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Alert: कभी धूप, कभी बारिश! दिल्ली-एनसीआर में वायरल फीवर और डेंगू का बढ़ा खतरा; बरतें सावधानी

Thu, 14 Aug 2025 07:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर में कभी बारिश-कभी धूप वाला मौसम बना हुआ है, ये बीमारियों का घर हो सकता है जिसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए।
  • मौसम में बदलाव के साथ वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। रोजाना ओपीडी में आ रहे आधे से ज्यादा मरीजों में वायरल बुखार का निदान किया जा रहा है।
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मौसमी बुखार और डेंगू का खतरा - फोटो : Freepik.com
मानसून का ये सीजन राजधानी दिल्ली-एनसीआर में बीमारियों के खतरे को बढ़ाते जा रहा है। अस्पतालों से प्राप्त जानकारियों के मुताबिक पिछले तीन-चार हफ्तों में ओपीडी में बुखार, खांसी और शरीर में दर्द की शिकायत वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ज्यादातर मामलों में रोगियों में वायरल बुखार का निदान किया जा रहा है, हालांकि कुछ लोगों में टेस्ट के दौरान डेंगू और मलेरिया की समस्या का भी पता चल रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर में कभी बारिश-कभी धूप वाला मौसम बना हुआ है, ये बीमारियों का घर हो सकता है जिसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए।

वायरल फीवर और मच्छर जनित इन बीमारियों के अधिकतर लक्षण भी समान होते हैं, ऐसे में शुरुआत में इनमें फर्क करना भी कठिन रहता है। हालांकि डेंगू जैसी स्थितियों में निदान में देरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, जिसको लेकर सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।
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डेंगू-मलेरिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
ओपीडी में बढ़ रहे हैं बुखार वाले मरीज

हर दिन मौसम में हो रहा बदलाव लोगों को बीमार कर रहा है। स्थिति यह है कि अधिकतर लोग वायरल फीवर से परेशान हैं। डॉक्टर की सलाह पर डेंगू जांच भी करवा रहे हैं।

नोएडा स्थित जिला अस्पताल की लैब की रिपोर्ट के मुताबिक ओपीडी में आने वाले करीब 200 मरीजों में से 50 मरीजों में डेंगू जांच करवाई जा रही है। जांच में रोजाना एक-दो मरीज डेंगू पॉजिटिव आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जनवरी से अब तक जिले में डेंगू के 27 और मलेरिया के 35 मरीज मिल चुके हैं।
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बुखार और शरीर में दर्द की समस्या - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

जिला मलेरिया अधिकारी श्रुति कीर्ति वर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार जांच कर रही है। रोजाना टीम सुबह से ही फील्ड पर निकल रही है और विभिन्न सेक्टर और सोसाइटी जा रही है। जगह-जगह जलभराव मिलने पर डेंगू लार्वा का पता किया जा रहा है। ऐसे में एक दो मरीज रोजाना मिल रहे हैं। लार्वा मिलने पर कार्रवाई भी की जा रही है।

वहीं, जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रदीप कुमार शैलत ने बताया कि इन दिन बारिश होते ही मौसम में ठंडक आ जाती है और धूप निकलते ही उमस की वजह से गर्मी बढ़ जाती है। यही नहीं, रात के समय एसी और कूलर भी इन दिनों नुकसान कर रहा है।

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बुखार की स्थिति पर गंभीरता से दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
डेंगू और वायरल फीवर के लक्षणों वाले मरीजों के बढ़े आंकड़े

अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में एमडी मेडिसिन डॉ उत्कर्ष श्रीवास्तव बताते हैं, मौसम में बदलाव के साथ वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। रोजाना ओपीडी में आ रहे आधे से ज्यादा मरीजों में वायरल बुखार का निदान किया जा रहा है। समय पर इलाज शुरू करने पर बुखार वैसे तो तीन-चार दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन कई मरीज दवाएं खुद शुरू करते हैं या बीच में छोड़ दे रहे हैं जिससे उन्हें ठीक होने में अधिक समय लग सकता है।

इसके अलावा डेंगू और वायरल फीवर के कई लक्षण मिलते-जुलते होते हैं जिसमें खुद से अंतर कर पाना भी कठिन रहता है, इसलिए बुखार की समस्या पर गंभीरता से ध्यान देते रहना भी जरूरी है।
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मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम - फोटो : Freepik.com
वायरल फीवर और डेंगू में अंतर?

वायरल फीवर और डेंगू, दोनों ही बुखार से जुड़े रोग हैं, लेकिन इनके कारण और लक्षण अलग हो सकते हैं।
  • वायरल बुखार इन्फ्लुएंजा, एडेनोवायरस आदि के कारण होता है, जो हवा, संपर्क या संक्रमित सतहों से फैलते हैं। वहीं डेंगू एडीज एजिप्टी मच्छर से फैलाता है। वायरल फीवर में हल्का से मध्यम बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द, गले में खराश और खांसी जैसे लक्षण सामान्य हैं। ये बुखार अक्सर 3-5 दिन में कम हो जाता है।
  • वहीं डेंगू में अचानक तेज बुखार (102-105°F), तीव्र सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में तेज दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते और प्लेटलेट्स की संख्या में गिरावट जैसे गंभीर लक्षण दिखते हैं।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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