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जानना जरूरी: मेगालोब्लास्टिक एनीमिया के बारे में जानते हैं आप? ये सामान्य एनीमिया से कितना अलग और कितना खतरनाक

Mon, 19 Oct 2026 02:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Megaloblastic Anemia: मेगालोब्लास्टिक एनीमिया, खून की कमी की समस्या है, जो मुख्य रूप से विटामिन बी12 या फोलेट की कमी से होती है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य से बड़ी हो जाती हैं। इस तरह की एनीमिया के कारण थकान-चक्कर, कमजोरी और झनझनाहट जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि ये सामान्य एनीमिया की दिक्कत से कितनी अलग है?
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एनीमिया की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com/AI
एनीमिया यानी खून की कमी वैश्विक स्तर पर देखी जा रही गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। एनीमिया की स्थिति कई दूसरी बीमारियों को बढ़ाने वाली मानी जाती है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि महिलाएं इस समस्या का सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। भारत में 57% से ज्यादा किशोरी और महिलाएं खून की कमी की समस्या का शिकार हैं।

एनीमिया के कारण कमजोरी, थकान, चक्कर आने और सांस फूलने जैसी दिक्कतें सबसे ज्यादा देखी जाती रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, शरीर में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी होने पर एनीमिया की दिक्कत होती है। आमतौर पर शरीर में आयरन की कमी होने से हीमोग्लोबिन का निर्माण ठीक से नहीं हो पाता जिसके कारण ये दिक्कत होती है। पर क्या आप जानते है कि हर बार एनीमिया आयरन की कमी से हो, ये जरूरी नहीं है। एनीमिया कई तरह का होता है और हर प्रकार के पीछे कारण एक जैसे नहीं होते।

मेगालोब्लास्टिक एनीमिया भी ऐसी ही एक समस्या है, जिससे दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं। आइए जानते हैं कि ये समस्या क्यों होती है और इसके क्या खतरे हो सकते हैं।
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ब्लड टेस्ट और खून की कमी - फोटो : Adobe Stock Images
मेगालोब्लास्टिक एनीमिया और इसके खतरे

वैश्विक स्तर पर, एनीमिया लगभग 40% प्री-स्कूल बच्चों और 30-37% महिलाओं को प्रभावित करता है, हालांकि इनमें से सभी मामले 'मेगालोब्लास्टिक' नहीं होते हैं। मेगालोब्लास्टिक एनीमिया के एक प्रकार मैक्रोसाइटोसिस, आम आबादी के 2 से 4% लोगों को प्रभावित करता है। इनमें से लगभग 60% मामलों में एनीमिया का कारण शराब का सेवन, फोलेट  या विटामिन बी12 की कमी होता है।
 
  • मेगालोब्लास्टिक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य तरीके से विकसित नहीं हो पातीं और आकार में बड़ी हो जाती हैं। 
  • विटामिन बी12 या फोलेट (विटामिन बी9) की कमी को इसका सबसे बड़ा कारण माना जाता है। 

सामान्य एनीमिया में भी हीमोग्लोबिन कम हो जाता है और आयरन की कमी समेत इसके कई अलग-अलग कारण होते हैं। मेगालोब्लास्टिक एनीमिया को समय पर पहचानना जरूरी है, क्योंकि खासकर विटामिन बी12 की लंबे समय तक कमी रहने पर नसों और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती है। 
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खून की कमी की समस्या - फोटो : Freepik.com
मेगालोब्लास्टिक एनीमिया क्या होता है?

हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं हीमोग्लोबिन की मदद से ऑक्सीजन को अलग-अलग अंगों तक पहुंचाती हैं। जब इन कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाती है, तो वे सामान्य से बड़े आकार की हो सकती हैं। इस स्थिति को मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कहते हैं।
 
  • विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसी तरह से फोलेट, कोशिकाओं के विकास और डीएनए बनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। इन दोनों की कमी के कारण लोगों में मेगालोब्लास्टिक एनीमिया होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • इसके अलावा अध्ययनों में पाया गया है कि पेट या आंतों की कुछ बीमारियों और सर्जरी के बाद कई लोगों के शरीर में विटामिन्स ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते। इस वजह से भी विटामिन बी12 या फोलेट की कमी हो सकती है जिसके कारण आप मेगालोब्लास्टिक एनीमिया का शिकार हो सकते हैं।
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एनीमिया के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepil.com
सामान्य एनीमिया और मेगालोब्लास्टिक एनीमिया में अंतर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, दोनों ही स्थितियों में शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाता है, लेकिन इनके कारण और रक्त कोशिकाओं की बनावट अलग हो सकती है।

सामान्य एनीमिया आयरन की कमी, रक्तस्राव, क्रॉनिक बीमारियाों के कारण होता है। जबकि मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कोशिकाओं के विकास और डीएनए बनने की प्रक्रिया में गड़बड़ी से संबंधित होता है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं अक्सर सामान्य से बड़े आकार की होती हैं।
 
  • मेगालोब्लास्टिक एनीमिया के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। कई बार शुरुआत में आपको इस समस्या का अंदाजा भी नहीं होता। इसके कारण लगातार थकान, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं होती हैं। कई लोगों में त्वचा के पीला पड़ने और थोड़े काम से सांस फूलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
  • विटामिन बी12 की कमी के कारण हाथ-पैर सुन्न होने, झनझनाहट, याददाश्त या संतुलन से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। गंभीर मामलों में लाल रक्त कोशिकाओं के अलावा सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स भी कम हो सकते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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