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Type Of Roti: सिर्फ गेहूं का आटा नहीं! सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं ये 4 आटे, डाइट में कर सकते हैं शामिल

Mon, 14 Jul 2025 07:51 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय घरों में रोटी हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। पर बहुत कम लोग जानते हैं कि गेहूं का आटे के अलावा भी कुछ वैकल्पिक आटे भी होते हैं। ये न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि पोषक तत्वों, फाइबर और खनिजों से भरपूर हैं, जो पाचन, हृदय और ब्लड शुगर के लिए फायदेमंद हैं।
 
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आटा - फोटो : Freepik.com
Type Of Flour: हमारे भारतीय घरों में रोटी सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। आमतौर लोग गेहूं के आटा की रोटी खाना पसंद करते हैं, इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें कुछ प्रमुख कारण ये हैं कि बाकी अनाज की तुलना में गेहूं आसानी से उपलब्ध हो जाता है और साथ में इसे डाइट में शामिल करने कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं। बहुत कम लोगों को मालूम है कि गेहूं के आटे के अलावा भी कई आटे के विकल्प मौजूद हैं। ये आटे भी न सिर्फ स्वाद में अनोखे हैं, बल्कि पोषण के मामले में भी गेहूं को टक्कर देते हैं।

ये केवल साधारण आटे नहीं हैं, बल्कि पोषक तत्वों, उच्च फाइबर और आवश्यक खनिजों का भंडार हैं। इन्हें अपनी डाइट में शामिल करने से न केवल आपके पाचन तंत्र में सुधार होता है, बल्कि ये हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित करने में भी अद्भुत भूमिका निभाते हैं।
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रागी का आटा - फोटो : Adobe Stock
रागी का आटा
रागी का आटा, जिसे फिंगर मिलेट भी कहते हैं, कैल्शियम, आयरन और फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत है। यह हड्डियों को मजबूत करता है और एनीमिया को रोकने में मदद करता है। रागी में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जो मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद है। रागी की रोटी, डोसा बनाकर इसका सेवन किया जा सकता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा और इम्यूनिटी के लिए भी लाभकारी हैं।

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बाजरा अनाज - फोटो : Adobe Stock
बाजरा का आटा
बाजरा का आटा, विशेष रूप से सर्दियों में, शरीर को गर्माहट और ऊर्जा प्रदान करता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होता है, जो हृदय स्वास्थ्य और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। बाजरे की रोटी, जिसे 'बाजरे का भाकरी' भी कहते हैं, ग्रामीण भारत में लोकप्रिय है। बाजरा का आटा ग्लूटेन-मुक्त होता है, जिससे सीलिएक रोगियों के लिए यह सुरक्षित विकल्प है।

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ज्वार का आटा - फोटो : Adobe Stock
ज्वार का आटा
ज्वार का आटा फाइबर, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। यह पाचन को बेहतर बनाता है और वजन नियंत्रण में मदद करता है। ज्वार की रोटी, जिसे 'ज्वार भाकरी' कहते हैं। ज्वार का आटा भी ग्लूटेन-मुक्त होता है, यही वजह है कि एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए ये उपयुक्त आटा माना जाता है। यह ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखने में भी मदद करता है।
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भुना हुआ भुट्टा - फोटो : Adobe Stock
मक्के का आटा
मक्का का आटा, जिसे मकई का आटा भी कहते हैं, विटामिन ए, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। यह ऊर्जा प्रदान करता है और आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। मक्के की रोटी, जिसे 'मकई की रोटी' के नाम से जाना जाता है, सर्दियों में सरसों के साग के साथ खूब पसंद की जाती है। यह ग्लूटेन-मुक्त होने के साथ-साथ पाचन के लिए हल्का है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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