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सेहत का बात: हार्ट ही नहीं इन अंगों के लिए भी खतरनाक है हाई कोलेस्ट्रॉल, तुरंत करा लें जांच

Sat, 19 Oct 2024 05:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की स्थिति को सेहत के लिए कई प्रकार से हानिकारक माना जाता रहा है, इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव हृदय स्वास्थ्य पर देखा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हाई कोलेस्ट्रॉल के शिकार लोगों में हृदय रोग, हार्ट अटैक जैसी गंभीर और जानलेवा समस्याओं का खतरा काफी अधिक हो सकता है। सभी लोगों को नियमित अंतराल पर इसकी जांच और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने वाले उपाय करते रहना चाहिए।

कोलेस्ट्रॉल एक मोम और वसा जैसा पदार्थ होता है, अच्छे स्वास्थ्य के लिए इसकी सही मात्रा आवश्यक है। शरीर को कुछ प्रकार के हार्मोन्स, विटामिन-डी और भोजन को पचाने में मदद करने वाले पदार्थों को बनाने के लिए कोलेस्ट्रॉल की आवश्यकता होती है। हालांकि यदि आपके खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है तो इसके कई दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने के कारण प्लाक का जमाव होने लगता है। प्लाक के कारण धमनियां संकरी या अवरुद्ध हो सकती है। इस तरह की स्थिति रक्त के प्रवाह को बाधित कर देती है जिससे हृदय स्वास्थ्य पर गंभीर असर हो सकता है।

हालांकि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के दुष्प्रभाव सिर्फ हृदय रोगों तक ही सीमित नहीं हैं, इसका शरीर पर और भी कई तरह से नकारात्मक असर हो सकता है।
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय के लिए क्यों हानिकारक है?

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की स्थिति कई प्रकार से हृदय के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है। 

सबसे पहले हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण आपकी धमनियों में प्लाक बनने का खतरा रहता है, जो इसे संकीर्ण कर देती हैं। इस स्थिति में हृदय में रक्त का प्रवाह अवरुद्ध होने लगता है। हृदय तक सही तरीके से या निरंतर रक्त न पहुंचने के कारण सीने में दर्द या दिल का दौरा पड़ने का खतरा हो सकता है। 

हाई कोलेस्ट्रॉल शरीर में इंफ्लामेशन बढ़ाने वाली भी मानी जाती है, जिससे रक्त वाहिकाएं सख्त हो सकती हैं। इससे आपके हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे रक्तचाप बढ़ा रहता है। ब्लड प्रेशर बढ़े रहने के कारण भी हृदय रोगों का खतरा हो सकता है।
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मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
स्ट्रोक का भी बढ़ जाता है खतरा

हाई कोलेस्ट्रॉल के दुष्प्रभाव सिर्फ हृदय रोगों तक ही सीमित नहीं हैं, इसके कारण स्ट्रोक का भी जोखिम हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल के कारण बनने वाले प्लाक सिर्फ आपके दिल और उसके आस-पास की रक्त वाहिकाओं को ही प्रभावित नहीं करते हैं, वे मस्तिष्क तक जाने वाली कुछ धमनियों को भी संकीर्ण कर देते हैं। अगर मस्तिष्क तक रक्त ले जाने वाली कोई वाहिका पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाती है, तो आपको स्ट्रोक हो सकता है। स्ट्रोक और हार्ट अटैक दोनों को मौत के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है।

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डायबिटीज के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
बढ़ सकती हैं डायबिटीज की जटिलताएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है उन्हें कोलेस्ट्रॉल को लेकर और भी अलर्ट रहने की आवश्यकता होती है। हाई ग्लूकोज और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या आपके लिए कई तरह से जटिलताओं को बढ़ाने वाली मानी जाती है। डायबिटीज वाले लोगों में हृदय रोगों का खतरा भी अधिक होता है, इसलिए मधुमेह के शिकार लोगों को कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर दोनों को कंट्रोल में रखना जरूरी है।
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इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का खतरा - फोटो : Adobe stock
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के हो सकते हैं शिकार

हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण नपुंसकता बढ़ने का भी जोखिम देखा जाता रहा है। लंबे समय में, कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक रहने के कारण जननांग की छोटी रक्त वाहिकाओं के संकुचित होने का भी खतरा हो सकता है इससे इरेक्शन  प्राप्त करने में भी कठिनाई होती है। हाई कोलेस्ट्रॉल आपके हृदय और लिंग दोनों में रक्त के प्रवाह को बाधित कर सकती है, जिसके कारण इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का जोखिम हो सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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