फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

IVF Treatment: शादी के कितने समय तक बच्चा न होने पर आईवीएफ कराना चाहिए? यहां जानिए विशेषज्ञ से

Mon, 27 Jul 2026 06:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईवीएफ आधुनिक प्रजनन चिकित्सा की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, लेकिन यह हर दंपती के लिए पहला विकल्प नहीं होती। कई बार जीवनशैली में सुधार, दवाओं, ओव्यूलेशन इंडक्शन या अन्य उपचारों से भी गर्भधारण संभव हो जाता है। 
विज्ञापन
1 of 5
आईवीएफ के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com/AI
दुनियाभर में बांझपन (इनफर्टिलिटी) की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में 35-49 वर्ष की करीब 5.36 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जो सामान्य रूप से गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो 2036 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 7.96 करोड़ हो सकती है। इस बढ़ती समस्या के कारण पर्यावरणीय कारकों के अलावा लाइफस्टाइल-खानपान की गड़बड़ी और धूम्रपान-शराब जैसी आदतों को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

इनफर्टिलिटी को पहले जहां केवल महिलाओं की समस्या माना जाता था, वहीं अब शोध बताते हैं कि लगभग 50 फीसदी मामलों में कारण पुरुषों से जुड़े होते हैं। इस तरह की समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए  इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) वरदान साबित हो रहा है। 

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने आईवीएफ से जुड़े कई जरूरी सवालों के जबाव दिए थे। लोगों में मन में एक सवाल ये भी रहता है कि आईवीएफ के लिए कब जाना चाहिए,  शादी के कितने समय बाद भी बच्चा न हो तो आपको आईवीएफ करा लेना चाहिए?
विज्ञापन

2 of 5
प्रजनन की दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
गर्भधारण में होने वाली दिक्कतें

डॉक्टर कहते हैं, आईवीएफ आधुनिक प्रजनन चिकित्सा की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीक है, लेकिन यह हर दंपती के लिए पहला विकल्प नहीं होती। गर्भधारण में आ रही कई दिक्कतों को कई बार लाइफस्टाइल में सुधार, दवाओं या अन्य उपचारों से भी ठीक किया जा सकता है। इसलिए शादी के तुरंत बाद आईवीएफ के लिए नहीं जाना चाहिए।
 
  • विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शादी के बाद नियमित असुरक्षित संबंध बनाने के बावजूद लंबे समय तक गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो समय पर फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। 
  • महिलाओं की बढ़ती उम्र के साथ अंडों की संख्या और गुणवत्ता कम हो सकती है, इसलिए समय रहते अपनी समस्या को लेकर डॉक्टर से जरूर मिलें।
विज्ञापन

3 of 5
इंफर्टिलिटी की समस्या - फोटो : Freepik.com
फर्टिलिटी की बढ़ती समस्याएं

डॉक्टर कहते हैं, आमतौर पर इंफर्टिलिटी तब माना जाता है जब नियमित और बिना गर्भनिरोधक के यौन संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण न हो पाना। 
 
  • सामान्य तौर पर यदि 35 वर्ष से कम उम्र की महिला में 12 महीने तक प्रयास के बाद भी गर्भधारण न हो तो फर्टिलिटी जांच की सलाह दी जाती है। 
  • वहीं 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिला में 6 महीने तक प्रयास के बाद भी गर्भधारण न होने पर विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। 
  • यदि महिला की उम्र 40 वर्ष के आसपास हो या मासिक धर्म अनियमित हो, तो और भी जल्दी डॉक्टरी सलाह जरूरी है।

4 of 5
आईवीएफ कब कराएं? - फोटो : Adobe Stock
शादी के कितने समय बाद आईवीएफ के बारे में सोचना चाहिए?

महिला रोग विशेषज्ञ डॉ गरिमा व्यास कहती हैं, केवल इस आधार पर निर्णय नहीं लिया जाता कि आपकी शादी को कितने वक्त बीत गया है। इसमें महिला की उम्र, जांच रिपोर्ट और कारणों को भी देखा जाता है। 
 
  • यदि महिला की उम्र 35 वर्ष से कम है और एक वर्ष तक प्रयास के बाद भी गर्भधारण नहीं हुआ, तो पहले फर्टिलिटी मूल्यांकन कराया जाना चाहिए। 
  • यदि महिला 35 वर्ष या उससे अधिक है और जांच के बाद यदि डॉक्टर को लगता है कि प्राकृतिक गर्भधारण या अन्य उपचार की संभावना कम है, तो वह आईवीएफ की सलाह दे सकते हैं।

डॉक्टर कहती हैं, आईवीएफ 100% सफल हो ये भी जरूरी नहीं है। यह महिला की उम्र, अंडों की गुणवत्ता, शुक्राणुओं की स्थिति और गर्भाशय की स्थिति पर निर्भर करती है। कम उम्र की महिलाओं में सफलता की संभावना सामान्यतः अधिक होती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
आईवीएफ और आईसीएसआई - फोटो : Amarujala.com/AI
आईवीएफ और आईसीएसआई को जानिए

डॉक्टर कहती हैं, गर्भधारण न हो पाने के कारणों को समझने के लिए आवश्यकतानुसार आईवीएफ या फिर आईसीएसआई जैसी तकनीक को प्रयोग में लाया जाता है। आईसीएसआई में विशेषज्ञ केवल एक स्वस्थ शुक्राणु चुनकर उसे सीधे अंडाणु के भीतर इंजेक्ट करते हैं। इसलिए आईसीएसआई विशेष रूप से पुरुष बांझपन के मामलों में उपयोगी मानी जाती है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।


--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें