प्रदूषण का फेफड़ों पर असर
- फोटो : Adobe Stock
वायु प्रदूषण से होने वाला खतरा
अध्ययनों से पता चलता है कि केवल धूम्रपान ही नहीं, बढ़ता प्रदूषण भी फेफड़ों के लिए ठीक नहीं है। हवा में मौजूद पीए2.5, धूल, धुआं और जहरीली गैसें सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंचती हैं। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से फेफड़ों में सूजन, सांस लेने में दिक्कत, अस्थमा और क्रॉनिक लंग डिजीज का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों पर इसका असर और अधिक होता है।
रसायनों के संपर्क में तो नहीं रहते हैं आप?
निर्माण कार्य, फैक्ट्री, खदान, सीमेंट, कपड़ा उद्योग या कृषि जैसे कई पेशों में काम करने वाले लोग रोजाना धूल और रसायनों के संपर्क में आते हैं। यदि उचित सुरक्षा उपकरण नहीं पहने जाएं, तो ये कण धीरे-धीरे फेफड़ों में जमा होकर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ऐसे कार्यस्थलों पर हमेशा प्रमाणित सुरक्षा मास्क और अन्य सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए।