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ध्यान दें: क्या आपके भी हाथों की पकड़ हो गई है कमजोर? सावधान- ये जानलेवा बीमारियों का हो सकता है संकेत

Sun, 07 Aug 2022 02:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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क्या आपको भी जार खोलने में होता है दिक्कत? - फोटो : istock
क्या आपको भी कुछ समय से रोजमर्रा के काम को करने में असहजता महसूस होती है? अगर हां तो इस तरह के बदलावों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे कुछ बदलाव शरीर में पनप रही गंभीर और जानलेवा बीमारियों का संकेत भी हो सकते हैं।  हाथों की कमजोर होती पकड़ भी ऐसी ही एक समस्या है, क्या आपको भी टाइट बंद अचार के जार या डब्बों को खोलने में बहुत दिक्कत होती है। हाथों की पकड़ पहले की तुलना में कमजोर महसूस होती है, तो सावधान हो जाइए यह गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसी लक्षणों पर समय रहते विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

हाथों की कमजोर होती पकड़ किस तरह से शरीर में पनप रही गंभीर समस्याओं का संकेत होती है, इसे जानने के लिए वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया। इस दौरान पाया गया कि पहले की तुलना में जिन लोगों को अब टाइट बंद अचार के जार खोलने, पानी से भरे बर्तन को पकड़े रहने या फिर कई सारे शॉपिंग बैग एक साथ लेकर चलने में दिक्कत हो रही है, ऐसे लोगों में  हृदय रोग, कैंसर और अल्जाइमर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है। मतलब, वैज्ञानिकों ने बताया कि हाथों की कमजोर होती ग्रिप आपमें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती है, जिसपर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। 
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कमजोर होती पकड़ गंभीर समस्याओं का संकेत - फोटो : istock
हाथों की पकड़ में कमजोरी को लेकर अध्ययन

ऑस्ट्रिया स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एप्लाइड सिस्टम्स एनालिसिस के वैज्ञानिकों ने हाथ के पकड़ की ताकत और इसके आधार पर शरीर में बन रही बीमारियों के जोखिम को पता लगाने की कोशिश की। वैज्ञानिकों का कहना है कि हाथों की कमजोर होती पकड़ उम्र, लिंग और लंबाई पर निर्भर करती है, हालांकि यदि आपमें इस तरह की दिक्कत का अनुभव हो रहा है तो विशेष सावधान हो जाने की जरूरत है।

यदि आप अपने ही आयुवर्ग के अन्य लोगों की तुलना में हाथों की पकड़ में कमजोरी का अनुभव कर रहे हैं तो यह गंभीर और जानलेवा स्थितियों का संकेत हो सकता है। सभी लोगों को इस सामान्य सी जांच के आधार पर अपने खतरे के बारे में जरूर पता लगाना चाहिए।
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हाथों की पकड़ से जाने सेहत का हाल - फोटो : istock
उम्र और लिंग पर निर्भर करती है पकड़ की क्षमता

बीएमजे जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं का कहना है कि सामान्यतौर पर 20 साल की आयु में महिलाओं में हाथों के औसत पकड़ शक्ति 29 किलोग्राम और पुरुषों की 46 किलोग्राम तक मानी जाती है। यह 60 के उम्र तक आते आते  घटकर क्रमशः 23.5 किग्रा और 39 किग्रा हो जाती है। यदि अपने आयुवर्ग के मानक से आपकी पकड़ कमजोर हो रही है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। 

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हाथों की पकड़ और बीमारी का जोखिम - फोटो : iStock
हाथों की पकड़ में कमजोरी और बीमारी का जोखिम

समान उम्र और लिंग के लोगों की तुलना में अगर आपकी पकड़ कमजोर है तो इसे हृदय रोग की समस्याओं का संकेत माना जा सकता है। इसमें हार्ट फेलियर और हृदय के सामान्य कार्यों में समस्या का भी संकेत माना जा सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि कमजोर पकड़ वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में प्रोस्टेट, फेफड़े, स्तन और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा भी अधिक होता है।

इससे पहले, ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के एक अध्ययन से पता चला था कि जिन लोगों को हाथों की पकड़ शक्ति मजबूत होती है उनमें अल्जाइमर रोग और डेमेंशिया का जोखिम कम होता है।
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हाथों की कमजोर होती ताकत पर ध्यान दें - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को टाइप-2 डायबिटीज या मोटापे की समस्या होती है, उनमें समय के साथ पकड़ कमजोर होती जाती है। यह बहुत कुछ तंत्रिकाओं के कार्यक्षमता पर निर्भर करता है। पकड़ कमजोर होना हाथों की समस्या या चोट जैसे कारणों की वजह से भी हो सकता है, ऐसे में हर बार इसको लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। हां, पर पकड़ की खुद से जांच करके आप शरीर की समस्याओं का अंदाजा जरूर लगा सकते हैं। 


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स्रोत और संदर्भ
Thresholds for clinical practice that directly link handgrip strength to remaining years of life: estimates based on longitudinal observational data

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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