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Mental Health: लोगों से बात करने में होती है घबराहट, जज किए जाने का लगता है डर? कहीं आपको सोशियोफोबिया तो नहीं

Sun, 14 Jun 2026 07:12 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सोशियोफोबिया एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अन्य लोगों के सामने बात करने, सभाओं में जाने या सामाजिक स्थितियों में अत्यधिक डर और घबराहट होती है। कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं?
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सोशल फोबिया की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
कार्यस्थल पर आप अपने सभी काम समय पर और बेहतर तरीके से करते हैं, लेकिन जैसे ही मीटिंग में सवाल पूछने या अपनी राय रखने की बारी आती है, घबराहट होने लगती है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है, हाथ-पैर कांपने लगते हैं और दिमाग खाली-सा महसूस होता है।  मनोवैज्ञानिक इसे सोशियोफोबिया या पब्लिक स्पीकिंग का डर कहते हैं। लेकिन आखिर यह डर सताता क्यों है?

इस घबराहट की सबसे बड़ी वजह होती है- ‘लोग क्या सोचेंगे?’ इसी कारण आप मीटिंग में केवल परफेक्ट सवाल पूछना चाहते हैं। ऐसे में आप अपने सवाल को दिमाग में कई बार अलग-अलग शब्दों और तरीकों से दोहराते रहती हैं और फिर अंत में आप खुद ही उसमें उलझ जाते हैं और मीटिंग खत्म हो जाती है।
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गवां सकते हैं बड़े मौके - फोटो : Adobe Stock
सोशल फोबिया तोड़ देता है आत्मविश्वास

जब आप मीटिंग में चुप रहते हैं, तो सीनियर्स को लगता है कि आपमें रुचि या ज्ञान की कमी है। कई बार ऐसा होता है कि आपके मन की बात कोई दूसरा व्यक्ति कह देता है और उसका श्रेय ले जाता है। तब आप सोचते रह जाते हैं- ‘यही तो मैं कहना चाहता था।’

हर बार चुप रह जाने के बाद एक अजीब-सा पछतावा होता है। आप खुद को कोसने लगते हैं- ‘काश, मैं बोल देता।’ धीरे-धीरे यह सिलसिला आपके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने लगता है। इससे आत्मविश्वास घटता है और तनाव बढ़ने लगता है।
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मेंटल हेल्थ की समस्या - फोटो : Adobe Stock Photo
कैसे करें इसे दूर?

मनोवैज्ञानिक डॉ. नूपुर गोसाईं कहती हैं, यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति से गलती होना स्वाभाविक है। बड़े अधिकारी भी मीटिंग में कभी-कभी अटक जाते हैं या गलत बोल देते हैं। इसलिए खुद पर अनावश्यक दबाव न डालें।
 
  • अपनी सोच को सकारात्मक रखें और आत्मविश्वास बढ़ाएं।
  • यह मानें कि आपका सवाल या सुझाव महत्वपूर्ण है और वह आपको सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देता है।
  • लगातार अभ्यास से झिझक कम हो जाएगी।
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आत्मविश्वास बढ़ाने वाले तरीके अपनाएं - फोटो : Adobe
छोटे कदमों से शुरुआत

डर को कम करने के लिए आप पहले से मीटिंग का एजेंडा पढ़ें और विषय से जुड़ी थोड़ी रिसर्च करें। इससे विषय की समझ बढ़ेगी और आत्मविश्वास भी आएगा। जब जानकारी स्पष्ट होती है, तो मन भी शांत रहता है और घबराहट काफी कम हो जाती है।
 
  • यदि बोलने की बारी आने पर दिल की धड़कन तेज हो जाए, तो 3-4 बार गहरी और लंबी सांस लें।
  • इससे नर्वस सिस्टम को शांत होने का संकेत मिलता है।
  • शुरुआत छोटे कदमों से करें, जैसे किसी की बात का समर्थन करना या छोटे सवाल पूछना।

आई कॉन्टैक्ट और मिरर प्रैक्टिस

आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए घर पर शीशे के सामने खड़े होकर सवाल पूछने की प्रैक्टिस करें। जब आप मीटिंग में बोलें, तो उन लोगों की तरफ देखकर बात करें, जो आपकी बात का समर्थन कर रहे हों। इससे आपका हौसला बढ़ेगा। शुरुआत में थोड़ी झिझक महसूस होगी, लेकिन धीरे-धीरे यही आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाएगी।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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