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World Blood Donor Day: 1901 तक माना जाता था सभी का खून होता है समान, फिर कैसे आया ब्लड ग्रुप?

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Blood Group - फोटो : AmarUjala
शरीर को ठीक तरीके से काम करते रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में रक्त की आवश्यकता होती है। जिन लोगों में खून की कमी होती है उन्हें अक्सर थकान, कमजोरी, चक्कर आने सहित कई अन्य प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के भी बने रहने का खतरा होता है। हम सभी के शरीर में अलग-अलग ब्लड ग्रुप वाला खून होता है। इतना ही नहीं सगे भाई-बहनों का ब्लड ग्रुप भी अलग हो सकता है। कभी आपने सोचा, ये ब्लड ग्रुप आखिर होता क्या है? और किन पैमानों पर इसका निर्धारण किया जाता है कि आपका ग्रुप कौन सा है?

इस बारे में समझने से पहले हमें ये जानना जरूरी है कि रक्त कितने प्रकार के होते हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं- ब्लड ग्रुप आठ अलग-अलग प्रकार के होते हैं। आपका ब्लड ग्रुप कौन सा होगा ये आपके माता-पिता से विरासत में मिले जीन पर निर्भर करता है। अधिकांश लोगों के शरीर में लगभग 4-6 लीटर रक्त होता है और ये रक्त विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है।

है न मजेदार? जो खून देखने में आपको सिर्फ लाल रंग का नजर आता है, असल में उसके भीतर कई सारे 'राज' छिपे होते हैं, आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं? आखिर क्या है 'खून का राज'
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blood - फोटो : istock
ब्लड ग्रुप्स और उनके कार्य

हमारे खून में कई तरह के सेल्स होते हैं और इनके कार्य भी काफी महत्वपूर्ण हैं। जैसे रेड ब्लड सेल्स शरीर के विभिन्न ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं, व्हाइट ब्लड सेल्स संक्रमण की स्थिति में रोगजनकों को नष्ट करती हैं। रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स आपके खून को जमने में मदद करते हैं वहीं प्लाज्मा प्रोटीन से बना एक तरल पदार्थ है।

अब वापस उसी सवाल पर आते हैं कि ब्लड ग्रुप को क्या चीजें अलग बनाती हैं, कैसे इनका निर्धारण किया जाता है?
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ब्लड ग्रुप की जांच कैसे की जाती है? - फोटो : Pixabay
ब्लड ग्रुप का निर्धारण

जो चीज आपके रक्त को किसी और के रक्त से अलग बनाती है, वह है प्रोटीन अणुओं का अनूठा संयोजन- जिन्हें एंटीजन और एंटीबॉडी कहा जाता है। एंटीजन लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर होते हैं जबकि एंटीबॉडीज आपके प्लाज्मा में मौजूद होती हैं। इन्हीं एंटीजन और एंटीबॉडी के आधार पर ही निर्धारित होता है कि आपका ब्लड ग्रुप कौन सा है?

चार प्रमुख रक्त समूह हैं- ब्लड ग्रुप ए, बी, एबी और ओ। इनमें एंटीजन और एंटीबॉडी  की जांच की जाती है। 
  • ब्लड ग्रुप ए में ए एंटीजन और बी एंटीबॉडी। 
  • ब्लड ग्रुप बी में बी एंटीजन और ए एंटीबॉडी है।
  • ब्लड ग्रुप एबी में ए और बी एंटीजन हैं लेकिन न तो ए और न ही बी एंटीबॉडी हैं।
  • वहीं ब्लड ग्रुप ओ  में ए या बी एंटीजन तो नहीं होते हैं लेकिन दोनों एंटीबॉडी होते हैं।

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Blood Group - फोटो : iStock
क्यों है इन ब्लड ग्रुप्स की जरूरत?

अब सवाल उठता है कि इन ग्रुप्स के वबाल में पड़ना क्यों है, आखिर इनकी जरूरत ही क्या है? शरीर में खून तो है न बात खतम।

मामला है साल 1901 का जब पहली बार कार्ल लैंडस्टीनर नामक ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिक ने ब्लड ग्रुप्स की खोज की थी। इससे पहले, डॉक्टर्स को भी लगता था कि सभी रक्त एक समान होते हैं, हालांकि इस दौरान अगर किसी की ब्लड डोनेट किया जाता था तो ज्यादातर रिसीवर्स की मौत हो जाती। कार्ल लैंडस्टीनर ने फिर पता लगाया कि खून भले ही दिखने में एक जैसे होते हैं पर इनमें बहुत अंतर है।

अगर ए ब्लड ग्रुप वाले को बी ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ा दिया जाए तो इससे फायदे की जगह कई गंभीर नुकसान हो सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ट्रांसफ़्यूजन प्राप्त करने वाले व्यक्ति में एंटीबॉडी होते हैं जो ब्लड डोनेट रक्त की कोशिकाओं से मुकाबले में लग जाते हैं और इससे विषाक्त होने का जोखिम रहता है।
 
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खून की जांच - फोटो : istock
ओ ब्लड ग्रुप यूनिवर्सल डोनर

यही कारण है कि जब किसी को खून की जरूरत होती है तो उसके ब्लड ग्रुप के अनुसार ही डोनर्स ढूंढा जाता है। हालांकि इसमें भी एक सहूलियत जरूर है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों का ब्लड ग्रुप टाइप ओ निगेटिव है, वह आपात स्थिति में या सटीक ब्लड ग्रुप न मिलने की स्थिति में किसी को भी ब्लड डोनेट करके उसकी जान जान बचा सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि टाइप ओ निगेटिव रक्त कोशिकाओं में ए, बी या आरएच एंटीजन के प्रति एंटीबॉडी होती ही नहीं है। यही कारण है कि टाइप ओ-निगेटिव वालों को यूनिवर्सल डोनर भी कहा जाता है।

तो अब समझ गए न क्या है 'खून का राज'? 



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स्रोत और संदर्भ
Blood types

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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