फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हेल्थ अलर्ट: क्या विटामिन-डी की कमी भी आपकी प्रजनन क्षमता पर डाल सकती है असर? यहां जानिए

Mon, 26 Oct 2026 07:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विटामिन-डी हड्डियों के साथ प्रजनन स्वास्थ्य में भी भूमिका निभाती है। इसकी कमी महिलाओं में पीएमओएस और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी देखी गई है। सही जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
विज्ञापन
1 of 4
विटामिन-डी सेहत के लिए जरूरी - फोटो : Amarujala.com/AI
विटामिन-डी को हड्डियों की मजबूती और शरीर में कैल्शियम के सही इस्तेमाल के लिए जरूरी माना जाता है। विटामिन-डी के सनसाइन विटामिन भी कहा जाता है, क्योंकि सूरज की रोशनी इसका प्रमुख स्रोत है। हालांकि चिंताजनक बात ये है कि भारत जैसे देश में जहां लगभग हर मौसम में सूर्य की पर्याप्त रोशनी रहती है, वहां भी लोगों में विटामिन-डी की कमी का खतरा तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है।

लोगों में बढ़ती इस विटामिन की कमी को स्वास्थ्य विशेषज्ञ साइलेंट महामारी बताते हैं, क्योंकि ये समय के साथ आपकी हड्डियों के अलावा सेहत को कई और तरह से भी प्रभावित करने वाली हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  विटामिन-डी की कमी का लिंक प्रजनन स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से भी पाया गया है।

ध्ययनों से पता चलता है कि शरीर में विटामिन-डी की कमी होने पर महिलाओं में ओव्यूलेशन यानी अंडाशय से अंडा निकलने की प्रक्रिया और कुछ हार्मोनल समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। पुरुषों की प्रजनन सेहत पर भी इस विटामिन की कमी का नकारात्मक असर हो सकता है।

आइए जानते हैं कि विटामिन-डी की कमी प्रजनन स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करने लगती है?
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 4
विटामिन-डी की कमी के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया कि विटामिन-डी की कमी किस तरह से तलाक की वजह बन गई। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि विटामिन-डी की कमी महिलाओं में ओव्यूलेशन के साथ-साथ पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता और प्रजनन से जुड़े खतरों को बढ़ाने वाली हो सकती है। 

महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर असर

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि विटामिन-डी की कमी प्रजनन क्षमता पर तो असर डाल सकती है पर ये बांझपन का सीधा कारण नहीं है।
 
  • विटामिन डी एक हार्मोन की तरह काम करता है और प्रजनन से जुड़े हार्मोन- जैसे प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्राडियोल और फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करता है। 
  • ये हार्मोन नियमित मासिक चक्र और ओव्यूलेशन (अंडे के बनने और निकलने की प्रक्रिया) के लिए आवश्यक होते हैं। 
  • विटामिन डी का स्तर कम होने पर एंटी-मुलेरियन हार्मोन (एएमएच) का स्तर भी कम हो जाता है और साथ ही अंडों की गुणवत्ता और संख्या पर भी बुरा असर पड़ता है।
विज्ञापन

3 of 4
प्रजनन की समस्याएं - फोटो : freepik.com
पुरुषों के शुक्राणुओं पर असर 

पुरुषों में विटामिन-डी के स्तर में कमी का शुक्राणुओं की गतिशीलता, संख्या तथा गुणवत्ता के बीच संबंध को जानने के लिए कई अध्ययन किए गए हैं। कुछ शोध में पाया गया कि विटामिन-डी की कमी स्पर्म क्वालिटी और मोटिलिटी में कमी का कारण बन सकती है।
 
  • विटामिन डी रिसेप्टर्स सीधे स्पर्म कोशिकाओं और वृषण के भीतर सर्टोली और लेडिग कोशिकाओं में पाए जाते हैं। ये कोशिकाएं स्पर्म के निर्माण (स्पर्मेटोजेनेसिस) और टेस्टोस्टेरोन के संश्लेषण को नियंत्रित करती हैं।
  • विटामिन डी शुक्राणु कोशिकाओं के भीतर कैल्शियम सिग्नलिंग को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे शुक्राणु की पूंछ को हिलने-डुलने और तैरने की शक्ति मिलती है।
  • ऐसे में विटामिन-डी की कमी का पुरुषों की फर्टिलिटी पर असर हो सकता है।
विज्ञापन

4 of 4
विटामिन-डी की कमी कैसे पूरी करें? - फोटो : Adobe Stock
विटामिन-डी की कमी कैसे ठीक करें?

शरीर में विटामिन-डी की स्थिति जानने के लिए आमतौर पर खून की जांच की जाती है। अगर आपमें इसका स्तर कम है तो खान-पान और लाइफस्टाइल में सुधार करें।
 
  • धूप में उचित समय बिताना, अंडे की जर्दी, फैटी मछलियां खाने और विटामिन-डी से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने से आपको मदद मिल सकती है। जरूरत होने पर डॉक्टर सप्लीमेंट दे सकते हैं। अगर आपमें लगातार विटामिन-डी की कमी बनी हुई है तो इसे ठीक करने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें