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Iron Deficiency: महिलाओं की ये आम गलतियां खामोशी से बढ़ रही हैं एनीमिया का खतरा, हो जाइए सावधान

Sat, 24 Jan 2026 05:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) एक आम लेकिन गंभीर समस्या है, कई बार इसकी वजह बड़ी बीमारी नहीं बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी गलतियां होती हैं। अगर समय रहते इन आदतों को न सुधारा जाए, तो कमजोरी, थकान जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
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थकान-कमजोरी और एनीमिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक आहार के सेवन को सबसे आवश्यक माना जाता है। जब बात महिलाओं के सेहत की होती है, तो इसपर और भी गंभीरता से ध्यान देना जरूरी हो जाता है। महिलाओं में आयरन की कमी यानी एनीमिया की समस्या होना काफी आम है, भारतीय महिलाओं में इसका खतरा और भी ज्यादा देखा जाता रहा है। आंकड़ों से पता चलता है कि देश में 57% से अधिक महिलाओं को एनीमिया की दिक्कत है। शरीर में आयरन की कमी को एनीमिया कहा जाता है। 

शरीर में आयरन की मुख्य भूमिका हीमोग्लोबिन बनाने में होती है, जो खून के जरिए ऑक्सीजन को पूरे शरीर तक पहुंचाता है। जब शरीर में आयरन की मात्रा कम हो जाती है, तो हीमोग्लोबिन भी घटने लगता है। यही स्थिति एनीमिया का कारण बनती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर कई महिलाएं इसके शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। हालांकि धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। कहीं आप भी एनीमिया का शिकार तो नहीं हैं?
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एनीमिया की समस्या - फोटो : Freepik.com
महिलाओं में आयरन की कमी के मुख्य कारण

डॉक्टर कहते हैं, महिलाओं में आयरन की कमी का सबसे बड़ा कारण मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव माना जाता है। हर महीने खून की कमी होने से शरीर का आयरन स्टोर धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।
  • इसके अलावा खानपान में पोषक तत्वों की कमी से भी एनीमिया का खतरा बढ़ जाता है।
  • हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, गुड़, चुकंदर और आयरन युक्त खाद्य पदार्थ पर्याप्त मात्रा में न लेने से शरीर को जरूरी आयरन नहीं मिल पाता।
  • लंबे समय तक आयरन की कमी रहने से अत्यधिक थकान, चक्कर आना, सांस फूलना, बाल झड़ना और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
आइए जानते हैं कि आपकी कौन सी आदतें इस खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं?
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आहार पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
गड़बड़ तो नहीं है आपका खानपान

आजकल महिलाएं वजन घटाने या बिजी लाइफस्टाइल के कारण भोजन कम करती हैं। यह आदत सीधे तौर पर आयरन की कमी का कारण बन सकती है।
  • हरी पत्तेदार सब्जियों, दालों, साबुत अनाज, सूखे मेवे और कुछ फलों से आयरन मिलता है।
  • लंबे समय तक लो कैलोरी और कम वाली डाइट लेने से महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से गिरता है। 
  • गड़बड़ खानपान के कारण एनीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

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चाय-कॉफी पीने के नुकसान - फोटो : Freepik.com
ज्यादा चाय और कॉफी पीने की आदत नुकसानदायक

दिनभर में बार-बार चाय और कॉफी पीने की आदत भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है। 
  • चाय और कॉफी में मौजूद टैनिन और कैफीन आयरन के अवशोषण को कम कर देते हैं। 
  • अध्ययनों के अनुसार, भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से आयरन का अवशोषण 40-60 प्रतिशत तक घट सकता है। 
  • जो महिलाएं पहले से आयरन की कमी से जूझ रही हैं हैं, उनके लिए यह आदत और ज्यादा नुकसानदेह साबित होती है। 


मासिक धर्म की अनदेखी और समय पर जांच न कराना

कई महिलाएं हैवी पीरियड्स को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। लगातार ज्यादा रक्तस्राव होना आयरन की कमी का बड़ा कारण है। 
  • हर महीने जरूरत से ज्यादा खून निकलने पर शरीर में आयरन की मात्रा कम होने लगती है। 
  • यदि समय-समय पर हीमोग्लोबिन की जांच न कराई जाए, तो एनीमिया धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है। 
  • विशेषज्ञों के अनुसार, जिन महिलाओं को लंबे समय तक हैवी या अनियमित पीरियड्स रहते हैं, उनमें एनीमिया का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
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महिलाओं में एनीमिया की समस्या - फोटो : Freepik.com
थकान और कमजोरी को नजरअंदाज करना ठीक नहीं

महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को कम प्राथमिकता देती हैं। लगातार थकान, सांस फूलना, चक्कर आना या बाल झड़ना जैसे लक्षणों को वे घरेलू काम या तनाव का असर मानकर टाल देती हैं। ये एनीमिया के शुरुआती और अहम संकेत होते हैं। शुरुआती स्टेज में पहचान हो जाए तो एनीमिया को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। लक्षणों को नजरअंदाज करने की आदत से आयरन की कमी बढ़ती जाती है और समस्या गंभीर हो जाती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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