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Ebola Outbreak: इबोला संकट के बीच भारत की जय-जय, जानिए अभी देश में कैसे हैं हालात और कितने केस

Thu, 28 May 2026 07:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में भी इबोला को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। बेंगलुरु और गुजरात में दो संदिग्ध मामलों की खबरों ने लोगों को डरा दिया है। दूसरी ओर भारत ने एक बार फिर से प्रभावित देशों के लिए मदद की हाथ बढ़ाई है जिसकी खूब तारीफ हो रही है।
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इबोला संकट-भारत में कितना खतरा? - फोटो : Amarujala.com/AI
इबोला संक्रमण इन दिनों खूब चर्चा में है। कांगो-यूगांडा जैसे अफ्रीकी देश इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, वहां स्थिति और भी गंभीर रूप लेते जा रही है। यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों में कुल मिलाकर 1,198 मामले (128 पुष्ट और 1,077 संदिग्ध) सामने आए हैं। इसके अलावा करीब 228 संदिग्ध मौतें भी दर्ज की गई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) लगातार इस बढ़ते खतरे पर अपनी नजर बनाए हुए है। संक्रमण की रोकथाम को लेकर हालिया अपडेट में युगांडा ने कांगो के साथ अपनी सीमा बंद करने की घोषणा कर दी है।

जारी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के बीच भारत में भी इबोला के खतरों को लेकर सुगबुगाहट देखी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में अब तक दो संदिग्ध मामले रिपोर्ट किए गए हैं। ये मामले बंगलूरू और गुजरात में देखे गए। संदिग्ध मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने हवाई अड्डों पर निगरानी, यात्रियों की मॉनिटरिंग और क्वारंटाइन के उपायों को और तेज कर दिया है, अच्छी बात ये है कि देश में अब तक इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। 

इबोला के जारी जोखिमों के बीच एक बार फिर से भारत के जय-जय हो रही है। आखिर क्यों और भारत को संक्रमण के खतरों को लेकर कितना सावधान हो जाने की जरूरत है, आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
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भारत ने प्रभावित देशों को भेजी मेडिकल मदद - फोटो : X @AfricaCDC
मुसीबत में भारत की मदद को लेकर जय-जय

कोविड महामारी के दौरान जिस तरह भारत ने दुनिया के कई देशों को दवाइयां, वैक्सीन और मेडिकल सहायता पहुंचाकर 'फॉर्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' की पहचान बनाई थी, उसी तरह अब इबोला संकट के बीच भी भारत मदद के लिए आगे आया है। 

 
 
  • अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका सीडीसी) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के प्रकोप के बीच आपातकालीन दवाइयों की सप्लाई के लिए भारत का आभार व्यक्त किया। 
  • सीडीसी ने बताया कि भारत ने इस गंभीर वक्त में जरूरी डायग्नोस्टिक्स, थेराप्यूटिक्स, इन्फेक्शन की रोकथाम और नियंत्रण का सामान और दूसरी चीजें उपलब्ध कराई हैं जो काफी मददगार हैं। 
  • इन चीजों को जरूरत वाली जगहों पर पहुंचाया जा रहा है, जिससे जरूरतमंदों की जांच आसान होगी और संक्रमण का समय पर पता लगाना भी आसान होगा।
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बंगलूरू में इबोला का अलर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारत में संक्रमण को लेकर क्या अपडेट है?

ताजा जानकारियों के मुताबक देश में इबोला के दो संदिग्धों की पहचान की गई है। 
 
  • बंगलूरू में इबोला के संदेह वाली 28 वर्षीय एक युगांडा की महिला को आइसोलेशन में रखा गया था, जांच में इसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है।
  • दूसरा संदिग्ध गुजरात में सामने आया है। 37 वर्षीय यह व्यक्ति अफ्रीका और बांग्लादेश से यात्रा करने के बाद मुंबई पहुंचा था। कुछ लक्षण दिखने के बाद उसे भी आइसोलेट किया गया है। सैंपल जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे भेजा गया है और इसके नतीजे 24 से 48 घंटों में आने की उम्मीद है।
  • फिलहाल देश में संक्रमण को कोई भी पुष्ट केस नहीं है।

गौरतलब है कि अब तक के इतिहास में भारत में इबोला का कोई मरीज नहीं रहा है।  साल 2014 में पश्चिम अफ्रीका में फैले वैश्विक इबोला के जोखिमों के दौरान एकमात्र मामला 10 नवंबर, 2014 में सामने आया था। लाइबेरिया से लौटे 26 वर्षीय भारतीय नागरिक में एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के दौरान पुष्टि हुई थी। हालांकि उसे सफलतापूर्वक आइसोलेट कर ठीक कर लिया गया था और देश में इससे संबंधित संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया था।

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इबोला वायरस से बचाव की तैयारियां - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
संक्रमण की रोकथाम को लेकर क्या तैयारियां हैं?

अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट हेल्थ ऑर्गनाइजेशन  की टीमें प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों से सीधे संपर्क कर रही हैं और एहतियाती कदम के तौर पर, जिन लोगों में संक्रमण के हल्के लक्षण भी दिख रहे हैं, उन्हें भी आइसोलेशन में रखा जा रहा है। 

एक अधिकारी ने बताया प्रभावित देशों से आने वाले  अगर किसी भी व्यक्ति को हल्का सिरदर्द भी होता है, तो हम कोई जोखिम नहीं लेना चाहते और ऐसे लोगों को आइसोलेशन में रख रहे हैं। 

संदिग्ध लोगों के सैंपल जांच के लिए सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे भेजे जा रहे हैं।
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इबोला की वैक्सीन - फोटो : Amarujala.com/AI
रूस ने बना ली वैक्सीन

इन दिनों इबोला का बुंडिबुग्यो स्ट्रेन गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है। इससे बचाव के लिए कोई टीका या दवा नहीं है। 
 
  • इन जोखिमों के बीच रूस ने घोषणा की है कि उसके वैज्ञानिकों ने इबोला वायरस के एक नए स्ट्रेन के लिए वैक्सीन बना ली है, जो यूगांडा और कांगो में फैल रहे प्रकोप के खिलाफ असरदार हो सकती है। 
  • दक्षिण अफ्रीका में रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी देते हुए बताया कि स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने घोषणा की है कि रूसी वैज्ञानिकों ने इबोला के एक नए स्ट्रेन के खिलाफ एक वैक्सीन विकसित की है। 
  • गमालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पहले घरेलू उपयोग के लिए वेक्टर-आधारित टीके (GamEvac-Combi और GamEvac-Lyo) पंजीकृत किए हैं। 
  • इस वैक्सीन को मौजूद स्ट्रेन के खिलाफ 60-70% सुरक्षात्मक बताया गया है।


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स्रोत: 
The Democratic Republic of the Congo, 2026


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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