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Alert: भारतीयों में बढ़ रही विटामिन-बी12 और फोलेट की कमी, जानिए पुरुषों-महिलाओं पर क्या होता है इसका असर

Thu, 28 May 2026 07:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Vitamin-B12 & Folate Deficiency: विटामिन बी12 और फोलेट दोनों शरीर में खून बनाने, दिमाग और नसों को स्वस्थ रखने तथा डीएनए निर्माण जैसे बेहद जरूरी कार्यों में भूमिका निभाते हैं। भारतीयों में इसका खतरा बढ़ता जा रहा है। हालािया अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि इनकी कमी से क्या दिक्कतें होती हैं? पुरुषों-महिलाओं की सेहत पर क्या असर होता है?
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पोषक तत्वों की कमी का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
शरीर को स्वस्थ रखने का सबसे असरदार मंत्र है-पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए जिससे शरीर के लिए जरूरी न्यूट्रिशन की आसानी से पूर्ति हो सके। हालांकि तमाम रिपोर्ट्स इस बात को लेकर चिंता जताते रहे हैं कि ज्यादातर भारतीयों को अच्छे पोषण के लिए जरूरी न्यूट्रिशन नहीं मिल पा रहे हैं। लिहाजा विटामिन बी-12, आयरन और फोलेट जैसे जरूरी तत्वों की कमी तेजी से बढ़ रही हैं।
 
  • आंकड़ों के मुताबिक भारतीयों में विटामिन B12 की कमी एक 'साइलेंट हेल्थ क्राइसिस'है, जो लगभग 47% से 51% आबादी को प्रभावित करती है। 
  • इसी तरह अनुमान के अनुसार, लगभग 37% आबादी फोलेट की कमी से प्रभावित है। 

इन पोषक तत्वों की कमी थकान, कमजोरी, चक्कर आने, हाथ-पैरों में झनझनाहट से लेकर कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। विटामिन-बी12 और फोलेट की कमी शरीर को कैसे प्रभावित करती है और इसका पुरुषों-महिलाओं पर क्या असर होता है, इसको लेकर हालिया अध्ययन में कई जरूरी बातें सामने आई हैं। आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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पोषक तत्वों की कमी - फोटो : Freepik.com
विटामिन B12 और फोलेट की कमी

जापान की ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी ने एक हालिया अध्ययन में बताया कि विटामिन बी12 और फोलेट (विटामिन बी9) की कमी का संबंध खून में होमोसिस्टीन के बढ़े हुए स्तर से है। ये पुरुषों में गंभीर रूप से शारीरिक थकान और महिलाओं में मोटिवेशन की कमी का कारण बन सकती है।
 
  • अध्ययन की मुख्य शोधकर्ता हिरोकी कानौची कहती हैं, स्वस्थ लोगों में विटामिन बी12, फोलेट और थकान के बीच पाया गया ये संबंध अपनी तरह की पहली रिपोर्ट है। 
  • खून में होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ने को अभी तक से हृदय रोग, डिमेंशिया और फ्रैक्चर के खतरे से जोड़कर देखा जाता रहा था। 
  • हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि भविष्य में थकान और मोटिवेशन पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि होमोसिस्टीन एक प्रकार का अमीनो एसिड है जो शरीर में प्रोटीन के पचने के दौरान बनता है। शरीर में इन विटामिनों की कमी से इसका स्तर बढ़ जाता है, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
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कमजोरी-थकान की समस्या - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

'न्यूट्रिएंट्स' जर्नल में प्रकाशित यह रिपोर्ट खान-पान में होने वाली गड़बड़ी के कारण पोषण की समस्याओं और पानी में घुलनशील विटामिन की कमियों पर केंद्रित थी। शोधकर्ताओं ने फोलेट और विटामिन बी12 की कमी को थकान से जोड़ा और अपना अध्ययन होमोसिस्टीन पर केंद्रित किया।
 
  • 600 से ज्यादा स्वस्थ जापानी प्रतिभागियों में होमोसिस्टीन, फोलेट और विटामिन बी12 मापी गई। प्रतिभागियों में थकान और मोटिवेशन का आकलन किया गया। 
  • शुरुआती परिणामों से पता चला कि जिन लोगों के खून में होमोसिस्टीन का स्तर ज्यादा था, उनमें विटामिन B12 और फोलेट का स्तर कम था, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं।
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पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com
विटामिन बी12 और फोलेट की कमी कैसे पूरी करें?

विटामिन-बी12 शरीर में रेड ब्लड सेल्स बनाने, डीएनए सिंथेसिस और नसों को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व माना जाता है।

वहीं फोलेट यानी विटामिन बी9 शरीर में नई कोशिकाएं बनाने और स्वस्थ रक्त निर्माण के लिए जरूरी पोषक तत्व है। यह खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भ्रूण के दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड के विकास में इसकी अहम भूमिका होती है।
 
  • बी12 की पूर्ति के लिए  मुख्य रूप से दूध, दही, अंडा, मछली, चिकन और मीट खाने की सलाह दी जाती है।
  • फोलेट की पूर्ति के लिए पालक, मेथी, ब्रोकली, चना, राजमा, दालें, मूंगफली और खट्टे फलों का सेवन फायदेमंद माना जाता है।


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स्रोत:
Associations of Plasma Homocysteine Reflecting Vitamin B12 and Folate Status with Fatigue-Related Outcomes in Healthy Adults


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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