फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budget 2026-27: कैंसर रोगियों को बड़ी राहत, सस्ती होंगी दवाएं; जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ

Sun, 01 Feb 2026 08:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत लंबे समय से कैंसर के इलाज की महंगी लागत से जूझ रहा है। बजट में कैंसर मरीजों को राहत देते हुए, 17 जान बचाने वाली दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से पूरी तरह छूट दी गई है। इससे कैंसर के इलाज की लागत में कमी आने की संभावना है।
विज्ञापन
1 of 4
केंद्रीय बजट 2026-27: कैंसर रोगियों को राहत - फोटो : Freepik.com
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (1 फरवरी 2026) को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। इसमें बुनियादी ढांचे, औद्योगिक आत्मनिर्भरता, विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी सुधार सहित देश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत बनाने के लिए घोषणाएं की गईं।

बजट में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सुधार और लोगों तक इलाज की सहज उपलब्धता के लिए भी जरूरी ऐलान किए गए। मेंटल हेल्थ की बढ़ती समस्याओं और इसके अनुपात में डॉक्टर्स और संस्थानों की कमी को पूरी करने के लिए 'निमहांस-2' संस्थान खोलने की घोषण की गई है। सबसे बड़ी राहत कैंसर रोगियों के इलाज की दिशा में मिला है। 

बजट में कैंसर मरीजों को राहत देते हुए, 17 जान बचाने वाली दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से पूरी तरह छूट दी गई है। इसके अलावा, सात अन्य दवाओं को कस्टम ड्यूटी में राहत दी जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा, इस कदम का मकसद कैंसर के इलाज की लागत को कम करना और जरूरी दवाओं तक पहुंच बढ़ाना है। ये उन मरीजों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है जो एडवांस और जटिल कैंसर के लिए इम्पोर्टेड दवाओं पर निर्भर हैं।
विज्ञापन

2 of 4
कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती - फोटो : Freepik.com
कम होगा इलाज पर खर्च

बजट के दौरान वित्त मंत्री ने कहा, भारत में डायबिटीज, कैंसर और ऑटो-इम्यून बीमारियों जैसी नॉन कम्युनिकेबल डिजीज का बोझ बढ़ रहा है।
 
  • ड्यूटी में छूट से कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कीमतें सीधे कम होंगी। 
  • इंपोर्टेड ऑन्कोलॉजी दवाओं पर अक्सर बेसिक कस्टम ड्यूटी लगती है, जिससे उनकी कीमत काफी बढ़ जाती है। इस टैक्स को खत्म करके, सरकार को उम्मीद है कि लागत में होने वाली बचत मरीजों तक पहुंचेगी, जिससे कैंसर केयर से जुड़े सबसे बड़े खर्च में कमी आ सकती है।

भारत लंबे समय से कैंसर के इलाज की महंगी लागत से जूझ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं की कीमतों में मामूली कमी भी लंबे समय तक इलाज कराने वाले परिवारों के लिए काफी बचत में बदल सकती है। इसलिए, 17 कैंसर से संबंधित दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में छूट को मरीजों के लिए जेब से होने वाले भारी खर्च को कम करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास बीमा कवरेज नहीं है।
विज्ञापन

3 of 4
बजट में कैंसर रोगियों को राहत - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

यूनियन बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए मेदांता के चेयरमैन और एमडी डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा, ये सभी सही दिशा में उठाए गए मजबूत कदम हैं। भारत संक्रामक बीमारियों को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। दूसरी ओर, कैंसर, मोटापा और डायबिटीज जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है। सवाल यह है कि हम इसे कैसे कंट्रोल करें?
 

बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर बनाने के लिए काफी रिसर्च की जरूरत होती है और इसके लिए प्रोत्साहन दिया गया है। कैंसर की दवाएं सस्ती होने से मरीजों के परिजनों की जेब पर पड़ने वाला भार कम होगा। इसके अलावा मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट बनाना मानसिक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में बेहतर कदम हो सकता है।
विज्ञापन

4 of 4
दवाओं के सीमा शुल्क में छूट - फोटो : Freepik.com
पिछले बजट में भी कैंसर की दवाओं के सीमा शुल्क में दी गई थी छूट

साल 2025-26 के बजट में भी वित्तमंत्री ने कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित रोगियों को राहत प्रदान करते हुए, 36 जीवन रक्षक दवाओं की बेसिक सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट दी थी। इसके अलावा 6 अन्य जीवन रक्षक दवाओं को रियायती छूट दी जाएगी। सीमा शुल्क में छूट के अलावा, वित्तमंत्री सीतारमण ने हर जिले में कैंसर देखभाल केंद्र स्थापित करने की भी घोषण की थी। इस पहल का उद्देश्य रोगियों के लिए गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार को सहज और आसान बनाना था। 


----------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें