पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से दुनिया के तमाम देश कोरोना के गंभीर संक्रमण की चपेट में हैं। अब तक आई कोरोना की दो लहरों में 46.31 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।नोवेल कोरोना वायरस (सार्स-सीओवी-2) मुख्यरूप से श्वसन पथ को संक्रमित करने वाला वायरस है, जिसके कारण लोगों को तमाम तरह की गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं। कोरोना कोई पहला ऐसा वायरस नहीं है जो इंसानों में श्वसन संक्रमण का कारण बनता है। इससे पहले इन्फ्लूएंजा ए (आईएवी) और रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (आरएसवी) भी बड़ी संख्या में लोगों की जान ले चुके हैं। इन्फ्लूएंजा और सार्स-सीओवी-2 के अलावा अन्य वायरस का कोई टीका या प्रभावी उपचार भी नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर एक साथ दो अलग-अलग तरह के श्वसन वायरस का संक्रमण हो जाए तो शरीर पर इसका कितना गंभीर परिणाम हो सकता है?
इसी विषय को लेकर जांच कर रही स्कॉटलैंड स्थित ग्लासगो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने तमाम स्तर पर इसके प्रभावों को जानने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में पता लगाया कि एक साथ दो श्वसन वायरस के संक्रमण की स्थिति में कोशिकाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है, साथ ही इससे कितने गंभीर संक्रमण का खतरा हो सकता है? आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।