Text Neck Syndrome: सुनने में ये भले ही अजीब लगे लेकिन ये एक ऐसा सिंड्रोम है, जिसकी वजह से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यहां इस लेख में हम आपको इसी बारे में डिटेल जानकारी देंगे।
Text Neck Syndrome: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। चाहे ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया या मनोरंजन, लोग घंटों तक स्क्रीन के सामने समय बिताते हैं।
ऐसे में अब लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करने की आदत एक नई स्वास्थ्य समस्या को जन्म दे रही है, जिसे "टेक्स्ट नेक सिंड्रोम" कहा जाता है।
समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो यह लगातार दर्द, अकड़न और रीढ़ से जुड़ी अन्य परेशानियों का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं टेक्स्ट नेक सिंड्रोम क्या है, इसके लक्षण, कारण, बचाव के उपाय और डॉक्टर इस बारे में क्या सलाह देते हैं।
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जानें क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम
- फोटो : AI
सबसे पहले जान लें कि क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम?
टेक्स्ट नेक सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जो लंबे समय तक मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय गर्दन को आगे और नीचे झुकाकर रखने के कारण विकसित हो सकती है। सामान्य स्थिति में सिर का वजन गर्दन पर संतुलित रहता है, लेकिन जैसे-जैसे गर्दन आगे झुकती है, रीढ़ और गर्दन की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता जाता है। यही अतिरिक्त दबाव समय के साथ दर्द और अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
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जानें क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम
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टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के लक्षण
गर्दन में लगातार दर्द या अकड़न
कंधों और ऊपरी पीठ में दर्द
सिरदर्द, खासकर गर्दन के पीछे से शुरू होना
गर्दन घुमाने में कठिनाई
हाथों में झुनझुनी या सुन्नपन
लंबे समय तक बैठने के बाद दर्द बढ़ जाना
खराब बॉडी पोश्चर
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जानें क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम
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टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के कारण
घंटों तक गर्दन झुकाकर मोबाइल देखने से गर्दन पर लगातार दबाव पड़ता है।
यदि स्क्रीन आंखों के स्तर पर नहीं है और आप झुककर काम करते हैं, तो समस्या बढ़ सकती है।
बीच-बीच में ब्रेक न लेने से मांसपेशियां थक जाती हैं।
रीढ़ सीधी न रखना और झुककर बैठना गर्दन पर अतिरिक्त तनाव डालता है।
यदि गर्दन का दर्द कई दिनों तक बना रहे, दर्द हाथों तक फैलने लगे, हाथों में सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो, या सिरदर्द और गर्दन की अकड़न लगातार बढ़ती जाए, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। समय पर उपचार से समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।