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Women Health: महिलाएं कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल? गायनेकोलॉजिस्ट ने दी 5 जरूरी सलाह

Sun, 11 Jan 2026 08:38 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • महिला रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स को लेकर शर्म या चुप्पी महिला सेहत की सबसे बड़ी दुश्मन है। अनियमित पीरियड्स, बहुत ज्यादा दर्द, अत्यधिक ब्लीडिंग या लंबे समय तक पीरियड्स रहना किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है,
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महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Freepik.com
लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। महिलाओं की सेहत पर भी इसका सीधा असर देखा जा रहा है। लिहाजा कम उम्र में ही कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं। हार्मोनल असंतुलन, अनियमित पीरियड्स, थायरॉइड, एनीमिया, डायबिटीज, हृदय रोग और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं आजकल आम होती जा रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। शारीरिक गतिविधि की कमी, पोषक तत्वों की अनदेखी, नींद की कमी और समय पर स्वास्थ्य जांच न कराना महिलाओं को बीमार करती जा रही है। महिलाओं में एनीमिया रोग काफी आम है, आहार में आयरन की कमी इसका मुख्य कारण है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। इसके अलावा हार्मोनल असंतुलन के कारण पीसीओएस, थायरॉइड और अनियमित पीरियड्स की समस्या बढ़ रही है। 

महिलाओं की सेहत ठीक रहे और वे गंभीर रोगों से बच सकें इसके लिए महिला रोग विशेषज्ञ ने कुछ जरूरी टिप्स दिए हैं, आइए इस बारे में जानते हैं।
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महिलाओं में होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?

जानी मानी गायनेकोलॉजिस्ट डॉ शिखा शर्मा कहती हैं,  गलत खानपान, जंक फूड का अधिक सेवन, तनाव और नींद की कमी महिलाओं के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है। लंबे समय तक तनाव रहने से हृदय रोग और डायबिटीज का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। इतना ही नहीं भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर का भी जोखिम देखा जा रहा है।

इन समस्याओं से बचाव के लिए आइए जानते हैं कि आप क्या उपाय कर सकती हैं?
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नियमित हेल्थ चेकअप कराएं - फोटो : Adobe Stock
1. नियमित रूप से कराएं हेल्थ चेकअप

महिला रोग विशेषज्ञों के अनुसार हर महिला को साल में कम से कम एक बार डॉक्टर की सलाह पर हेल्थ चेकअप जरूर कराना चाहिए। 
  • समय पर जांच से ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर, ओवेरियन सिस्ट या हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं का पता चल जाता है।
  • 30 की उम्र के बाद इन जांचों की अहमियत और बढ़ जाती है। 

2. मासिक धर्म को समझें, उसे छुपाएं नहीं

पीरियड्स को लेकर शर्म या चुप्पी महिला सेहत की सबसे बड़ी दुश्मन है। अनियमित पीरियड्स, बहुत ज्यादा दर्द, ज्यादा ब्लीडिंग या लंबे समय तक पीरियड्स रहना किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
  • पीरियड्स की समस्याओं के कारण पीसीओएस, थायरॉइड या हार्मोनल गड़बड़ी का खतरा होता है।
  • सही जानकारी और खुलकर बात करने से न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक सेहत भी बेहतर होती है।
     

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पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com
3. आहार में आयरन पर दें विशेष ध्यान

महिलाओं में एनीमिया यानी खून की कमी एक आम समस्या है, जिसका मुख्य कारण आयरन की कमी होता है। 
  • विशेषज्ञों के अनुसार हर महिला को अपने आहार में आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड और प्रोटीन जरूर शामिल करना चाहिए। 
  • हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, अनार, दालें, गुड़ और सूखे मेवे आयरन के अच्छे स्रोत हैं। 

4. मानसिक स्वास्थ्य को न करें अनदेखा

महिला रोग विशेषज्ञ कहती हैं सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सावधानी बरतते रहना जरूरी है।
  • तनाव, चिंता और डिप्रेशन का सीधा असर हार्मोन, पीरियड्स और प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। 
  • लंबे समय तक तनाव रहने से पीसीओएस, अनिद्रा और वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है। 
  • मेंटल हेल्थ को ठीक रखने के लिए योग, ध्यान, वॉक करें और शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं।
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महिलाएं अपनी सेहत का कैसे रखें ख्याल? - फोटो : Freepik.com
5. बीमारी के संकेतों को नजरअंदाज न करें
 
डॉक्टर कहती हैं कि शरीर खुद संकेत देता है कि आप बीमार तो नहीं हैं, बस उन्हें समझने की जरूरत है। 
  • असामान्य डिस्चार्ज, पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द, ब्रेस्ट में गांठ, अचानक वजन बढ़ना या घटना ये सभी संकेत किसी न किसी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
  • समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से इनका निदान और इलाज करके आप बड़ी बीमारियों से बची रह सकती हैं।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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