फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना से जंग: वैक्सीन लगवाने जा रहे हैं तो जान लीजिए यह बातें, ऐसी गलतियां पड़ सकती हैं भारी

Thu, 17 Jun 2021 06:48 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
कोविड-19 वैक्सीनेशन सभी के लिए जरूरी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
Medically Reviewed by-
डॉ शुचिन बजाज
निदेशक, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स

डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही
असिस्टेंट प्रोफेसर, दिल्ली एम्स


कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। 13 जून कर के आंकड़ों के मुताबिक देश के 22 फीसदी वयस्कों, 45 से अधिक आयु के करीब 42 फीसदी और 60 वर्ष से अधिक आयु के करीब 46 फीसदी लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है। इस आधार पर कहा जाए तो देश की 15 फीसदी आबादी को कम से कम एक खुराक जबकि 3.5 फीसदी आबादी को दोनों खुराक मिल चुकी हैं। अगर आपको अब तक वैक्सीन की एक भी डोज नहीं मिली है और टीकाकरण कराने की सोच रहे हैं तो आपके मन में भी कई तरह के सवाल होंगे।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक टीकाकरण कोरोना संक्रमण से सुरक्षा देने का सबसे बेहतर उपाय है, लेकिन इससे जुड़ी सावधानियों के बारे में भी सभी लोगों को जान लेना बेहद आवश्य है। आइए इस लेख में ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जानते हैं, जिनके बारे में आपके मन में तरह-तरह के ख्याल होंगे।
विज्ञापन

2 of 6
गर्भवती महिलाएं फिलहाल न कराएं वैक्सीनेशन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
किन्हें टीकाकरण नहीं कराना चाहिए?
अमर उजाला से बातचीत में उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के निदेशक डॉ शुचिन बजाज बताते हैं कि जिन लोगों को पहले से ही किसी चीज से गंभीर एलर्जी की शिकायत रह चुकी है, उन्हें टीकाकरण कराने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसके लिए डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां देते हैं जो इस तरह की एलर्जी की प्रतिक्रियाओं को बढ़ने नहीं देती हैं। इसके अलावा फिलहाल गर्भवती महिलाओं और बच्चों को वैक्सीनेशन कराने की अनुमति नहीं मिली है, क्योंकि ऐसे लोगों पर टीकों का ट्रायल नहीं हुआ है।
 
विज्ञापन

3 of 6
कोरोना वैक्सीन के प्रोटोकॉल जानिए - फोटो : पीटीआई
वैक्सीन लगवाने के बाद सेंटर पर कुछ देर जरूर रुकें
डॉ शुचिन बजाज बताते हैं कि वैक्सीनेशन कराने के बाद सभी लोगों को सेंटर पर कम से कम 30 मिनट तक जरूर बैठना चाहिए। ऐसा करने से किसी प्रकार की संभावित समस्या से बचा जा सकता है। कुछ लोगों को टीकाकरण के बाद गंभीर एलर्जी की समस्याएं हो रही हैं। एलर्जी के लक्षण वैक्सीन लगने के कुछ मिनटों बाद ही दिखने लगते हैं। इस स्थिति में वैक्सीनेशन सेंटर पर मौजूद डॉक्टर इसे नियंत्रित करने के लिए दवाइयां दे सकते हैं।
 

4 of 6
सभी टीके प्रभावी हैं - फोटो : PTI
कौन सी वैक्सीन ज्यादा प्रभावी है?
वैक्सीनेशन कराने जा रहे सभी लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता होगा। इस बारे में डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही (असिस्टेंट प्रोफेसर, दिल्ली एम्स) बताते हैं कि भारत में दी जा रही दोनों वैक्सीन, कोविशील्ड और कोवैक्सीन बेहद प्रभावी हैं। दोनों ही वैक्सीन की दूसरी डोज लग जाने के करीब दो हफ्ते बाद शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज देखने को मिली हैं। अध्ययनों में कोवैक्सीन की प्रभाविकता 81 फीसदी और कोविशील्ड की प्रभाविकता 78-90 फीसदी तक बताई गई है, हालांकि लोगों में इसका असर अलग-अलग हो सकता है।
 
विज्ञापन

5 of 6
कोरोना वैक्सीन से नहीं होती गंभीर दिक्कत - फोटो : iStock
क्या वैक्सीन लेने के बाद कोई गंभीर दिक्कत हो सकती है?
इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि  वैक्सीन लेना पूरी तरह से सुरक्षित है, इससे आपको बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है। वैक्सीन लेने के बाद कुछ लोगों में हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं जोकि सामान्य हैं। शरीर में किसी भी तरह के एंटीजन जाने पर इस तरह की प्रतिक्रिया होना सामान्य है। सामान्य तौर पर लोगों को बुखार या हाथ में दर्द हो सकता है, जोकि स्वत: ठीक हो जाता है इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
वैक्सीनेशन के हो सकते हैं हल्के साइड-इफेक्ट्स - फोटो : iStock
वैक्सीनेशन के बाद होने वाले साइड-इफेक्ट्स
डॉक्टरों के मुताबिक वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स एक से दो दिन में स्वत: ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों को वैक्सीन लगने वाली जगह पर दर्द और उस बांह में असुविधा का अनुभव हो सकता है। हल्के लक्षण महसूस होने पर पैरासिटमॉल ले सकते हैं। जहां पर वैक्सीन लगी हो वहां आइस पैक या ठंडी सेकाई कर सकते हैं। वैक्सीनेशन के बाद तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें, खूब मात्रा में पानी, फलों के जूस और पौष्टिक आहार लें। कुछ दिनों तक शराब और धूम्रपान से बचें।

-----------------
नोट: यह लेख उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के निदेशक डॉ शुचिन बजाज और डॉ अमरिंदर सिंह मल्ही (असिस्टेंट प्रोफेसर, दिल्ली एम्स) के सुझावों के आधार  पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें