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Hypocholesterolemia: हाई कोलेस्ट्रॉल सेहत का दुश्मन, पर क्या हो अगर लो हो जाए कोलेस्ट्रॉल लेवल?

Sun, 07 Jun 2026 06:06 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाइपोकोलेस्ट्रोलेमिया ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से काफी कम हो जाता है। क्या लो कोलेस्ट्रॉल भी सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला माना जाता है?
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लो कोलेस्ट्रॉल की समस्या को जानिए - फोटो : Amarujala.com/AI
हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या हमारी सेहत के लिए कितनी खतरनाक है, ये हम सभी अच्छी तरह से जानते हैं। कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही दिल की बीमारी, ब्लॉकेज, हार्ट अटैक वाली तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है। चूंकि अब कम उम्र के लोग भी हाई कोलेस्ट्रॉल का शिकार होते जा रहे हैं ऐसे में डॉक्टर कम उम्र से ही इसकी जांच कराते रहने और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखने वाले उपाय करने की सलाह देते हैं।

कोलेस्ट्रॉल वैसे तो सेहत का दुश्मन नहीं है। यह शरीर की हर कोशिका का जरूरी हिस्सा है। हमारे दिमाग, नसों, हार्मोन और यहां तक कि विटामिन डी को बनाने में भी इसकी अहम भूमिका होती है। हमारा शरीर खुद भी कोलेस्ट्रॉल बनाता है। हालांकि समस्या तब होती है जब इसका स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाए।

हाई कोलेस्ट्रॉल के बारे में तो हम सभी अक्सर पढ़ते-सुनते रहते हैं, पर क्या आप जानते हैं कि खून में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बहुत लो हो जाने से क्या होता है? ये स्थिति भी क्या हाई कोलेस्ट्रॉल की तरह ही खतरनाक है? आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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लो कोलेस्ट्रॉल की स्थिति - फोटो : Freepik.com
हाइपोकोलेस्ट्रोलेमिया की समस्या

लो कोलेस्ट्रॉल को हाइपोकोलेस्ट्रोलेमिया के नाम से जाना जाता है। वैसे तो हाई कोलेस्ट्रॉल के सामने इसकी बहुत कम चर्चा में होती है लेकिन अध्ययनों में पाया गया है कि लो कोलेस्ट्रॉल भी कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण हो सकता है।
 
  • इससे हार्मोनल गड़बड़ी, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, कुपोषण, लिवर सहित कुछ गंभीर बीमारियों का जोखिम हो सकता है। यही कारण है कि सिर्फ कोलेस्ट्रॉल को कम करने पर ही नहीं बल्कि इसे सही सीमा में रखने पर ध्यान देना चाहिए।
  •  वयस्कों के लिए, टोटल कोलेस्ट्रॉल का हेल्दी लेवल 200 mg/dL से कम होत है। 
  • अगर कोलेस्ट्रॉल 120 mg/dL से कम बना हुआ है  तो ये हाइपोकोलेस्ट्रोलेमिया का संकेत हो सकता है।
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लो कोलेस्ट्रॉल की स्थिति - फोटो : Freepik.com
आखिर क्यों होती है ये समस्या?

डॉक्टर कहते हैं, कुछ लोगों में हाइपोकोलेस्ट्रोलेमिया का खतरा आनुवांशिक होता है जबकि कुछ में ये इन्फेक्शन या दूसरी बीमारियों की वजह से हो सकती है। अक्सर, लोगों में लो कोलेस्ट्रॉल के लक्षण नहीं दिखते। डायरिया, मांसपेशियों पर कम कंट्रोल और ग्रोथ-डेवलपमेंट से जुड़ी समस्याएं  होने पर इसकी जांच करानी की डॉक्टर सलाह दे सकते हैं।

जेनेटिक स्थिति में शरीर न्यूट्रिएंट्स का सही तरीके से अवशोषण नहीं कर पाता है। कुछ अन्य कारण हैं जिनपर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
 
  • अल्कोहल का ज्यादा सेवन (अल्कोहल यूज़ डिसऑर्डर)
  • कैंसर
  • क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस
  • हाइपरथायरायडिज्म
  • किडनी फेलियर या लिवर की बीमारी
  • कुपोषण
  • सेप्सिस, एचआईवी या दूसरे इन्फेक्शन

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तनाव, स्ट्रेस की समस्या - फोटो : Freepik.com
लो कोलेस्ट्रॉल की पहचान कैसे करें?

लो कोलेस्ट्रॉल के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते। कई लोगों में कोई लक्षण ही नहीं दिखते और यह केवल ब्लड टेस्ट में पता चलता है। हालांकि जब ये कमी किसी अन्य बीमारी से जुड़ी होती है तो कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं।
 
  • कुछ मरीजों में लगातार थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। 
  • चूंकि कोलेस्ट्रॉल हार्मोन उत्पादन में भूमिका निभाता है, इसलिए हार्मोनल असंतुलन से जुड़े लक्षण हो सकते हैं।
  • लो कोलेस्ट्रॉल के कारण मूड डिसऑर्डर, चिंता या अवसाद का भी खतरा हो सकता है।
  • इसके अलावा कुछ लोगों में बार-बार दस्त, मांसपेशियों पर नियंत्रण कम होने और विकास-वृद्धि से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या में क्या करें? - फोटो : Adobe Stock Photo
लो कोलेस्ट्रॉल में क्या करें?

बहुत लो कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए कई चुनौतियां पैदा कर सकता है। कोलेस्ट्रॉल हार्मोन्स, कोर्टिसोल और विटामिन डी के निर्माण में जरूरी होता है। इसकी कमी से कई प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है।
 
  • यदि किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल बहुत लो हो गया है तो सबसे पहले कारण की पहचान की जाती है। 
  • डॉक्टर थायरॉयड, लीवर फंक्शन, पोषण स्थिति और अन्य संभावित बीमारियों की जांच कर सकते हैं।
  • संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, हेल्दी फैट्स, नट्स-सीड्स, मछली और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन जरूर है।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा या सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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