मस्तिष्क की समस्याएं
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शोध के लिए परिजनों ने किया दिमाग का दान
बेहद कम उम्र में डिमेंशिया से मरने वाले आंद्रे यारहम के परिजनों ने उनके दिमाग को दान कर दिया है, ताकि वैज्ञानिक इसपर शोध कर सकें। उनकी मां सामंथा फेयरबर्न का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि दिमाग दान करने से इस सबसे क्रूर बीमारी के बारे में और ज्यादा पता चल पाएगा।
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ महीने पहले ही डॉक्टरों ने जांच के दौरान आंद्रे यारहम के शरीर में एक प्रोटीन के म्यूटेशन का पता लगाया था, जिसकी वजह से उसे फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया हो गया था। ये डिमेंशिया बीमारी का एक दुर्लभ रूप है जो 20 में से लगभग एक व्यक्ति को प्रभावित करता है।
क्या हो रही थीं दिक्कतें?
मृतक की मां ने कहा, साल 2022 में यारहम को चीजें तेजी से भूलने की दिक्कत होने लगीं, हालांकि इससे भी ज्यादा उसका व्यवहार बदलने लगा था। डॉक्टरों ने जांच के दौरान ब्रेन स्कैन किया जिसमें उसके दिमाग में असामान्य सिकुड़न पाई गई, जिसके बाद विशेषज्ञों ने बताया कि उसे दुर्लभ तरह का डिमेंशिया हो गया है।
- डिमेंशिया यूके के अनुसार, डिमेंशिया की बीमारी याददाश्त, सोचने-समझने, भाषा और व्यवहार को प्रभावित करती है। ये अल्जाइर रोग का एक प्रकार है। अल्जाइमर वालों में डिमेंशिया का खतरा अधिक होता है।
- फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया का अक्सर जेनेटिक कनेक्शन होता है, जिसका मतलब है कि जिन लोगों को यह होता है उनके किसी करीबी रिश्तेदारों में भी ये दिक्कत रही हो सकती है।
- जेनेटिक टेस्ट से पता चल सकता है कि किसी व्यक्ति को इसका खतरा है या नहीं।