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रोचक: क्या हो अगर एक साथ दो श्वसन वायरस का हो जाए संक्रमण? जानिए अध्ययन में क्या पता चला

Sat, 11 Sep 2021 01:46 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दो अलग-अलग वायरस से संक्रमण (सांकेतिक) - फोटो : istock
पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से दुनिया के तमाम देश कोरोना के गंभीर संक्रमण की चपेट में हैं। अब तक आई कोरोना की दो लहरों में 46.31 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।नोवेल कोरोना वायरस (सार्स-सीओवी-2) मुख्यरूप से श्वसन पथ को संक्रमित करने वाला वायरस है, जिसके कारण लोगों को तमाम तरह की गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं। कोरोना कोई पहला ऐसा वायरस नहीं है जो इंसानों में श्वसन संक्रमण का कारण बनता है। इससे पहले  इन्फ्लूएंजा ए (आईएवी) और रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (आरएसवी) भी बड़ी संख्या में लोगों की जान ले चुके हैं। इन्फ्लूएंजा और सार्स-सीओवी-2 के अलावा अन्य वायरस का कोई टीका या प्रभावी उपचार भी नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर एक साथ दो अलग-अलग तरह के श्वसन वायरस का संक्रमण हो जाए तो शरीर पर इसका कितना गंभीर परिणाम हो सकता है?
इसी विषय को लेकर जांच कर रही स्कॉटलैंड स्थित ग्लासगो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने तमाम स्तर पर इसके प्रभावों को जानने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में पता लगाया कि एक साथ दो श्वसन वायरस के संक्रमण की स्थिति में कोशिकाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है, साथ ही  इससे कितने गंभीर संक्रमण का खतरा हो सकता है? आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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को-इंफेक्शन का बढ़ जाता है खतरा - फोटो : istock
सर्दी और बरसात के मौसम में खतरा अधिक
शोधकर्ताओं ने पाया कि कई कारणों से बरसात और सर्दी के समय में श्वसन संक्रमण का कारण बनने वाले वायरस अधिक प्रभावी हो जाते हैं। इन मौसमों में एक समय में एक से अधिक वायरस से संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है। इस स्थिति को को-इंफेक्शन के नाम से जाना जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मौसम में होने वाले 30 फीसदी संक्रमण को को-इंफेक्शन माना जा सकता है। 
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अध्ययन में सामने आई कई रोचक बातें - फोटो : Pixels
को-इफेक्शन से कोशिकाओं में क्या प्रतिक्रिया होती है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि इन्फ्लूएंजा वायरस में "एंटीजेनिक शिफ्ट" नामक प्रक्रिया को को-इफेक्शन का एक कारण माना जा सकता है। यह स्थिति दो अलग-अलग इन्फ्लूएंजा स्ट्रेनों के एक ही कोशिका के अंदर मिलने का कारण हो सकती है। ऐसी स्थिति में दोनों स्ट्रोनों में जीन का आदान-प्रदान हो सकता है जिससे एक नए वैरिएंट का जन्म होता है। मेडिकल की भाषा में इसे 'वायरस सेक्स' के नाम से भी जाना जाता है। को-इंफेक्शन के कारण शरीर पर होने वाले प्रभाव को जानने के लिए वैज्ञानिकों ने लैब में कोशिकाओं को आईएवी और आरएसवी वायरस से 
एक साथ संक्रमित किया। 

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को-इंफेक्शन के कारण हो सकती हैं गंभीर समस्याएं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
दोनों वायरस का मिला-जुला रूप
मानव फेफड़ों की कोशिकाओं पर किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि को-इंफेक्शन के कारण बने वायरस के नए वैरिएंट में आईएवी और आरएसवी दोनों की ही संरचनात्मक विशेषताएं मौजूद थीं। इसके अलावा वायरस कणों की सतह पर दोनों वायरस के प्रोटीन पाए गए और यहां तक कि कुछ में दूसरे के जीन भी थे। इस नए उत्परिवर्तित वायरस में उन कोशिकाओं को भी संक्रमित करने की क्षमता देखी गई जो सामान्यतौर पर इन्फ्लूएंजा के लिए प्रतिरोधी हो सकते थे। 
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नए वायरस को हो सकता है गंभीर असर - फोटो : Pixabay
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि को-इंफेक्शन की स्थित में लोगों में गंभीर लक्षण देखे जा सकते हैं। इस स्थिति से बचाव के लिए विशेष उपायों की भी आवश्यकता हो सकती है और रोगियों को ठीक होने में अधिक समय भी लग सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन के आधार पर वैक्सीन के निर्माण और रोग के उपचार के लिए निति निर्धारण में विशेष लाभ मिल सकता है। को-इंफेक्शन किस तरह से संक्रमण के प्रसार, बीमारी और प्रतिरक्षा को प्रभावित करता है? यह अब भी शोध का विषय है।


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स्रोत और संदर्भ: 
Generation of chimeric respiratory viruses with altered tropism by coinfection of influenza A virus and respiratory syncytial virus

अस्वीकरण नोट: यह लेख स्कॉटलैंड स्थित ग्लासगो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम द्वारा किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं। 
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