रिंग्जाइटी की समस्या के बारे में जानिए
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क्यों होती है ये समस्या?
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, रिंग्जाइटी को मानसिक बीमारी नहीं माना जाता। यह तब होता है जब लगातार स्मार्टफोन के इस्तेमाल करने की वजह से दिमाग शरीर की सामान्य संवेदनाओं को फोन के वाइब्रेशन समझ लेता है। हालांकि नोटिफिकेशन कम करके, बार-बार फोन चेक करने को लेकर खुद को कंट्रोल करने के अलावा तनाव को मैनेज करके इस आदत में सुधार किया जा सकता है।
- रिंग्जाइटी का एक ही कारण तय नहीं है। इसका संबंध फोन के लगातार इस्तेमाल, किसी कॉल या मैसेज का इंतजार और किसी चिंता की प्रतिक्रिया हो सकता है।
- जिन लोगों को किसी व्यक्ति के जवाब, कॉल या संपर्क को लेकर ज्यादा चिंता रहती थी, उनमें यह अनुभव अधिक हो सकता है।
रिंग्जाइटी को आमतौर पर गंभीर नहीं माना जाता है, पर अगर इसके कारण आपकी दिनचर्या में दिक्कत होने लगे या फिर काम बाधित होने लगे तो इस बारे में विशेषज्ञ की सलाह ले लें। संभव है कि इसके पीछे मेंटल हेल्थ की कोई और दिक्कत हो?