवा है, यह हृदय संबंधी बीमारियों का प्रमुख जोखिम कारक है जो दुनिया में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। इस साइलेंट किलर बीमारी को लेकर सभी लोगों को सचेत रहने की आवश्यकता है।
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हाई ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Pixabay
क्यों बढ़ रही है हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, इससे कैसे बचें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल-आहार में गड़बड़ी और शारीरिक निष्क्रियता में कमी इस रोग के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है, समय के साथ 30 से कम आयु के लोग भी हाई ब्लड प्रेशर के शिकार हो रहे हैं। मोटापा या अधिक वजन होना, परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रहना भी आपके खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है। अधिक नमक (सोडियम) या आहार में पोटैशियम की कमी भी ब्लड प्रेशर को बढ़ा देती है।

इसके जोखिमों को कम करने के लिए स्वस्थ आहार का सेवन करें और वजन को कंट्रोल रखें। धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से दूरी बनाकर आप बचाव कर सकते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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