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Visceral Fat: सिर्फ मोटापा नहीं पेट के अंदर की ये चर्बी है असली खतरा, बढ़ा सकती है कई बीमारियों का जोखिम

Tue, 11 Aug 2026 07:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विरसल फैट त्वचा के ठीक नीचे जमा चर्बी से अलग होती है। यह पेट की गहराई में अंगों के आसपास जमा होती है और ज्यादा मात्रा में होने पर टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और फैटी लिवर जैसे मेटाबॉलिक जोखिमों को बढ़ा सकती है।
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विसरल फैट की दिक्कत - फोटो : Freepik.com
वजन बढ़ना और मोटापा मौजूदा समय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसका शिकार देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों का वजन अधिक होता है उनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर से लेकर कई तरह के कैंसर होने तक का खतरा हो सकता है।

क्या आपने ऐसे लोगों को देखा है जिनका वजन तो देखने में बिल्कुल सामान्य होता है, हाथ-पैर ज्यादा मोटे नहीं होते, लेकिन पेट काफी निकला रहता है? अक्सर इसे सिर्फ शरीर की बनावट मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन हर बार ये सामान्य नहीं होता, ये विसरल फैट जैसी समस्या का संकेत हो सकता है।

विसरल फैट पेट की गहराई में मौजूद आंतरिक अंगों जैसे लिवर, आंत और अग्न्याशय के आसपास जमा होती है। यह त्वचा के नीचे जमा सामान्य चर्बी यानी सबक्यूटेनियस फैट से अलग होती है। विसरल फैट बढ़ना शरीर में सूजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी प्रक्रियाओं से जुड़ी हो सकती है। इसलिए इसपर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
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विसरल फैट क्या होता है? - फोटो : Adobe stock
विसरल फैट- TOFI

अध्ययनों से पता चलता है कि विसरल फैट बढ़ने से टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, फैटी लिवर और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  पेट का आकार बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में अतिरिक्त फैट बढ़ने, पेट के आसपास फैट ज्यादा जमा होने, शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक बैठने के कारण ये समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा कैलोरी वाली चीजें और मीठे पेय भी वजन और पेट की चर्बी बढ़ाने वाले हो सकते हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सामान्य तौर पर पेट निकलने और विसरल फैट में अंतर होता है। विसरल फैट को बोलचाल की भाषा में TOFI भी कहा जाता है। टोफी यानी थिन आउटसाइड-फैट इनसाइड।
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पेट निकलने की समस्या - फोटो : Adobe Stock
विसरल फैट आखिर क्या होता है?

विसरल फैट पेट की गहराई में आंतरिक अंगों के आसपास जमा होती है। यह त्वचा के ठीक नीचे जमा फैट से अलग होती है। 
  • शरीर को कुछ मात्रा में फैट की जरूरत होती है क्योंकि यह ऊर्जा का भंडार रखने और कई जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाती है। 
  • लेकिन अत्यधिक विसरल फैट स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकती है। 

अध्ययनों  में इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस, सूजन और मेटाबॉलिक समस्याओं को बढ़ाने वाला पाया गया है। विसरल फैट आंखों से दिखाई नहीं देती, कमर का घेरा बढ़ना एक संकेत हो सकता है।

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डायबिटीज-हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
विसरल फैट को ज्यादा खतरनाक क्यों माना जाता है?

विसरल फैट शरीर के आंतरिक अंगों के आसपास जमा होती है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा हो सकता है। 
  • इसके कारण समय के साथ ब्लड शुगर नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। 
  • पेट के अंदर अधिक फैट हृदय रोग और फैटी लिवर जैसे जोखिमों से भी जुड़ी है। 

विसरल फैट के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। इंसुलिन शरीर को ब्लड ग्लूकोज का इस्तेमाल करने में मदद करने वाला महत्वपूर्ण हार्मोन है। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं, तो ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। पेट के आसपास अधिक फैट से हृदय संबंधी जोखिमों का खतरा भी हो सकता है।अत्यधिक विसरल फैट मेटाबॉलिक सिंड्रोम, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
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आहार पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
विसरल फैट कम कैसे करें?

विसरल फैट कम करने के लिए शारीरिक गतिविधि सबसे महत्वपूर्ण है। वाकिंग, साइकिलिंग, तैराकी और एरोबिक गतिविधियां कैलोरी बर्न करने और कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस सुधारने में मदद कर सकती हैं।
 
  • संतुलित खानपान की मदद से भी इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
  • सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, नट्स और सीड्स जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ भी इस समस्या को कम करने में मदद करती हैं।
  • अगर वजन सामान्य होने के बावजूद पेट तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है तो डॉक्टर से जांच जरूर करा लें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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