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Diabetes & Fatty Liver: डायबिटीज वाले 70% मरीजों में फैटी लिवर का खतरा, जानिए इसका कारण और बचाव के तरीके

Sat, 08 Aug 2026 04:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर को प्रभावित नहीं करती, बल्कि लिवर की सेहत पर भी असर डाल सकती है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस वाले लोगों में लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने का खतरा बढ़ जाता है। समय रहते वजन, खानपान, शारीरिक गतिविधि और ब्लड शुगर को नियंत्रित करके इस जोखिम को कम किया जा सकता है।

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डायबिटीज और फैटी लिवर - फोटो : Amarujala.com/AI
डायबिटीज का नाम सुनते ही हमारे मन में सबसे पहला ख्याल हाई ब्लड शुगर का आता है। इस बीमारी में खून में ग्लूकोज की मात्रा जरूर बढ़ जाती है, पर इसका प्रभाव बस यहीं तक सीमित नहीं है। डायबिटीज पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसका असर शरीर के कई अन्य अंगों पर भी पड़ सकता है। कई अध्ययनों से ये साफ होता है कि हाई ब्लड शुगर आपकी आंखों, किडनी, नसों और हृदय से जुड़ी समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।

पर क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों में लिवर की समस्याओं का खतरा भी काफी ज्यादा होता है। विशेषतौर पर शुगर के मरीजों में लिवर में जमा होने वाली चर्बी यानी फैटी लिवर का खतरा काफी ज्यादा देखा जाता रहा है। 

फैटी लिवर की समस्या पहले से ही वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ शुगर के मरीजों को लिवर की सेहत को लेकर भी निरंतर गंभीरता से ध्यान देते रहने की सलाह दे रहे हैं। आइए जानते हैं कि डायबिटीज वाले मरीजों में ये बीमारी क्यों बढ़ रही है?
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डायबिटीज के खतरे - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज और एमएएसएलडी का खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में लगभग 70 प्रतिशत तक को नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) हो सकता है। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज को अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) के नाम से जाना जाता है।

डॉक्टर कहते हैं, सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि फैटी लिवर की शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई देता। यानी व्यक्ति को डायबिटीज तो पता होती है, लेकिन लिवर में धीरे-धीरे फैट जमा हो रहा है, इसका उसे अंदाजा तक नहीं होता। यही कारण है कि समय के साथ उनमें दिक्कतें बढ़ती जाती हैं और बीमारी का पता काफी बाद में चल पाता है।

अब सवाल ये है कि डायबिटीज वालों को ये दिक्कत होती क्यों है?
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लिवर में फैट बढ़ने का जोखिम - फोटो : Adobe Stock Images
डायबिटीज के कारण फैटी लिवर क्यों होता है?

एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ आरिफ खान बताते हैं, डायबिटीज और फैटी लिवर के लिंक को समझने के लिए इंसुलिन रेजिस्टेंस को समझना जरूरी है। 
 
  • टाइप-2 डायबिटीज में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं। इससे ब्लड में ग्लूकोज बढ़ने लगता है। 
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस केवल ब्लड शुगर को प्रभावित नहीं करता, बल्कि शरीर के फैट मेटाबॉलिज्म पर भी असर डालता है।
  • जब शरीर में मेटाबॉलिक गड़बड़ी होती है, तो लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया बढ़ सकती है। 
  • यही कारण है कि फैटी लिवर की समस्या के लिए टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा, बेली फैट, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और मेटाबॉलिक सिंड्रोम को प्रमुख माना जाता है।
  • डॉक्टर कहते हैं, मरीजों में जितने अधिक मेटाबॉलिक जोखिम होते हैं, उनमें लिवर की समस्या होने का खतरा उतना अधिक हो सकता है।

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फैटी लिवर से बचाव के लिए हेल्दी डाइट - फोटो : Freepik.com
डाइट में गड़बड़ी से बढ़ती है दिक्कत

डॉ आरिफ बताते हैं, एमएएसएलडी का एक बड़ा कारण खानपान में गड़बड़ी भी है।  हाई कैलोरी वाला आहार, शारीरिक गतिविधि की कमी और मीठी चीजें ज्यादा खाने से बढ़ने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा रहता है।

डायबिटीज के मरीजों में लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी के कारण जैसे-जैसे मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, खून में असामान्य फैट या शराब की आदत बढ़ती जाती है, इसी के साथ-साथ लिवर में फैट जमा होने का खतरा भी बढ़ने लग जाता है।

डॉक्टर कहते हैं,  फैटी लिवर को केवल एक सामान्य समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। लिवर में जमा फैट लंबे समय में  लिवर में फाइब्रोसिस यानी स्कार टिश्यू बनने का कारण बन सकती है। गंभीर फाइब्रोसिस आगे चलकर सिरोसिस में बदल सकता है, जिससे लिवर कैंसर तक हो सकता है।
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लिवर को कैसे स्वस्थ रखें? - फोटो : Adobe Stock
फैटी लिवर से बचने के लिए क्या करें?

डॉक्टर कहते हैं, फैटी लिवर के जोखिम को कम करने के लिए डायबिटीज के मरीजों को वजन कंट्रोल रखने के साथ, बेहतर खानपान और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना चाहिए। अधिक वजन या मोटापे वाले लोगों में धीरे-धीरे वजन कम करने से लिवर में जमा फैट कम हो सकता है। लगभग 3-5 प्रतिशत वजन कम होने से लिवर फैट में कमी देखी जा सकती है।
 
  • डायबिटीज के मरीजों को भोजन में हाई कैलोरी, मीठे पेय और ज्यादा शुगर वाले खाद्य पदार्थों को कम करना चाहिए। 
  • लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों जैसे हरी सब्जियों, साबुत अनाज और कुछ फलों को आहार में शामिल करें।
  • नियमित व्यायाम सबसे महत्वपूर्ण है। शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर में लाभ पहुंचा सकती है।
  • सबसे जरूरी बात अपने शुगर लेवल को कंट्रोल रखें। शुगर बढ़ने के कारण लिवर की दिक्कतें भी तेजी से बढ़ने लग जाती हैं।



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स्रोत:
Making New Connections to Address the Silent Epidemic of Nonalcoholic Fatty Liver Disease


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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