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Alert: खून गाढ़ा होने से शरीर में क्या होता है? किन लोगों में इसका खतरा और आप कैसे रहें सुरक्षित, जानिए सबकुछ

Sat, 08 Aug 2026 05:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

खून का सामान्य से अधिक गाढ़ा होना कई कारणों से हो सकता है। शरीर में पानी की कमी, धूम्रपान, मोटापा, लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, कुछ बीमारियां और खून से जुड़ी स्थितियां इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इससे ब्लड क्लॉट बनने का खतरा बढ़ सकता है, जो गंभीर स्थिति में नसों, फेफड़ों, दिल या मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है।
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खून गाढ़ा होने की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
खून का गाढ़ा होना एक गंभीर समस्या है, आपने अपने आसपास के कई लोगों में भी इस समस्या के बारे में सुना होगा। इसके लिए लोग तरह-तरह की दवाएं भी खाते हैं, पर क्या वास्तव में खून गाढ़ा हो जाता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खून गाढ़ा होने का मतलब रक्त का प्रवाह सामान्य से धीमा होना या खून का चिपचिपा हो जाना है। इसे मेडिकल भाषा में हाइपरकोएगुलेबिलिटी या हाइपरविस्कॉसिटी सिंड्रोम कहते हैं। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं या प्रोटीन बढ़ जाते हैं, जिससे नसों में खून के थक्के (ब्लड क्लॉट) जमने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार शरीर में पानी की कमी होने से खून के तरल हिस्से की मात्रा कम हो जाती है और रक्त अधिक कंसंट्रेट दिखाई दे सकता है। ये स्थिति कई तरह की दिक्कतों को बढ़ाने वाली मानी जाती है।

डॉक्टर कहते हैं, चिंता की बात यह है कि कम उम्र वालों में भी ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं। कम उम्र में ब्लड क्लॉट होने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक, लकवा सहित कई अन्य तरह की दिक्कतों का जोखिम हो सकता है। आइए जान लेते हैं कि खून में गाढ़ापन आखिर होता क्यों है और इसके खतरे को कैसे कम किया जा सकता है?
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खून का गाढ़ापन - फोटो : Freepik.com
आखिर खून गाढ़ा क्यों होने लगता है?

क्या आपको अक्सर थकान, सिरदर्द या पैरों में झनझनाहट महसूस होती है? डॉक्टर कहते हैं, हो सकता है कि आपके खून का गाढ़ापन बढ़ गया हो।
 
  • डॉक्टर बताते हैं, खून गाढ़ा होने के पीछे कोई एक ही कारण नहीं होता। अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो रक्त का तरल हिस्सा कम हो जाता है और खून में गाढ़ापन बढ़ सकता है। 
  • इसी तरह कुछ लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या असामान्य रूप से बढ़ने के कारण भी खून गाढ़ा हो जाता है। इस समस्या को मेडिकल की भाषा में एरिथ्रोसाइटोसिस कहा जाता है। 

लंबे समय तक निष्क्रिय रहना, पानी कम पीना, मोटापा और धूम्रपान जैसी स्थितियां इसके खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। इसके अलावा सर्जरी, गंभीर चोट, कुछ हार्मोनल दवाएं, गर्भावस्था और प्रसव के आसपास का समय भी खून में गाढ़ापन और ब्लड क्लॉटिंग का खतरा बढ़ा सकता है।
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खून गाढ़ा होने की समस्या - फोटो : Adobe
 खून गाढ़ा होने से क्या दिक्कतें होती हैं?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अगर खून गाढ़ा हो जाए तो इससे खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है। यह थक्का शरीर की किसी नस या धमनी में रक्त के सामान्य प्रवाह को बाधित कर सकता है।
 
  • पैर की गहरी नस में क्लॉट बनने पर डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा रहता है। इसमें पैर में सूजन, दर्द जैसी दिक्कत बनी रहती है सकता है। समस्या तब गंभीर हो सकती है जब थक्का टूटकर खून के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाए। इससे पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने का डर रहता है जो जानलेवा भी हो सकती है।
 
  • इसके अलावा यदि थक्का किसी धमनी में रक्त प्रवाह को बाधित करता है, तो शरीर के अलग-अलग अंग प्रभावित हो सकते हैं। मस्तिष्क की रक्त वाहिका में बनने वाला थक्का स्ट्रोक का कारण बन सकता है।

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लंबे समय तक बैठने के खतरे - फोटो : Adobe Stock
किन लोगों में ये दिक्कत ज्यादा देखी जाती है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खून में गाढ़ापन और इससे थक्के बनने का खतरा किसी को भी हो सकता है।
 
  • लंबे समय तक बैठे रहना, लंबी यात्रा करना, सर्जरी, गंभीर चोट और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण जोखिम अधिक हो सकता है।
  • मोटापा और धूम्रपान भी इसका खतरा बढ़ा देते हैं।
  • कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों के चलते भी ब्लड क्लॉटिंग की समस्या अधिक देखी जाती रही है।
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नियमित व्यायाम से कम होता है खून का गाढ़ापन - फोटो : Adobe Stock
खून गाढ़ा होने का खतरा कैसे कम करें?

डॉक्टर कहते हैं, खून के गाढ़ापन और थक्का बनने की समस्या से बचने के लिए लंबे समय तक लगातार निष्क्रिय रहने से बचना सबसे जरूरी है। 
 
  • यदि आपका काम लंबे समय तक बैठने वाला है, तो बीच-बीच में उठकर चलना मददगार हो सकता है। लंबी यात्रा के दौरान भी समय-समय पर चलना-फिरना और पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण है।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद करती है और नसों की सेहत को ठीक रखने में मदद करती है।
  • मोटापा के शिकार लोगों में ब्लड क्लॉटिंग का जोखिम अधिक होता है, इसलिए वजन को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी माना जाता है।
  • धूम्रपान छोड़ना, खूब पानी पीते रहना भी आपको गंभीर समस्याओं से बचाए रखने में मदद कर सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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