बढ़ता वजन मौजूदा समय की सबसे गंभीर चिंताओं में से एक है। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, सभी इसका शिकार देखे जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, पिछले चार दशकों में दुनिया भर में मोटापे की दर लगभग तीन गुना बढ़ चुकी है। इस समस्या के लिए शहरीकरण, गड़बड़ जीवनशैली, जंक फूड का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों में कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। मोटापा केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का कारण भी है।
आंकड़ों के मुताबिक, हर साल लगभग 28 लाख लोगों की मौत मोटापे से जुड़ी बीमारियों के कारण हो जाती है। मोटापा शरीर में सूजन (क्रॉनिक इंफ्लेमेशन) को बढ़ाता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है। यही कारण है कि मोटे लोगों में डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा ज्यादा होता है।
इस बढ़ती समस्या से निपटने के लिए हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने कई ऐसी कारगर दवाएं बनाने का दावा किया है जो मोटापे और बढ़ते वजन की समस्या को कम करने में मददगार हो सकती हैं। पर क्या वास्तव में ये दवाएं असरदार हैं?