कोरोना के बाद अचानक मौत के मामले
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अध्ययन में क्या पता चला?
आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (एनआईई) ने 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 47 अस्पतालों में अध्ययन किया है। नड्डा ने बताया कि 1 अक्तूबर 2021 से 31 मार्च, 2023 के दौरान सडन डेथ के ये मामले स्वस्थ व्यक्तियों में थे, जिनमें पहले से कोई ज्ञात कोमोरबिडिटी की शिकायत नहीं थी पर इनकी अस्पष्टीकृत कारणों से मृत्यु हो गई। इन रोगियों के विभिन्न स्तर पर जीवनशैली और स्वास्थ्य स्थितियों के डेटा एकत्रित किए गए।
नड्डा ने बताया कि अध्ययन में यह देखा गया कि कोविड वैक्सीन की दो खुराक लेने से अस्पष्टीकृत आकस्मिक मृत्यु की संभावना काफी कम हो गई।
कोविड संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती होना, परिवार में पहले से सडेन डेथ की हिस्ट्री, मृत्यु के 48 घंटे पहले अत्यधिक शराब पीने, नशीली दवाओं के सेवन या अत्यधिक शारीरिक गतिविधि करने से आकस्मिक मृत्यु की संभावना बढ़ गई। उन्होंने कहा, इससे स्पष्ट होता है और अध्ययन में पाया गया है कि कोविड-19 टीकाकरण से भारत में अस्पष्टीकृत आकस्मिक मृत्यु का जोखिम नहीं बढ़ा है।
अध्ययन के आंकड़ों के शुरुआती विश्लेषण से पता चलता है कि हार्ट अटैक या मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (एमआई) युवाओं में अचानक मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है। हालांकि महत्वपूर्ण बात यह है कि कोविड महामारी से पहले के वर्षों की तुलना में, इसके कारणों के पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव भी नहीं देखा गया है।