कोरोना की संभावित तीसरी लहर से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों से जल्द से जल्द टीकाकरण कराने की अपील की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में अबतक 30.90 लाख से अधिक लोगों को एक, जबकि 15.70 लाख लोगों को टीके की दोनों खुराक मिल चुकी हैं। लोगों को कोरोना से सुरक्षित रखने और संक्रमण की रफ्तार पर काबू पाने के लिए अब कई दफ्तरों ने भी कर्मचारियों के लिए वैक्सीनेशन कराना अनिवार्य कर दिया है। कई ऑफिस तो 'नो जैब-नो जॉब' नीति पर काम कर रहे हैं, यानी जबतक आपका टीकाकरण नहीं होगा तब तक आप काम शुरू नहीं कर सकते हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नियामानुसार, कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए सभी लोगों को वैक्सीनेशन कराना चाहिए, हालांकि यह पूरी तरह से लोगों की इच्छा पर निर्भर है। हालांकि कोई भी कंपनी जोर-जबरदस्ती से कर्मचारियों पर दबाव डालकर टीकाकरण कराने को मजबूर नहीं कर सकती है।
आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आखिर कंपनियां, कर्मचारियों के टीकारण पर जोर क्यों दे रही हैं? और वैक्सीनेशन कराने के बाद लोगों को किस हद तक सरक्षित माना जा सकता है?