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Sleep Divorce: अच्छी सेहत के लिए बढ़ रहा है 'स्लीप डिवोर्स' का चलन, क्या है सोशल-मीडिया पर चर्चित ये मुद्दा

Mon, 06 May 2024 06:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नींद की समस्या - फोटो : Freepik
अच्छी सेहत के लिए नींद कितनी जरूरी है ये हम सभी अक्सर पढ़ते-सुनते रहते हैं। पर क्या हमें रोजाना रात में अच्छी नींद मिल पा रही है? 

अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत सहित दुनिया के कई देशों में बड़ी आबादी नींद की समस्याओं से जूझ रही है। स्वस्थ शरीर के लिए रात में कम से कम सात से नौ घंटे अच्छी और निर्बाध नींद जरूरी है। यही कारण है कि अमेरिकी में बड़ी संख्या में लोग अपनी रात की नींद को बेहतर बनाने में मदद के लिए "स्लीप डिवोर्स" का विकल्प चुन रहे हैं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन (एएएसएम) के सर्वेक्षण के अनुसार, एक तिहाई से अधिक लोगों का कहना है कि साथी के खर्राटों की आवाज, पंखे की स्पीड, एसी के तापमान को सेट करने जैसी समस्याएं नींद में बाधा डालती हैं, इससे बचने के लिए पति-पत्नी कभी-कभी या लगातार अलग-अलग कमरों में सोते हैं। ये चलन भारत में भी बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। 

क्या 'स्लीप डिवोर्स' का चलन पति-पत्नी के आपसी संबंधों के लिए सही है या फिर दीर्घकालिक तौर पर इसके नुकसान हो सकते हैं, आइए स्वास्थ्य विशेषज्ञों से समझते हैं।
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नींद की समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : istock
पहले जान लीजिए 'स्लीप डिवोर्स' क्या है?

'स्लीप डिवोर्स' जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि ये 'नींद के लिए आपसी अलगाव' की एक शैली है। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि अच्छी नींद पाने के लिए पति-पत्नी अलग कमरों, अलग बिस्तर पर या फिर अलग-अलग समय पर सोते हैं। साथी के खर्राटे की आवाज नींद को बाधित कर देती है, इसके अलावा एसी के तापमान, पंखे की गति या कुछ और चीजों को लेकर युगल में बहस या मतभेद हो सकती है, इसका असर उनकी नींद को प्रभावित न करे इसलिए कई देशों में ये चलन तेजी से बढ़ रहा है।
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नींद की कमी से बढ़ सकती हैं मानसिक समस्याएं - फोटो : istock
'स्लीप डिवोर्स' पर क्या है विशेषज्ञ की राय?

क्या  'स्लीप डिवोर्स' का चलन आपसी रिश्तों के लिए ठीक है, इस बारे में समझने के लिए हमने मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से बातचीत की। डॉ सत्यकांत बताते हैं, नींद की समस्याएं रिश्तों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती हैं। बार-बार स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अच्छी नींद लेने के लिए सुझाव देते आ रहे हैं, ये मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार की सेहत के लिए जरूरी है। एक रात भी ठीक से नींद न पूरी होने का असर अगले दिन गुस्सा, थकान, चिड़चिड़ेपन के रूप में देखने को मिलता है। 

अलग सोने की व्यवस्था व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में उभर रही है। ये किसी भी तरह से रिश्ते के विफल होने का संकेत नहीं है बल्कि नींद की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए दंपत्ति अगर ऐसा फैसला करते हैं तो इसे बेहतर सेहत के लिए अच्छा कदम माना जा सकता है।

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अच्छी नींद के लिए 'स्लीप डिवोर्स' - फोटो : istock
नींद की गुणवत्ता में इससे हो सकता है सुधार

डॉ सत्यकांत कहते हैं, युगल अगर अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करते हैं और नींद की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने के लिए 'स्लीप डिवोर्स' का फैसला लेते हैं तो इसके दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ भी हो सकते हैं।

इससे न सिर्फ अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है साथ ही मानसिक तौर पर शांति मिलने से आपसी प्रेम बढ़ता है और झगड़ा-चिड़चिड़ेपन की दिक्कत भी दूर होती है। अनिद्रा वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, 'स्लीप डिवोर्स' का चलन कुछ हद तक इसमें मददगार हो सकता है। 
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स्लीप डिवोर्स के बारे में जानिए - फोटो : istock
इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी

मनोचिकित्सक कहते हैं,  'स्लीप डिवोर्स' की पहली और सबसे जरूरी शर्त ये है कि इसमें युगल की आपसी सहमति हो, वरना अलग-अलग सोने से भावनात्मक दूरी पैदा हो सकती है, खासकर अगर इससे शारीरिक संबंध प्रभावित होते हैं। इसलिए नींद को प्रभावित करने वाली समस्याओं के बारे में खुलकर बातचीत की जानी चाहिए।

इसके अलावा पति-पत्नी के लिए एक साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने को प्राथमिकता देना भी महत्वपूर्ण है। कई देशों में जहां नींद की गुणवत्ता में कमी देखी जा रही है वहीं पर चिकित्सक कुछ समय के लिए 'स्लीप डिवोर्स' जैसे तरीकों को अपनाने की सलाह देते हैं।



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स्रोत और संदर्भ
Over a third of Americans opt for a “sleep divorce”


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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