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Eye Care: रोजमर्रा की ये गलतियां आपकी आंखों को पहुंचाती हैं नुकसान, नहीं दिया ध्यान तो चली जाएगी रोशनी

Sun, 07 Sep 2025 09:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हम में से ज्यादातर लोग मोबाइल-टीवी या कंप्यूटर का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे घंटों तक करते रहते हैं, आंखों में जलन होने पर उसे रगड़ते हैं, बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स डाल लेते हैं। ये सब आदतें शुरुआत में छोटी लगती हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती हैं। 
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आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com
Eye Care Tips: हम सब चाहते हैं कि हमारी आंखें हमेशा साफ, चमकदार और स्वस्थ बनी रहें। लेकिन कई बार हमारी रोजमर्रा की आदतें ऐसी होती हैं जो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती हैं। आंखें ईश्वर का वरदान हैं, इन्हें स्वस्थ रखने के लिए हमें निरंतर प्रयास करते रहने की आवश्यकता होती है। अध्ययनों से पता चलता है कि लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण पूरे शरीर के साथ आंखों की सेहत पर भी असर हो सकता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए ये जरूरी है।

हम में से ज्यादातर लोग मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे घंटों तक करते रहते हैं, आंखों में जलन होने पर उसे रगड़ते हैं, बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स डाल लेते हैं। ये सभी आदतें शुरुआत में छोटी लगती हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती हैं। 

शोध बताते हैं कि इनसे आंखों की नमी कम होती है, लेंस और रेटिना पर असर पड़ता है और यहां तक कि स्थाई रूप से दृष्टि हानि का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी आंखों को लेकर सजग रहें। आइए जानते हैं कि किन कारणों से आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है और इससे बचाव के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं?
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आंखों की रोशनी कम होने के कारण - फोटो : Freepik.com
सभी लोगों के लिए जरूरी है आंखों की देखभाल

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी आंखें बहुत नाजुक और संवेदनशील होती हैं। यही कारण है कि इनकी देखभाल हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। कुछ आदतों को सुधारकर आप अपनी आंखों को सुरक्षित और स्वस्थ रख सकते हैं। अगर आपको आंखों में कोई परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

आंखों की नियमित जांच कराना आंखों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं। आइए जानते हैं इसके अलावा किन आदतों से बचाव करना जरूरी है।
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मोबाइल का अधिक इस्तेमाल हानिकारक - फोटो : Freepik.com
देर रात तक मोबाइल या टीवी देखना खतरनाक

आजकल लोग देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी पर समय बिताते हैं। शोध बताते हैं कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखें थक जाती हैं, सूखने लगती हैं और सिर दर्द भी होने लगता है।

अकादमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी की रिपोर्ट बताती है कि नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है जिससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है। नींद पूरी न होने से आंखों की मांसपेशियां आराम नहीं कर पातीं और धीरे-धीरे दृष्टि कमजोर होने लगती है।
  • स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से डिजिटल आई स्ट्रेन, ड्राई आई सिंड्रोम और धुंधला दिखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए 20-20-20 नियम अपनाएं– हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।

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खान-पान में गड़बड़ी का असर - फोटो : Freepik.com
अस्वस्थ खानपान का आंखों पर असर

अस्वस्थ खानपान के कारण भी आंखों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। आहार में पोषण की कमी, विशेष रूप से विटामिन-ए, सी और ई की कमी से आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि सभी लोगों को पौष्टिक चीजों का सेवन करना चाहिए।

हरी सब्जियां, गाजर, बादाम और मछली जैसे खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करें।
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बिना डॉक्टरी सलाह के न लें आंखों के लिए दवा - फोटो : freepik
बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल नुकसानदायक

कई लोग आंखों की जलन या लालिमा होने पर खुद से आई ड्रॉप्स का उपयोग करने लगते हैं, लेकिन यह आदत बहुत नुकसानदायक है। शोध बताते हैं कि बिना सलाह के इस्तेमाल की गई ड्रॉप्स में स्टेरॉयड हो सकते हैं जो अस्थाई राहत तो देते हैं, लेकिन लंबे समय में आंखों की नमी घटा देते हैं और ग्लूकोमा जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं। 

अमेरिकन ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसायटी’ के अनुसार स्टेरॉयड युक्त ड्रॉप्स का अति प्रयोग आंखों की दृष्टि को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।


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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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