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Latest Study: 30 फीसदी कोरोना संक्रमितों में हो सकती लॉन्ग कोविड की समस्या, ये स्थितियां बढ़ा देती हैं जटिलताएं

Tue, 19 Apr 2022 07:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लॉन्ग कोविड के जोखिमों को जानिए - फोटो : iStock
वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना संक्रमण और इसके कारण होने वाली जटिलताएं फिलहाल कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भारत सहित दुनिया के कई देशों में कोरोना के मामलों में एक बार फिर से उछाल देखा जा रहा है। हाल ही में सामने आए कोरोना के नए वैरिएंट्स और उनकी प्रकृति चिंता बढ़ाने वाली है। XE जैसे वैरिएंट्स को अत्याधिक संक्रामक बताया जा रहा है, जिससे बचाव के लिए विशेषज्ञ लोगों को और अधिक सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। कोरोना संक्रमण के साथ लॉन्ग कोविड के बढ़ते मामले भी इस समय विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती का कारण बने हुए हैं।

कोरोना संक्रमण से ठीक होने के लंबे समय बाद तक भी कुछ लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य जटिलताओं का अनुभव होता रहता है, इसे मेडिकल का भाषा में 'लॉन्ग कोविड' के नाम से जाना जाता है। इसी संबंध में शोध कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने बड़ा दावा किया है। अमेरिका स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और लॉस एंजिल्स (यूसीएलए) के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि कोरोना संक्रमित 30 फीसदी लोगों में लॉन्ग कोविड का खतरा हो सकता है। लॉन्ग कोविड के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं, साथ ही इसकी जटिलताएं कुछ महीनों से लेकर एक साल से अधिक समय तक भी रह सकती हैं। आइए इस अध्ययन के बारे में जानते हैं।
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पोस्ट कोविड की समस्याएं - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड के खतरे को जानिए

जर्नल ऑफ जनरल इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि कुछ  स्थितियां संक्रमितों में लॉन्ग कोविड या पोस्ट एक्यूट सीक्वेल ऑफ कोविड-19 (पीएएससी) विकसित होने का कारण बन सकती हैं। इसमें संक्रमण के दौरान जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत रही हो, पहले से मधुमेह या हाई बॉडी मास इंडेक्स की समस्या के शिकार रहे हों, उनमें इसका खतरा अधिक हो सकता है।

लॉन्ग कोविड के कुछ मामले एसिम्टोमैटिक संक्रमितों में भी देखने को मिले हैं, हालांकि ऐसे केस काफी कम हैं। 
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लॉन्ग कोविड में थकान की समस्या - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

अप्रैल 2020 से फरवरी 2021 के बीच किए गए इस अध्ययन में 1,038 कोरोना संक्रमितों को शामिल किया गया, उनमें से 309 में लॉन्ग कोविड के मामले सामने आए। इन 309 लोगों में शोधकर्ताओं ने अलग-अलग तरह के लक्षण और रोग की जटिलताओं का अनुभव किया।

संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती रह चुके 31 फीसदी लोगों ने लॉन्ग कोविड में थकान और 15 प्रतिशत ने सांस की तकलीफ की जटिलताओं के बारे में बताया। जिन लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं थी, उनमें से 16 प्रतिशत लोगों ने लंबे समय तक गंध न आने की समस्या के बारे में सूचित किया। 

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लंबे समय तक भी रह सकती है लॉन्ग कोविड की दिक्कत - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस अध्ययन के बारे में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य विज्ञान के सहायक  प्रोफेसर सन यू कहते हैं, इस शोध से पता चलता है कि कोरोना संक्रमण के साथ-साथ हमें लॉन्ग कोविड के लक्षणों और रोगियों में इसकी जटिलताओं को लेकर भी विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।

कई कारक जैसे कोमोरबिडीटी, सोशियोडेमोग्राफिक फैक्टर, वैक्सीनेशन और वह किस वैरिएंट से संक्रमित रह चुका है, ये सभी लॉन्ग कोविड को पैदा करने में विशेष भूमिका निभाते हैं। संक्रमण से ठीक होने के बाद भी रोगियों और चिकित्सकों को स्थिति का फॉलोअप जरूर करते रहना चाहिए। 
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लॉन्ग कोविड पर विशेष ध्यान देने की जरूरत - फोटो : iStock
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष? 

अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ता कहते हैं, यह बड़ा विषय है कि संक्रमण के दौरान रोगी ने किस प्रकार के लक्षणों का अनुभव किया है, इसके आधार पर आगे की जटिलताओं का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। चूंकि रोग के लक्षण वैरिएंट की प्रकृति और रोगी की शारीरिक स्थिति, दोनों पर निर्भर करते हैं, ऐसे में लॉन्ग कोविड के उभरते वैश्विक जोखिमों को लेकर  स्वास्थ्य विशेषज्ञों को विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है। कुछ स्थितियों में लॉन्ग कोविड के कारण भी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, इस चुनौती को भी ध्यान में रखा जाना आवश्यक है। 

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स्रोत और संदर्भ
About 30 percent of COVID patients develop 'Long COVID,' research finds

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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