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कोरोना संकट: वैक्सीनेशन करा चुके लोग ओमिक्रॉन से कितने सुरक्षित हैं? डब्ल्यूएचओ ने किया बड़ा खुलासा

Wed, 22 Dec 2021 03:29 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वैक्सीन को असर - फोटो : PTI
भारत सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का कहर देखने को मिल रहा है। भारत में ओमिक्रॉन के अब तक 200 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें से सबसे ज्यादा केस महाराष्ट्र से सामने आए हैं।विदेशों में कोरोना के इस वैरिएंट ने हालात और भी बिगाड़ दिए हैं, ब्रिटेन में कोरोना ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, यहां एक ही दिन में 78 हजार से अधिक संक्रमितों की पहचान की गई है। स्वास्थ्य संगठनों के मुताबिक कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के बारे में विस्तार से जानने के लिए अभी भी शोध चल रहा है। अब तक के अध्ययनों के आधार पर कहा जा सकता है कि जिन लोगों ने वैक्सीनेशन करा लिया है उन्हें संक्रमण की गंभीरता से काफी हद तक सुरक्षित माना जा सकता है।



ओमिक्रॉन वैरिएंट से सुरक्षा के लिए मौजूदा वैक्सीन कितने असरदार हो सकते हैं, इस बारे में जानने के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि ओमिक्रॉन के खिलाफ मौजूदा वैक्सीन को ज्यादा असरदार नहीं माना जा सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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ओमिक्रॉन पर टीकों का प्रभाव - फोटो : Pixabay
ओमिक्रॉन पर मौजूदा वैक्सीनों का प्रभाव
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बुधवार को कहा कि प्रारंभिक साक्ष्य इंगित करते हैं कि कोविड-19 की मौजूदा वैक्सीन, ओमिक्रॉन वायरस से जुड़े संक्रमण और संचरण के खिलाफ कम प्रभावी हो सकती हैं, इस वजह से वैक्सीनेशन करा चुके लोगों में भी पुन: संक्रमण का खतरा बना हुआ है। डब्ल्यूएचओ ने अपने साप्ताहिक महामारी अपडेट में कहा कि वैक्सीन या  पिछले संक्रमण से प्राप्त प्रतिरक्षा, ओमिक्रॉन पर कितनी प्रभावी हो सकती है, इस बारे में बेहतर ढंग से समझने के लिए अधिक डेटा की आवश्यकता है, जिसके लिए वैज्ञानिक लगातार प्रयासरत हैं।
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ओमिक्रॉन वैरिएंट का खतरा - फोटो : Pixabay
कोरोना के कई अन्य वैरिएंट्स से भी खतरा
इससे पहले डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने मंगलवार को एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में बताया कि, ओमिक्रॉन को वैरिएंट ऑफ कंसर्न के रूप में वर्गीकृत किया गया है। फिलहाल जो साक्ष्य मिले हैं उसके आधार पर कहा जा सकता है कि इस नए वैरिएंट से संबंधित जोखिम अब भी बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि ओमिक्रॉन के साथ-साथ कई देशों में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने भी विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रखी है, हालांकि पिछले कुछ हफ्तों में डेल्टा संक्रमण के मामलों में गिरावट जरूर देखी गई है।
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कोरोना का बढ़ता खतरा - फोटो : pixabay
डेल्टा अब भी बना हुआ है चिंता का कारण
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनियाभर में डेल्टा वैरिएंट अभी भी प्रमुख चिंता का कारण बना हुआ है, हालांकि अल्फा, बीटा और गामा और ओमिक्रॉन की तुलना में इसके मामले पिछले 60 दिनों में कम होते जरूर दिख रहे हैं। कोरोना के पहले के वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन को अधिक संक्रामक माना जा रहा है, हालांकि तुलनात्मक नजरिए से इसकी बीमारी की गंभीरता कम है। कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट से निपटने के लिए लोगों को लगातार सावधानी बरतने की आवश्यकता है, जिससे कि समय रहते इसके प्रसार पर काबू पाया जा सके। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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