फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानना जरूरी: कोर्टिसोल हार्मोन के क्या कार्य हैं, इसके बढ़ने-घटने का शरीर पर क्या असर होता है? जानिए सबकुछ

Sun, 01 Jun 2025 05:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Cortisol Hormone Function: कोर्टिसोल एक जरूरी  हार्मोन है, जो एड्रिनल ग्रंथियों द्वारा निर्मित होता है। इसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है क्योंकि तनाव के समय इसका स्राव तेजी से बढ़ जाता है। हालांकि कोर्टिसोल सिर्फ तनाव से निपटने के लिए ही नहीं शरीर में और भी कई जरूरी काम करता है।  जब शरीर में इसका असंतुलन होने लगता है तो इससे कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
विज्ञापन
1 of 5
कोर्टिसोल क्या है? - फोटो : Freepik.com
हमारे शरीर में निरंतर कुछ न कुछ गतिविधि होती रहती है। शरीर के सभी कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए बाकायदा एक सिस्टम काम करता है, इसमें हार्मोन्स का विशेष भूमिका होती है।

हार्मोन, हमारे शरीर में विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाले रासायनिक संदेशवाहक होते है जैसे कि शरीर की वृद्धि-विकास, मेटाबॉलिज्म, मनोदशा और अन्य कार्य। कोर्टिसोल भी ऐसा ही एक अति महत्वपूर्ण हार्मोन है जो शरीर के लिए कई प्रकार से बहुत जरूरी है। 

कल्पना कीजिए कि आपका शरीर एक बड़ी कंपनी है, जहां हर हार्मोन एक किसी विभाग प्रमुख की भूमिका निभाते हैं। इस कंपनी में कोर्टिसोल नामक हार्मोन संकट प्रबंधन का कार्य करता है। जैसे ही शरीर को कोई समस्या महसूस होती है (तनाव, चोट या बीमारी) उसी समय कोर्टिसोल तुरंत सक्रिय हो जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोर्टिसोल जीवनरक्षक हार्मोन है जो हमें कई प्रकार की समस्याओं से लड़ने की ताकत देता है। लेकिन जब शरीर में इसका असंतुलन होने लगता है तो इससे कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। 
विज्ञापन

2 of 5
कोर्टिसोल-स्ट्रेस हार्मोन - फोटो : Freepik.com
पहले इस हार्मोन के बारे में जान लीजिए

कोर्टिसोल एक जरूरी  हार्मोन है, जो एड्रिनल ग्रंथियों द्वारा निर्मित होता है। इसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है क्योंकि तनाव के समय इसका स्राव तेजी से बढ़ जाता है। हालांकि कोर्टिसोल सिर्फ तनाव से निपटने में ही नहीं बल्कि शरीर में और भी कई जरूरी काम करता है। 

ब्लड शुगर-ब्लड प्रेशर, मेटाबोलिज्म और सोने-जागने के चक्र को मैनेज करने में भी इसकी भूमिका होती है। अगर कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक अधिक या कम बना रहे, तो यह शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।

आइए जानते हैं कैसे?
विज्ञापन

3 of 5
हाई कोर्टिसोल के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
हाई कोर्टिसोल की समस्या

हाई कोर्टिसोल कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, जिनमें सबसे प्रमुख कुशिंग सिंड्रोम है। इसी समस्या से जानिए अनंत अंबानी जूझ रहे हैं, पूरी जानकारी यहां से प्राप्त कर सकते हैं

एक अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक हाई कोर्टिसोल का स्तर मस्तिष्क के हिस्से हिप्पोकैम्पस (याददाश्त और लर्निंग से जुड़ा हिस्सा) को नुकसान पहुंचा सकता है। जिसके कारण आपको मानसिक दिक्कतें होने लगती हैं। इसी तरह कोर्टिसोल हाई रहने से हृदय रोगों का खतरा भी अधिक हो जाता है क्योंकि यह सूजन और रक्तचाप दोनों को बढ़ाता है।

कोर्टिसोल बढ़ने की स्थिति वजन बढ़ने, कंधे की हड्डियों के बीच वसा का जमाव, उच्च रक्तचाप, हाई शुगर और मांसपेशियों में कमजोरी का कारण बन सकती है। कोर्टिसोल इंसुलिन के प्रभाव को कम करता है जिससे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। इसी तरह रक्त वाहिकाओं पर कोर्टिसोल का प्रभाव आपके ब्लड प्रेशर को अनियंत्रित कर सकता है। 

4 of 5
थकान-कमजोरी के कारण - फोटो : Freepik.com
कोर्टिसोल कम होने से क्या होता है?

कोर्टिसोल बढ़ने की ही तरह लो होना भी शरीर के लिए ठीक नहीं है। अगर कोर्टिसोल का स्तर सामान्य से नीचे चला जाए, तो यह भी समस्याकारक हो सकता है। इसके कारण थकान और कमजोरी, वजन घटने और भूख न लगने, ब्लड प्रेशर लो होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। लो कोर्टिसोल के कारण मूड डिसऑर्डर जैसे डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन की दिक्कत भी होने लगती हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
कोर्टिसोल को कैसे कंट्रोल करें? - फोटो : Freepik.com
कैसे रखें इसे कंट्रोल?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं आप दिनचर्या को ठीक रखकर और कुछ आदतों का पालन करके कोर्टिसोल को कंट्रोल रख सकते हैं। 

मेडिटेशन इसका सबसे अच्छा तरीका है। ये कोर्टिसोल हार्मोन के स्तर पर को 20-30% तक कम कर सकता है। इसी तरह नियमित व्यायाम, योग और वॉकिंग भी विशेष रूप से उपयोगी है। कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए हर रात कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद जरूरी है, नींद की कमी से भी ये हार्मोन असंतुलित हो सकता है।



------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें