एनस्थीसिया की प्रक्रिया
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कैसे शरीर हो जाता है सुन्न ?
एनस्थीसिया की दवाएं इस तरह से तैयार की जाती हैं कि वे बहुत तेजी से रक्त के माध्यम से दिमाग या नसों तक पहुंच सकें। जब दवा नस में दी जाती है, तो वह कुछ ही सेकंड में रक्त प्रवाह के जरिए दिमाग तक पहुंच जाती है। जिससे वह संकेत रुक जाते हैं जो हमें दर्द का एहसास दिलाते हैं।
एक तय समय के बाद जब दवा का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है तो मरीज को होश आ जाती है और सर्जरी का दर्द भी महसूस हो सकता है।
एनेस्थीसिया के साइड-इफेक्ट्स भी जानिए
एनेस्थीसिया की सबसे डरावनी जटिलताओं में से एक है 'एनेस्थीसिया अवेयरनेस', यानी सर्जरी के दौरान होश में आ जाना। वैसे तो ये बहुत दुर्लभ है पर कुछ स्थितियों में ऐसा हो सकता है।
इस तरह के खतरे से बचने के लिए ऑपरेटिंग रूम में ऐसी खास मशीनें होती हैं जो ब्रेन वेव्स (दिमाग की तरंगों) पर नजर रखती हैं और अगर आप जागने लगते हैं तो एनेस्थीसिया टीम को अलर्ट कर देती हैं। आपकी टीम एनेस्थीसिया की डोज को एडजस्ट कर सकती है ताकि आपको होश न आए।
एनेस्थीसिया वैसे तो काफी सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। एनेस्थीसिया के बाद कुछ तरह की समस्याएं जैसे गले में खराश, जी मिचलाना और उल्टी, कंफ्यूजन,मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगने या कंपकंपी, सिरदर्द जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
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स्रोत:
Anesthesia
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